Kalam (Hindi Poetry)

Kalam (Hindi Poetry)

By Dr. Sudhanshu KumarArts
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Kalam (Hindi Poetry) episodes

  • निरपेक्ष काल की सापेक्षता

    संसार सागर में समय की सापेक्षता सबके साथ सन्निहित है। स्वयं में निरपेक्ष होते हुए भी वह शाश्वत सापेक्ष है। अगर हम यह मान लें कि वक्त ही जगत में हमें लाया है और कालांतर में वही लेकर जायेगा तो इस कबूतर की तरह हम भी दुनियाभर के झंझावातों से भयमुक्त हो जायेंगे। क्या स्थूल वस्तुओं के साथ हम निरपेक्ष रह सकते हैं। आइए निरपेक्षता के पाठ को पढ़ते हैं इस कबूतर के जोड़े से।

    5 min
  • मनोहर

    मनोहर का मस्तिष्क अनियन्त्रित हो गया है। सामान्य जन की भाषा में उसे हम पागल कह सकते हैं। मनोहर जीवन के उस तिराहे पर हैं जहाँ उनका अतीत अच्छा नहीं था लेकिन वर्तमान और भविष्य तो अन्धकार के सागर में गोते लगा रहा है। मानव जीवन के चार पुरुषार्थ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष का उनके लिए क्या महत्व है? इस पर विचार करते हुए सुनते हैं हमारी कविता " मनोहर "।

    5 min
  • चिकित्सक का धर्म

    पेशेवर डॉक्टर सेवक है या व्यापारी? क्या सेवक को व्यापार करने का प्रयास नहीं करना चाहिए या व्यापारी को सेवा नहीं करनी चाहिए? जैसे अच्छे और बुरे विचार शरीर के अभिन्न अंग हैं वैसे ही जगत के बाजार में सेवा, व्यापार का अभिन्न अंग है। सेवा में कितना व्यापार होना चाहिए यह वाद-विवाद का विषय है। इस विवाद में न पड़ते  हुए डाक्टर के कर्म को सुनते हैं हमारी कविता " चिकित्सक का धर्म " से।

    4 min
  • अवसर

    अवसर मिलने पर उसका लाभ लेना मानवीय स्वभाव है। अवसर का लाभ लेना अगर हमारे लिये अच्छा है तो हमारे जन प्रतिनिधियों के लिये भी अच्छा होना चाहिए क्योंकि वे आखिरकार हमारा ही तो प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। चुनाव के पहले गठजोड़ का अवसर सभी दलों को मिला हुआ है। गठबन्धन के अवसर को राजनीतिक दल कैसे भुना रहे हैं? सुनिए हमारी कविता "अवसर" से।

    4 min
  • काँपती काया

    जीवन के जीव से अलग होने के पहले शरीर किन-किन भौतिक, रासायनिक और मनोवैज्ञानिक अवस्थाओं से होकर गुजरता है? काया की गति और गतिविधियों में क्रमिक ह्रास काल जनित है। तन की इस अवस्था में उसके शरीर में स्थित अंगतंत्र ही उसका साथ नहीं देते। इसी अवस्था की अनुभूति करयेगी हमारी कविता " काँपती काया " ।

    5 min
  • चौराहे पर राजनीतिक चर्चा

    एक बार फिर चुनाव का मौसम आने वाला है। सत्ता की चाहत रखने वाले नेतागण अपनी बाजीगरी दिखाने लगे हैं। उनके गठजोड़ पर गाँव के चौराहों पर
    चर्चाओं का बाजार गरम है। आइए इस गर्मागर्म माहौल में अपना हाथ सेंकते हैं हमारी कविता "चौराहे पर राजनीतिक चर्चा" से।

    4 min
  • राजनीति में राम

    एक समय था जब भाजपा को अयोध्या के श्रीराम मन्दिर आन्दोलन के कारण साम्प्रदायिक पार्टी कहा जाता था। लेकिन उसी समय जनता ने भाजपा सरकार चुनकर यह बता दिया कि जनभावना का सम्मान करने वाली पार्टी साम्प्रदायिक नहीं हो सकती। आज राम नाम की शक्ति का ही परिणाम है कि भारत देश का शासन राम नाम का जप करने वालों के हाथ में है। विपक्षियों के किसी नेता में उन्हें साम्प्रदायिक कहने का साहस नहीं है। राम राज्य का अर्थ यह कदापि नहीं है कि दूसरे धर्म के लोगों से भेदभाव हो। हमारे राम सबके हैं, इसी भावना को महसूस करते हैं हमारी कविता "राजनीति में राम" से।

    5 min
  • सत्ता का खेल

    राजनीति का अर्थ है सत्ता के लिए संघर्ष। येन केन प्रकारेण सत्ता मिलनी चाहिए। सत्ता मिल जाने के बाद तो कुर्सी बचाने के लिए संघर्ष होता है। राज्य की नीतियों का निष्पादन तो नौकरशाह करते हैं जो सैद्धांतिक रूप में राजनीति नहीं करते। व्यावहारिक रूप में राजनीति तो हम सभी कहीं न कहीं करते ही हैं। राजनीतिज्ञों के आपसी सम्बन्धों की व्यंगात्मक प्रस्तुति है हमारी नयी कविता " सत्ता का खेल "।

    4 min
  • आखिरी सन्देश

    व्यक्ति का जीवन संघर्षों की कहानी है। इन्हीं संघर्षों में ही शारीरिक तथा मानसिक पीड़ा और आनंद सन्निहित है। शरीर की जीवन यात्रा में इन अनुभूतियों से प्राणिमात्र का चोली-दामन का साथ है। श्मशान मानव जीवन यात्रा का अन्तिम सत्य है। काया से किए हुए सारे कर्म और धर्म का बन्धन यहीं टूट जाता है। पीड़ा देने वाले आग के अंगारे यहाँ पीड़ा का अंत करते हुए प्रतीत होते हैं।

    5 min
  • तारिणी

    प्राणिमात्र का जीवन सरल और सहज है। हम मनोविकारों के प्रभाव में आकर ही इसे दुरूह और आडम्बरयुक्त बना देते हैं।वाह्य आडम्बरों के कारण ही समस्यायें आती हैं। ढोंग ही समाज में फैले समस्त कुत्सित मनोविकारों का मूल है। आइये इन्हीं विचारों पर कुठाराघात करते हैं हमारी कविता      "तारिणी" से।

    5 min

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Presented podcasts will feature spoken lines of Hindi poems written and narrated by Dr. Sudhanshu Kumar. The episodes are a trial to reach out various sentiments and thoughts through words.