NL Charcha

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  • एपिसोड 25: शुजात बुख़ारी की हत्या, अरविंद केजरीवाल का धरना, अखिलेश यादव व अन्य
    राइजिंग कश्मीर के संपादक शुजात बुखारी की अज्ञात हमलावरों द्वारा गोली मारकर हत्या, अखिलेश यादव पर सरकारी बंगले को क्षतिग्रस्त करने का आरोप, दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार और गवर्नर के बीच तनातनी, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में स्नातक की छात्रा पर धार्मिक भावनाएं आहत करने का मुकदमा आदि इस हफ्ते न्यूज़लॉन्ड्री चर्चा के प्रमुख विषय रहें.इस सप्ताह चर्चा के पैनल में शामिल थे विस्फोट डॉट कॉम के संपादक संजय तिवारी, ओपिनियन लेखक आनंद वर्धन और न्यूज़लॉन्ड्री रिपोर्टर अमित भारद्वाज. अतुल चौरसिया, न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक ने चर्चा का संचालन किया.

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    1 hr 10 min
  • एपिसोड 24: प्रणब मुखर्जी, शिलॉन्ग हिंसा, भीमा कोरेगांव और अन्य
    प्रणब मुखर्जी का संघ के तृतीय वर्ष समारोह में संबोधन, कश्मीर में सीआरपीएफ की गाड़ी से कुचलकर एक युवक की मौत, शिलॉन्ग में दलित सिख और खासी आदिवासियों के बीच झड़प और हिंसा और इसी वर्ष हुए भीमा कोरेगांव हिंसा के संदर्भ में सामाजिक कार्यकर्ताओं का पुलिस द्वारा गिरफ्तारी रहे इस हफ्ते न्यूज़लॉन्ड्री चर्चा के मुख्य विषय.चर्चा की विशिष्ट अतिथि थी वरिष्ठ पत्रकार मनीषा भल्ला. साथ में पैनल में मौजूद थे न्यूज़लॉन्ड्री के रिपोर्टर अमित भारद्वाज और उपसंपादक रोहिण कुमार. न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक ने चर्चा का संचालन किया

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    1 hr
  • कोबरापोस्ट ऑपरेशन 136: टाइम्स, इंडिया टुडे समेत तमाम बड़े खिलाड़ी फंदे में
    शुक्रवार को इंवेस्टिगेटिव मीडिया संस्था कोबरापोस्ट ने ऑपरेशन 136 का दूसरा हिस्सा फेसबुक लाइव के जरिए जारी किया. कोबरापोस्ट के यूट्यूब चैनल पर इस स्टिंग ऑपरेशन से संबंधित कुल 50 वीडियो डाले गए हैं, जिनमें मीडिया जगत की कई जानी मानी हस्तियां मोल-तोल करते हुए रिकॉर्ड हुई हैं.इस स्टिंग के पहले भाग में हमने देखा था कि मीडिया जगत की बड़ी हस्तियां पैसे के बदले हिंदुत्व का एजेंडा अपने चैनल, अखबार के जरिए बढ़ाने को राजी थे. दूसरे हिस्से में भी वही बात सामने आई है.इनमें टाइम्स ऑफ इंडिया, इंडिया टुडे, हिंदुस्तान टाइम्स, ज़ी न्यूज़, नेटवर्क18, स्टार इंडिया, एबीपी न्यूज़, रेडियो वन, रेड एफएम, लोकमत, एबीएन आंध्रा ज्योति, टीवी5, दिनमलार, बिग एफएम, के न्यूज़, इंडिया वॉइस, द न्यू इंडियन एक्सप्रेस, एमवीटीवी और ओपेन मैगज़ीन शामिल है. सुनिए इसी विषय पर पत्रकारों की बातचीत.

