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आज मुझे महसूस हुआ के इस एपिसोड में श्वेता शर्मा बात करेंगी Me Time की। तो क्या होता है ये Me Time? सोशल मीडिया पैट ज़बरदस्त trend करने वाला ये शब्द क्या आज से 10 साल पहले सुना था? क्या आज तक हमारे माँ-बाप ने हम से कहा कि जाओ हमें अपना Me Time एन्जॉय करने दो? श्वेता शर्मा अपने अनुभव से बताएंगी कि उनके लिए क्या होता है Me Time, कि सबके लिए अलग-अलग होता है ये Me Time. सुनिए आज का ये दिलचस्प एपिसोड और सोचिए कि आपके लिए क्या है आपका Me Time.
आज श्वेता शर्मा बात करने वाली हैं क्रिसमस की और उसके साथ आती चाय की, ठन्डे हाथों में गरम चाय और साथ में गॉसिप, और बिन उम्मीद के बर्फ की। श्वेता बताएंगी कि कैसे चाय का घूँट उस सर्दी में अमृत का काम कर रहा था। मगर मौसम ने ली करवट, कैसा रहा श्वेता की ज़िंदगी का पहला snowfall. वो ठण्ड और उसके साथ आने वाला सरप्राइज, सब जानेंगे आज इस एपिसोड में। दोस्तों के साथ पहाड़ों पर जाना, sunrise देखना, यही छोटे छोटे पल तो हैं जो जिनके लिए हम जीते हैं। और इन्हीं पलों का एहसास कराएंगे आज आपको ABP Live Podcasts पर
आज श्वेता शर्मा बात करेंगी उन दिनों की जब फ्री हो कर बाहर निकला जाता था और उसे भी आम बात समझा जाता था। कोरोना के बाद कैसा लग रहा है लोगों को बहार निकल कर। थिएटर जाकर। कैसे जब श्वेता वहां पहुंची तो खाली पड़ा था टिकट काउंटर और कैसे नए दौर में नए तरीके से अब एंटर हैं लोग थिएटर में। श्वेता हम सबको आज ये एहसास कराएंगी कि कितना बड़ा प्रिविलेज है बाहर निकलना, थिएटर जाना। आज की सीख है कि छोटे-छोटे लम्हों का अभी से खुल कर मज़ा लेना सीख लें।
आज मुझे महसूस हुआ के इस एपिसोड में श्वेता शर्मा बात करेंगी उस शख़्स की जो ऑफिस को घर बना देता है। आपको याद है कैसे सब नया-नया लगता है। कैसे आप उस शख्स, उस चेहरे की तलाश में होते है जो आपको बताए कि ये नई दुनिया भी अच्छी है और इसमें ढलना भी खूबसूरत हो सकता है। इसके रंग में रंगना, अच्छा है। कितना ज़रूरी है ये शख़्स और उसका चेहरा, जानें आज के एपिसोड में।
आज श्वेता शर्मा बात करेंगी उन हसीन दिनों की जब वो अपनी बहन के साथ मिल कर TV देखा करती थीं। क्या आप को भी याद हैं Hip Hip Hurray और शक्तिमान ? क्या आपको भी याद है कैसे शक्तिमान हर एपिसोड के अंत में एक moral education की सीख देते थे? आज बात होगी उन सभी पुराने cartoons और पुराने सीरियलों की। कैसे अलग है आज का एंटरटेनमेंट पिछले एंटरटेनमेंट से, आपको बताएंगी श्वेता, आज के एपिसोड में।
आज मुझे महसूस हुआ के एपिसोड में श्वेता शर्मा दिवाली की बधाई के साथ-साथ पटाखों की बात करेंगी। कैसे जब चरखी घूमती थी तो हर ओर उसी का शोर और रौशनी फैला करती थी। मगर गौर से देखेंगे तो आपको दिवाली में रौशनी के अलावा धुआं दिखेगा, दिवाली के अगले दिन सड़क पर पड़ा पटाखों का कचरा भी दिखेगा। सुनें आज का एपिसोड और फिर से सोचें कि पठाखे जलाये तो क्या ख़ाक दिवाली मनाई।
आज मुझे महसूस हुआ के इस एपिसोड में श्वेता शर्मा बात करेंगी दिवाली, और ख़ासकर, किचन की सफाई के बारे में। कैसे होती है किचन की सफाई दिवाली में..... वो जालों में फंसे बर्तन, स्टैंड। मगर घर की सफाई के साथ मन का भी झाड़ू-पोंछा तो बनता है। इस दिवाली घर की सफाई के साथ साथ मन की भी सफाई करें, जो छूटा है उसे पूरा करें, वो शुरुआत जो बरसों से चाहते उसे आज शुरू करें।
आज श्वेता शर्मा बात करेंगी Reality TV की। रोज़-रोज़ आते हैं नए नए Reality TV shows. आज बात होगी सभी reality shows के पापा की - Big Boss. मगर आज Big Boss की बात हो क्यों रही है, ये आप सिर्फ एपिसोड सुन कर ही समझ सकते हैं। श्वेता बताएंगी कि वो क्यों देखना पसंद करती हैं Big Boss. विवादों से भरा ये शो और भी बहुत कुछ है, क्या है, वो जानिए आज के एपिसोड में।
सोनल तलवार आज के एपिसोड में बात करेंगी त्योहारों के समय पड़ने वाली स्कूल की छुट्टियों की। कैसे teachers दे देते थे ज़्यादा होमवर्क क्योंकि त्यौहार। कैसे त्योहारों में घर पर शोर-शराबा चालू हो जाता था। क्या करते थे बचपन में त्योहारों पर, कैसे तैयार होते थे, गुड्डी के बाल खाने जाते थे। सुनिए आज का ये एपिसोड पुराने दिनों की गलियों में वापस जाने के लिए
आज श्वेता शर्मा बात करेंगी दिमागी hurdles के बारे में जो आपको meditate नहीं करने देते। इसी तरह जीवन में जब भी कुछ बुरा होता है तो हम हर पल यही सोचते हैं कि बस जल्दी से जल्दी ये पल भी निकल जाए। शायद दिमाग को भी पता होता है कि ये पल निकल जायेगा मगर फिर भी हम टेंशन लेते ही लेते हैं। और तब क्या हो जब आप entertainment इंडस्ट्री से जुड़े हुए हों। श्वेता आज बात करेंगी घनश्याम नायक उर्फ़ नट्टू के बारे में। कितने दर्द में थे नट्टू और फिर भी करते रहे अपना काम, हंसाते रहे आपको और मुझे। आज वो दे रहीं है नट्टू को श्रद्धांजलि और बताएंगी कि कैसे नट्टू काका नहीं हैं किसी भी योद्धा से कम।
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