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आनंद को मंदिर के अंदर चिल्लाता देख तन्वी गुस्से से आनंद के पास जाती है और उसके गालों पर जोरदार एक चांटा लगाते हुए कहती है कि तुम्हारे अंदर इतनी भी समझ नहीं है और तुम्हें इतना भी नहीं पता है कि मंदिर के अंदर खड़े होकर लड़ाई झगड़ा और चिल्लाया तो बिल्कुल नहीं जाता है ना समझ इंसान हो तुम तन्वी की बात सुनने के बाद आनंद कहता है कि मैं तुमको छोडूंगा नहीं देख लेना
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तन्वी पुजारी बाबा से बातें कर ही रही थी कि पीछे से कुछ लड़ाई झगड़ा जैसी आवाज सुनाई देती है आवाज को सुनने के बाद तन्वी कहती है कि यह मंदिर में कौन लड़ाई झगड़ा कर रहा है क्या उसे नहीं पता है मंदिर पूजा और आस्था का केंद्र है इस पर पुजारी बाबा कहते हैं कौन समझाए की मंदिर आस्था का केंद्र है लड़ाई झगड़ा का नहीं यह नई जनरेशन का अलग ही लोचा है।
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मंदिर में तन्वी को शांत बैठा देख पुजारी बाबा तन्वी के पास आते हुए पूछते हैं कि क्या हुआ है जो तुम इस तरह शांत बैठी हो तन्वी उन्हें जवाब देते हुए कहती है कि मैं सोच रही हूं कि आश्रम के बच्चों का क्या होगा ,इस पर पुजारी बाबा कहते हैं की परेशान होने वाली क्या बात है तुम हो ना और आश्रम के सभी बच्चे तुमको मानते भी हैं पुजारी बाबा की बात सुनने के बाद तन्वी धीमें स्वर में कहती है कि यही तो दिक्कत है कि अब मैं नहीं रहूंगी।
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इतने बड़े बिजनेसमैन होकर ₹10 के लिए अम्मा से बहसबाजी कर दिए रागिनी की बातों का जवाब देते हुए आर्यन कहता है कि मेरी गर्लफ्रेंड होने के बाद भी मेरे ऊपर चिल्लाई क्यों और तुम अपनी बहन की धमकी क्यों देती हो धमकी देने से अच्छा है मिलवा दो मुझे, आर्यन की बातों का जवाब देते हुए रागिनी रहती है यदि मेरी बहन को पता चल जाए कि तुम्हारी वजह से मुझे परेशान भी होना पड़ता है और तुम्हारा इंतजार भी करना पड़ता है वह तुम्हारा पैर तोड़ देगी बस यही वजह है कि नहीं मिलवाती हूं ,इस पर आर्यन कहता है रहने दो मत मिलवाओ साली जी से बहुत खतरनाक है ।
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रागिनी तन्वी दोनों मंदिर के लिए निकल जाते हैं तभी रागिनी को कुछ याद आता है और वह तन्वी से कहती है कि वह भी 5 मिनट में आती है यह बोलने के बाद रागिनी बाहर पास की दुकान के पास जाती है जहां से बहुत ज्यादा आवाज आता है या देखकर रागिनी पूछती है कि हुआ क्या है बात क्या है तभी रागिनी को पता चलता है कि उसके सामने खड़ा शख्स बहुत ही बदतमीजी बात कर रहा है, रागिनी उसे शख्स पर गुस्सा करने लगती है और समझने लगती है की बात करने का एक तरीका होता है तो तुम उसे तरीके में बात करो और यह देख कर बात करो कि उनकी उम्र क्या है ,रागिनी की बात सुनने के बाद वह शख्स भी कहता है मुझसे जो जैसा बात करता है मैं उसे उसी लहजे में बात करता हूं।
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रागिनी तन्वी के पास जाते हुए कहती है कि एक बात बोलूं तन्वी तू मानेगी क्या रागिनी को ऐसा बोलना देख तन्वी रहती आप बोलो मैं ना मानो ऐसा हो सकता है क्या आप मेरी फेवरेट वन हो मैं आपकी सारी बातें मानूंगी, तन्वी की बातें सुनने के बाद रागनी कहती कि आज मेरे साथ मंदिर चलेगी ,मेरा बहुत मन कर रहा है रागिनी की यह बात सुनते ही तन्वी रहती है कि पर मेरा मन नहीं कर रहा है मंदिर जाने का ,तन्वी से ऐसा जवाब पाने के बाद रागनी उदास हो जाती है और कहती है कि तू मेरे लिए किसी को पीट सकती है पर मेरे लिए मंदिर नहीं जा सकती है, उसके बाद तन्वी कहती है अच्छा ठीक है मैं आपके साथ मंदिर चल रही हूं बस उदास मत हो आप क्योंकि आप उदास अच्छी नहीं लगती हो, इस पर रागिनी रहती है कि उदास तू भी अच्छी नहीं लगती है ।