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    30 min
  • एपिसोड 23: कोबरापोस्ट, राना अयूब को धमकी, प्रणब मुखर्जी का नागपुर गमन व अन्य
    कोबरापोस्ट का ऑपरेशन-136, पत्रकार रवीश कुमार और राना अयूब को दी जा रही जान से मारने की धमकी, टाइम्स नाउ द्वारा तरुण तेजपाल मामले के सीसीटीवी फुटेज जारी करना और प्रणब मुखर्जी का आरएसएस के मुख्यालय नागपुर में स्वयंसेवकों को संबोधित करने का फैसला इस बार की चर्चा के मुख्य विषय रहे.वरिष्ठ पत्रकार और इंडिया टीवी के पूर्व संपादक दिलीप मंडल और वरिष्ठ टेलीविज़न पत्रकार प्रशांत टंडन इस बार की चर्चा के विशेष मेहमान रहे. कार्यक्रम का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया.दिलीप मंडल ने एक दिलचस्प उदाहरण से कोबरापोस्ट के स्टिंग ऑपरेशन-136 को समझाया. उन्होंने कहा, “ऐसा मानिए कि रामलीला हो रही है. लोग भक्ति भाव से राम, सीता हनुमान आदि पात्रों को मंच पर देख रहे हैं. इस बीच अचानक से कोई दर्शक मंच के पीछे पांडाल में चला जाय. संभव है कि वहां लक्ष्मण बना पात्र सिगरेट पी रहा हो. हो सकता है कि राम वहां आयोजकों से अपने भुगतान के लिए लड़ रहा हो. कोबरापोस्ट ने जो दिखाया है, वह परदे के पीछे लंबे समय से होता आ रहा है. अब यह कैमरे के जरिए सामने आ गया है.”वो आगे कहते है, “विश्वसनीयता मीडिया में एक प्रोडक्ट है. तो अगर उस प्रोडक्ट की विश्वसनीयता घटती है तो मीडिया के लिए निश्चित रूप से संकट का काल है. यहां मीडिया लिटरेसी का भी मसला आता है. हमारा देश में मीडिया लिटरेसी बहुत कम है. इसके बनिस्बत पश्चिम में लोगों में मीडिया लिटरेसी एक हद तक आ चुकी है. लोगों को पता है कि सीएनएन डेमोक्रेट्स के साथ है और फॉक्स पब्लिकन के साथ जाएगा. दोनों ही इस बात को छुपाते नहीं हैं. लोग भी दोनों की ख़बरों को उसी संदर्भ में लेते हैं. इसके बनिस्बत आप यहां 20 पन्ने कुछ भी लिखकर छाप दीजिए. आम लोगों में इस बात की समझ नहीं है कि यह क्यों या कहां से आ रहा है.”