NL Charcha

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  • एपिसोड 43: शबरीमाला, गुजरात से पलायन, स्वामी सानंद की मृत्यु और अन्य
    गुजरात में उत्तर भारतीयों पर हुए हमले के बाद उनका पलायन, शबरीमाला मंदिर मुद्दे पर हो रही राजनीति और राजनीतिक पार्टियों का महिलाओं के मुद्दे पर दोहरा रवैया, इलाहाबाद को मिले नए नाम प्रयागराज और गंगा की सफाई के लिए अनशन पर बैठे स्वामी सानंद की मृत्यु इस हफ्ते की एनएल चर्चा का मुख्य विषय रहे.इस बार चर्चा में स्तंभ लेखक और ओपिनियन लेखक आनंद वर्धन, न्यूज़लॉन्ड्री के असिस्टेंट एडिटर राहुल कोटियाल, न्यूज़लॉन्ड्री के विशेष संवाददाता अमित भारद्वाज शामिल रहे. चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया.चर्चा की शुरुआत करते हुए अतुल चौरसिया ने शबरीमाला मंदिर में हर उम्र की महिला के प्रवेश संबंधी सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर राजनीतिक पार्टियों द्वारा की जा रही सियासत का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा, “महिलाओं के जो मुद्दे हैं, राजनीतिक पार्टियां उन्हें भी धर्म के चश्मे से ही देख रही हैं. दुर्भाग्य यह है कि इसमें कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी दोनों एक ही मंच पर आती दिख रही हैं.”अतुल आगे कहते हैं, “कुछ ही महीने पहले हमने देखा कि तीन तलाक के मुद्दे पर मौजूदा सरकार ने महिला सशक्तिकरण के बड़े बड़े दावे किए थे और मुस्लिम महिलाओं की बेहतरी की बातें कही थी. आज शबरीमाला के मुद्दे पर वही भाजपा सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के खिलाफ वहां आंदोलन चला रही है.”चर्चा को विस्तार देते हुए अमित भारद्वाज ने सबरीमाला के प्रसंग में बात करते हुए इसका ऐतिहासिक विवरण दिया और इसे वर्तमान संदर्भ से जोड़ा. आनंद वर्धन ने शबरीमाला प्रकरण को एक संस्थागत विषय मानते हुए इसे पूरे हिंदू समाज की समस्या के तौर पर देखने की प्रवृत्ति को गलत बताया. इस तरह की दिक्कतें किसी एक संस्था से जुड़ी हो सकती हैं. और इसके नकारात्मक पक्ष भी हो सकते हैं लेकिन इसे पूरे हिंदू धर्म से जोड़ा जा रहा है. ऐसे तमाम मंदिर हैं जहां महिलाओं के प्रवेश पर कोई प्रतिबंध नहीं हैं.गुजरात और उत्तर भारतीयों पर हुई हिंसा के मामले में हो रही राजनीति पर राहुल कोटियाल ने कहा कि इस तरह का नस्ल भेद आपको लगभग हर जगह देखने को मिलेगा, जहां किसी दूसरे क्षेत्र के लोग आकर रहते हैं. आगे उन्होंने कहा कि इस राजनीति का कोई चेहरा नहीं है.अमित भारद्वाज ने गुजरात के पलायन के पीछे चल रही राजनीति की ओर इशारा किया. उनके मुताबिक इस घटना के समय और स्वरूप को देखकर कहा जा सकता है कि इसके पीछे राजनीतिक ताकतें काम कर रही हैं. साथ ही अमित ने इस मसले को संक्षिप्त में समझाते हुए इसे गुजरात के सामाजिक और आर्थिक मामलों से भी जोड़ा.उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा इलाहाबाद का नाम बदल कर प्रयागराज किए जाने के कई पहलुओं पर चर्चा हुई. आनंद वर्धन ने इस पर बात रखते हुए कहा कि भारत में नाम बदलने की राजनीतिक संस्कृति हमेशा रही है, उत्तर प्रदेश में भी रही है. आगे उन्होने कहा कि नाम बदलना संघ के उन सांस्कृतिक प्रोजेक्ट्स का हिस्सा है जो सबसे कम प्रतिरोध उत्पन्न करते हैं. अतुल चौरसिया ने इलाहाबाद के नाम पर चर्चा करते हुए उसके इतिहास पर रोशनी डाली. आनंद ने आखिर में लालू प्रसाद द्वारा पटना का नाम बदलकर अज़ीमाबाद करने की योजना का किस्सा सुनाया.स्वामी सानंद की 112 दिन के अनशन के बाद हुई मृत्यु पर बात करते हुए राहुल कोटियाल ने उनके और उनके पहले स्वामी निगमानंद की मृत्यु की भी चर्चा की. राहुल ने यह भी बताया कि गंगा को लेकर संत समाज की मांगें क्या हैं? और गंगा को साफ और अविरल बनाए रखने के लिए जो कदम उठाए जाते रहे हैं, वह कितने अपर्याप्त हैं.