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तन्वी को उदास बैठा देख रेनू सीमा से कहती है कि देख बच्चे की कैसी हालत हो गई है बच्ची चंचल अच्छी लगती है ऐसी अच्छी नहीं लगती है कुछ कर तु, रेणु की बात सुनने के बाद सीमा रहती है हां मैं कुछ करती हूं उसके बाद सीमा अंदर रागिनी के पास जाते हुए कहती है कि रागिनी तुम तन्वी को मंदिर लेकर जाओ, मंदिर जाने के बाद तन्वी को अच्छा लगेगा सीमा की बातें सुनने के बाद, रागिनी सीमा को समझती है, की वह तन्वी से प्यार से बात करें, रागिनी की बात सुनने के बाद सीमा रागनी से कहती है कि जितना बोला है उतना करो बस |
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रागिनी की बार-बार समझाने के बाद तन्वी खाना खाकर सो जाती है थोड़ी देर बाद रेनू सीमा के पास जाती है और उससे कहती है कि तू ऐसा क्यों कर रही है तू तो तन्वी से बहुत ज्यादा प्यार करती है रेणु की बातें सुनने के बाद सीमा रहती है मैं जो कर रही हूं उसमें तन्वी की भलाई है सालों पहले उसे खोते खोते बची हूं मैं दोबारा उसे खोना फिर नहीं चाहूंगी वह आए दिन किसी न किसी से झगड़ा करती रहती है और अगल बगल के लोग तन्वी के बारे में कैसी-कैसी बातें करते हैं आपको पता है ना लोग अपने बच्चों को तन्वी के साथ नहीं भेजते हैं क्योंकि डरते हैं कि उनके भी बच्चे तन्वी के जैसे गुंडे ना बन जाए ,मुझे अब यह सब बर्दाश्त नहीं हो रहा है और मैं नहीं चाहती कि तन्वी रागिनी को मेरी बीमारी के बारे में पता चले बस यही वजह है जिसके वजह से मैं चाह रही हूं कि तन्वी काशी से दूर जाए और आप मेरा साथ दें ना की रागनी और तन्वी का क्योंकि मैं जो कर रही हूं वह सही है गलत नहीं और,मैं तन्वी की भलाई ही चाहूंगी |
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तन्वी को चुप करते हुए रागिनी रहती है कि चुप हो जा मत रो इतना तेरे साथ मैं भी तो बाहर जा रही हूं मैं तेरा पूरा ख्याल रखूंगी, रागिनी की बातें सुनने के बाद तन्वी कहती है कि मैं काशी से दूर नहीं जाना चाहती काशी में मेरा बचपन बीता है मेरी यादें हैं प्लीज समझो ना चाचा को कि मैं काशी से दूर नहीं जाना चाहती हुं,रागिनी तन्वी को चुप नहीं कर पाती है, उसके बाद रागिनी अपनी दादी रेनू के पास जाती है और उनसे कहती है कि वह तन्वी और सीमा में से किसी भी को समझा दे क्योंकि दोनों को समझ पाना मेरे बस में नहीं है रागिनी की बातें सुनने के बाद रेनू हां मैं हर हिलाते हुए कहती हैं कि, अच्छा ठीक है मैं सीमा से बात करूंगी देखती हूं उसका फैसला बदल पाती हूं या नहीं |
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अपनी बहन तन्वी का इशारा पाते ही रागिनी उसके बचाव करने के लिए उसके पास आ जाती है और अपनी मां सीमा को समझाते हुए कहती है कि जाने दो बच्ची है सुधर जाएगी , तनु को समझाते समझाते सीमा इमोशनल हो जाती है,अपनी चाची को रोता देख तनु उनसे माफी मांगती है वह दोबारा ऐसा फिर नहीं करेगी यह उनसे कहती है तनु की बात सुनने के बाद उसकी चाची रहती हैं कि ऐसा मैं दोबारा होने नहीं दूंगी क्योंकि तुम काशी छोड़कर जा रही हो , सीमा की ऐसी बातें सुनने के बाद तन्वी रोने लगती है।
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