प्रशांत टंडन ने इस बहस के एक अन्य पहलू की ओर ध्यान खींचा. उन्होंने कहा, “पुष्प शर्मा आचार्य अटल के रूप में जिन तीन चरणों की बात कर रहे थे, यहां मीडिया में वह प्रोजेक्ट पहले से ही चल रहा है, बल्कि वह अपने दूसरे और तीसरे चरण में है. यहां महत्वपूर्ण सवाल है कि क्या हिंदुत्व के अलावा कोई और स्क्रिप्ट भी चल सकती थी?”प्रशांत आगे कहते हैं, “मान लीजिए पुष्प शर्मा ये कहते कि वे पहले चरण में देश के महापुरुषों में स्थापित करने के लिए वे महात्मा फूले और आंबेडकर के पक्ष में अभियान चलाना चाहते हैं. दूसरे चरण में हम आरक्षण के सवाल पर, उसकी जरूरत पर लोगों को जागरूक करेंगे, आरक्षण विरोधियों को उजागर करेंगे और फिर तीसरे चरण में मनुवाद के खिलाफ लोगों का ध्रुवीकरण करेंगे. क्या तब लोग 500 करोड़ या 1000 करोड़ के बदले यह स्क्रिप्ट खरीदते? ऐसा नहीं है कि एंकर और संपादक किसी कारपोरेट दबाव के चलते ऐसा कर रहे हैं. इसके पीछे अहम वजह मीडिया न्यूज़रूम की संरचना है. कुछ साल पहले मीडिया स्टडीज़ ग्रुप ने एक सर्वे जारी किया था. उसमें मीडिया के फैसला करने वाली जगहों पर 75 फीसदी से ज्यादा हिंदू, सवर्ण और पुरुष पाए गए.”इस स्टिंग ऑपरेशन का एक और पहलू सामने आया जब कुछ बड़े पत्रकारों ने स्टिंग ऑपरेशन को पत्रकारिता मानने से ही खारिज कर दिया. इस विषय पर अपनी बात रखते हुए अतुल चौरसिया ने कहा, “जिन पत्रकारों ने स्टिंग ऑपरेशन को पत्रकारिता नहीं माना है उन्होंने अपने संपादकत्व में दिलीप सिंह जुदेव का स्टिंग ऑपरेशन चलाया है. सिर्फ इतना ही नहीं वह स्टिंग ऑपरेशन उनके अपने पत्रकार ने नहीं किया था. टाइम्स ऑफ इंडिया की एक स्टोरी पर भरोसा करें तो जुदेव का स्टिंग कांग्रेस पार्टी का प्लांट था. ऐसे में स्टिंग ऑपरेशन को पत्रकारिता के एक औजार के रूप में खारिज करना दोहरेपन को उजागर करता है.”अतुल ने आगे जोड़ा, “ऐसे मौके आते हैं जब पत्रकारों के पास ख़बर को सामने लाने का कोई और विकल्प ही नहीं बचता. सिर्फ उन्हीं स्थितियों में स्टिंग ऑपरेशन को जायज माना जाना चाहिए.” पैनल के दोनों मेहमान इस राय से सहमत थे. कोई भी स्टिंग को पत्रकारिता के एक औजार के रूप में खारिज नहीं करता.बाकी विषयों पर विस्तार से सुनने के लिए पॉडकास्ट लिंक पर जाएं.