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    56 min
  • एपिसोड 42: #MeToo, हिन्दी मीडिया में महिलाएं, यौन उत्पीड़न और अन्य
    इस बार की एनएल चर्चा बाकी एपीसोड से अलग रही. पूरी चर्चा सिर्फ कामकाजी महिलाओं का दफ्तरों, या कार्यस्थलों में होने वाला शोषण पर केंद्रित रही. #MeToo आंदोलन में उठी आवाजें, भारतीय मीडिया में इस अभियान से मची उथल-पुथल, एमजे अकबर, आलोक नाथ जैसे बड़े नामों का नाम आना इस हफ्ते की प्रमुख चर्चा रही. लिहाजा इसके अलग-अलग पहलुओं तथा महिलाओं से जुड़े विषयों पर आधारित रही इस बार की न्यूज़लॉन्ड्री चर्चा.इस बार की चर्चा में मीडिया में काम करने वाली कुछ महिलाओं ने हिस्सा लिया. लेखिका एवं वरिष्ठ पत्रकार गीताश्री, बीबीसी हिन्दी की पत्रकार सर्वप्रिया सांगवान तथा न्यूज़लॉन्ड्री की सबएडिटर चेरी अग्रवाल उपस्थित रही. इस चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के सहायक संपादक राहुल कोटियाल ने किया.चर्चा की शुरुआत करते हुए राहुल ने #MeToo आंदोलन के इतिहास पर रोशनी डाली और बताया कि इसे भारत का #MeToo आंदोलन कहा जा रहा है. राहुल ने कहा, “हालांकि यह अभियान अभी यह बहुत सीमित तबके के बीच है और उन्हीं की आवाज़ें हम तक पहुंच रही हैं.”इसके जवाब में गीताश्री ने कहा कि स्त्रियों के लिए दुनिया तो सिर्फ 20 साल पहले ही खुली है कि वह अपना करियर बना सकी, एजुकेशन में आ सकी. उन्होंने आगे जोड़ा, “हम (महिलाएं) अपनी दुनिया को उस समय एक्सप्लोर नहीं कर पाये थे, अभी जिस वक़्त में हम लोग जी रहे हैं, हमने अपनी दुनिया को एक्सप्लोर कर लिया है और अब चुप रहना मुश्किल है.”सर्वप्रिया सांगवान ने इसी विषय को आगे बढ़ाते हुए मीडिया के दफ्तरों में महिलाओं की मौजूदगी पर अपनी राय रखी. उन्होंने कहा, “टीवी मीडिया के अंदर बहुत सारी लड़कियां काम कर रही हैं, एंकर्स भी हैं. लेकिन रिपोर्टर्स तो बहुत ही कम हैं. जहां पर एक्चुअल में पत्रकारिता का काम करना है, वहां नहीं हैं. वह काम पुरुषों के लिए ही ज्यादा मुफीद माना जाता है. लेकिन एंकर के तौर पर बहुत सारी लड़कियां हैं क्योंकि वहां पर आपको सुंदर चेहरे चाहिए होते है. दिखाना होता है ताकि लोग एक बार रुक जाएं. आखिर कौन लोग हैं जो चेहरा देखकर रुक जाते हैं.”चेरी अग्रवाल ने इसे लड़कियों की सामाजिक पृष्ठभूमि और व्यावहारिकता से जोड़ा. उन्होंने कहा, “अगर मैं या मेरे जैसी बहुत सारी लड़कियां अपने घर पर बताएं कि उनका सेक्सुअल हरासमेंट हुआ है तो पहली बात वो बोलेंगे की बेटा आप वापस आ जाओ. और यह एक बड़ी भूमिका निभाता है.” #MeToo मामले में मीडिया की स्थिति पर बात करते हुए चेरी ने कहा कि ऐसा नहीं है कि आवाज केवल एक सीमित तबके की ही आ रही है, बल्कि ये मीडिया है जो अपनी भूमिका एक सीमित दायरे तक सीमित रखे हुए है.