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    1 hr 12 min
  • एपिसोड 22: स्टरलाइट कांड, कैराना उपचुनाव, बंगलुरु में विपक्ष का जमावड़ा व अन्य
    उत्तरा प्रदेश के कैराना में होने वाला लोकसभा का उपचुनाव, एचडी कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण समारोह में लगा विपक्षी नेताओं का मजमा, तमिलनाडु के तूतीकोरिन इलाके में वेदांता के स्टरलाइट कॉपर प्लांट में मजदूरों पर की गई पुलिस की फायरिंग, म्यामांर में रोहिंग्या सैल्वेशन आर्मी द्वारा की गई हिंदुओं की हत्या पर आई एमनेस्टी इंटरनेशन की रिपोर्ट और सूचना प्रसारण मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर द्वारा शुरू किया गया फिटनेस संबंधी चैलेंज इस बार की चर्चा के मुख्य विषय रहे.चर्चा की विशिष्ट अतिथि रही राज्यसभा टीवी और एनडीटीवी की पूर्व एंकर और हिंद किसान चैनल की पत्रकार अमृता राय. साथ में न्यूज़लॉन्ड्री के मैनेजिंग एडिटर रमन किरपाल, और न्यूज़लॉन्ड्री संवाददाता अमित भारद्वाज फोन पर कैराना से कार्यक्रम में जुड़े. कार्यक्रम का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया.तमिलनाडु के तूतीकोरिन में स्थित वेदांता की स्टरलाइट तांबा फैक्ट्री का विरोध कर रहे ग्रामीणों पर की गई पुलिस फायरिंग में 11 लोगों की मौत पर विस्तार से बात हुई. शुरुआत में अतुल चौरसिया ने कहा, “यह विवाद स्टरलाइट के विस्तार की कार्रवाई से बढ़ा. यहां पहले से ही सालाना चार लाख टन तांबे का शोधन हो रहा है जिसे बढ़ाकर सालाना आठ लाख टन करने की हरी झंडी सरकार ने दे दी थी. इस पर वहां के ग्रामीणों ने विरोध करना शुरू किया. ग्रामीणों का आरोप है कि तूतीकोरिन इलाके में की पूरी आबोहवा जहरीली हो चुकी है. सांस लेना भी दूभर है. दूसरी तरफ अंडरग्राउंड जल के सभी स्रोत भी बुरी तरह से प्रदूषित हो चुके हैं.”इस पर अमृता राय ने विस्तार से अपनी बात रखते हुए कहा, “सबसे पहले 1992-93 में यह कारखाना महाराष्ट्र के रत्नागिरी में लगाने की कोशिश हुई थी जिसका बड़े पैमाने पर विरोध हुआ. आखिरकार 1993 में मजबूरन इसे तमिलनाडु में लगाया गया. जिस इलाके में यह कारखाना लगा हुआ है वहां हवा से लेकर पानी तक सब कुछ प्रदूषित हो गया है. हमने पाया कि 1994 में ही इस इलाके से सटे खेतों में काम करने वाली महिलाएं बीमार होकर गिर गई थीं. न्यूज़मिनट की एक ख़बर में मैंने पढ़ा कि शुरुआत में इस फैक्ट्री को सालाना 70,000 हजार टन तांबा शोधन करने की अनुमति थी. लेकिन शुरू से ही इसमें निर्धारित सीमा से ज्यादा तांबे का शोधन होता रहा. अब इस इलाके में लोगों के बीमार होने, जल प्रदूषण के 25 से ज्यादा वाकए हो चुक हैं. टीवी पर एक रिपोर्ट में देखा कि एक आदमी के फेफड़े पूरी तरह से सूख गए हैं, एक छोटी बच्ची थी जिसके सिर से बाल उड़ गए थे. ये तो कुछेक घटनाएं थी जो हम जानते हैं. इस इलाके में इस तरह के अनगिनत पीड़ित होंगे.”वो आगे कहती हैं, “शुरुआत से ही इस कारखाने का बुरा अअसर लोगों के ऊपर दिखने लगा था, इसके बावजूद यह चलता रहा. बीच में 2013 में ऐसी भी स्थिति आई जब फैक्ट्री में रिसाव हुआ और बड़े पैमाने पर लोग बीमार हो गए, तब इस फैक्ट्री को बंद करना पड़ा था. लेकिन बाद में कानूनी दांवपेंच में उलझा कर इसे फिर से शुरू कर दिया गया. यह भी अपने आप में चिंताजनक है कि लोग वहां पिछले 100 दिनों से विरोध कर रहे थे. यहां मीडिया के ऊपर भी सवाल खड़े होते हैं. क्यों यह मुद्दा पहले चर्चा में नहीं आया.”रमन किरपाल ने पुलिस की कार्रवाई और सिस्टम के कामकाज पर रोशनी डाली. उन्होंने कहा, “वेदांता कंपनी किस-किस को चंदा देती है. इसमें भाजपा भी है, कांग्रेस भी है. इस तरह से यह एक पूरा नेक्सस बन जाता है. यह एक संगठित सिस्टम है जो कभी रुकता नहीं. दूसरी बात पुलिस रूल में साफ-साफ लिखा है कि उसे बहुत दर्लभ मौकों पर ही गोली चलानी है. वो भी हमेशा कमर के नीचे. फिर भी पुलिस नहीं मानी. आप कश्मीर में पैलेट गन का इस्तेमाल करते हैं, यहां क्यों नहीं कर सकते.”अपना एक संस्मरण सुनाते हुए रमन ने कहा, “1994 के मुजफ्फरनगर चौराहा हत्याकांड में आरोपी आईएएस अधिकारी को सीबीआई जांच से बचाने के लिए खुद मुलायम सिंह यादव ने अंड़गा लगाया और उसके खिलाफ जांच का आदेश नहीं दिया. हमारे देश का सिस्टम ही ऐसा है कि यहां एक हद से ज्यादा कुछ होता नहीं है.”

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    1 hr 4 min
  • एपिसोड 21- कर्नाटक का उहापोह, वाराणसी पुल हादसा, असम का एनआरसी व अन्य
    कर्नाटक में चुनाव नतीजों के बाद जारी दांव-पेंच, सुनंदा पुष्कर की मौत में शशि थरूर का पुलिस चार्जशीट में नाम, बनारस में फ्लाईओवर ढहना, गुड़गांव में सार्वजनिक स्थल पर नमाज़ के खिलाफ हिंदुत्वादी समूहों का विरोध, असम का नेशनल रजिस्टर सिटीजन बिल व अन्य मुद्दे इस हफ्ते चर्चा के प्रमुख विषय रहे.चर्चा के विशिष्ट अतिथि रहे वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश, ओपिनियन राइटर आनंद वर्धन और न्यूज़लॉन्ड्री संवाददाता अमित भारद्वाज. कार्यक्रम का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया.

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    1 hr 27 min
  • एपिसोड 20: कर्नाटक चुनाव, जिन्ना विवाद, प्रेस फ्रीडम व अन्य
    कर्नाटक चुनाव, प्रेस फ्रीडम में खिसकता भारत, बिहार के जहानाबाद में लड़की से छेड़छाड़ की घटना, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में जिन्ना की तस्वीर पर विवाद, न्यूज़ 18 के एंकर सुमित अवस्थी का पैनलिस्ट पर हाथ चलाना रहे इस हफ्ते न्यूज़लॉन्ड्री चर्चा के मुख्य विषय.चर्चा के विशिष्ट थे इंडिया न्यूज़ के डिप्टी एडिटर सुशांत सिन्हा और न्यूज़लॉन्ड्री के ओपिनियन राइटर आनंद वर्धन. कर्नाटक से फोन लाइन पर जुड़े न्यूज़लॉन्ड्री के संवाददाता अमित भारद्वाज. चर्चा का संचालन किया न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने.

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    1 hr 11 min
  • एपिसोड 19: आसाराम, सरोज खान का बयान, महाभियोग व अन्य
    आसाराम को आजीवन कारावास, सरोज खान का कास्टिंग काउच को लेकर विवादित बयान, कर्नाटक चुनाव में रेड्डी बंधुओं को भाजपा का उम्मीदवार बनाया जाना, मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग के निहितार्थ और संजय दत्त के जीवन पर बन रही फिल्म का ट्रेलर इस हफ्ते न्यूज़लॉन्ड्री चर्चा के मुख्य विषय रहे.चर्चा में इस बार दो मेहमान शामिल हुए. वरिष्ठ फिल्म समीक्षक और पत्रकार अजय ब्रह्मात्मज और भारतीय जन संचार संस्थान के एसोसिएट प्रोफेसर आनंद प्रधान. इसके अलावा न्यूज़लॉन्ड्री के संवाददाता अमित भारद्वाज और कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया भी चर्चा का हिस्सा रहे.

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    1 hr 23 min
  • एपिसोड 18: मुख्य न्यायाधीश पर महाभियोग प्रस्ताव, असीमानंद की रिहाई व अन्य
    सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ सात विपक्षी दलों द्वारा महाभियोग लाने का प्रस्ताव, जज लोया की संदिग्ध मौत की जांच की मांग वाली याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट द्वारा खारिज किया जाना, प्रधानमंत्री का विदेश दौरा और वेस्टमिंस्टर सेंट्रल हॉल में उनका साक्षात्कार और मक्का मस्जिद केस के आरोपी असीमानंद समेत सभी आरोपियों को कोर्ट द्वारा बरी किया जाना इस हफ्ते न्यूज़लॉन्ड्री चर्चा के प्रमुख विषय रहे.चर्चा में शामिल रहे ओपिनियन राइटर आनंद वर्धन, कैच न्यूज़ के असिस्टेंट एडिटर चारू कार्तिकेय और संवाददाता अमित भारद्वाज. चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया.

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    1 hr 31 min
  • एपिसोड 17: बलात्कार पर सरकार की चुप्पी, उपवास 'उत्सव', जुकरबर्ग व अन्य
    जम्मू-कश्मीर कठुआ और यूपी के उन्नाव में बलात्कार की घटना और आरोपियों को सत्ता का संरक्षण, पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनावों के स्थगित किए जाने की मांग को लेकर हिंसा, राहुल गांधी और प्रधानमंत्री का उपवास, डेटा लीक के मामले में फेसबुक मखिया मार्क जुकरबर्ग की कांग्रेस में पेशी, कुमार विश्वास को आम आदमी पार्टी के राजस्थान प्रभारी से हटाया जाना व अन्य मुद्दे इस हफ्ते न्यूज़लॉन्ड्री चर्चा के प्रमुख विषय रहे.चर्चा में शामिल रहे वरिष्ठ पत्रकार जितेन्द्र कुमार, न्यूज़ नेशन के अभिषेक पराशर और न्यूज़लॉन्ड्री संवाददाता अमित भारद्वाज. चर्चा का संचालन किया न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने.

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    1 hr 16 min

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