राहुल कोटियाल ने वर्कप्लेस पर सेक्सुअल हरासमेंट को कम करने के ऊपर कहा कि अगर हम ये कोशिश करें कि सेक्सुअल हरासमेंट को लेकर जो अप्रोच है, सोच है, उसका कोई एक उपाय हो सकता है तो यह संभव नहीं है. जिस तरह से हम नए कर्मचारी को बता सकते हैं कि क्या-क्या करें उसी तरह की एक ट्रेनिंग पुरुषों के लिए हो सकती है, इसको अनलर्न करने के लिए. और यही छोटे-छोटे फैक्टर हैं, जो लॉन्ग टर्म में चीजों को एक दिशा में ले जाते हैं. जैसे यह अभियान चल रहा है तो ये भी कहीं न कहीं उस अनलर्निंग की दिशा में अपनी भूमिका अदा कर रहा है.पैनल की विस्तृत राय जानने के लिए सुनें पूरी चर्चा.

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    1 hr 1 min
  • एपिसोड 41: किसानों का दिल्ली मार्च, शबरीमाला पर फैसला और अन्य
    पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड से आए किसानों पर हुआ लाठीचार्ज, शबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर केरल में महिलाओं का व्यापक विरोध और लखनऊ में विवेक तिवारी की पुलिसकर्मी द्वारा हत्या जैसे विषयों पर आधारित रही इस हफ्ते की न्यूज़लॉन्ड्री चर्चा.स्वतंत्र पत्रकार और दिल्ली यूनिवर्सिटी में अस्थायी शिक्षिका स्वाति अर्जुन इस हफ्ते चर्चा की मेहमान पत्रकार रहीं. न्यूज़लॉन्ड्री के असिस्टेंट एडिटर राहुल कोटियाल, प्रतीक गोयल पैनल में शामिल रहे. इसके अलावा अमित भारद्वाज फोन पर चर्चा में जुड़े. चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया.शबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश की आयुसीमा पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला और उस पर केरल में मचे संग्राम पर विस्तृत चर्चा हुई. चर्चा की शुरुआत करते हुए अतुल चौरसिया ने कहा, “या तो आप आस्तिक हो सकते हैं या फिर नास्तिक. आस्था में तर्क के लिए कोई स्थान नहीं हो सकता है.”अतुल ने आगे जोड़ा, “आप यज्ञ में आहुति देते हैं तो उसके लिए तीन उंगलियों से आहुति देने का प्रावधान है. तर्क यह कहता है कि पूरे हाथ से उठाकर आहुति आग में डाल दीजिए. सिर्फ तीन उंगलियों से क्यों? बाकी दो उंगलियों से भेदभाव क्यों? लेकिन आस्था में यह तर्क काम नहीं करता. इस लिहाज से शबरीमाला मामले में असहमति का आदेश देने वाली जज इंदु मल्होत्रा काफी हद तक सही हैं.”राहुल कोटियाल ने इससे असहमति जताते हुए कहा, “धर्म में सुधार का विचार भी समय के साथ-साथ चलता रहता है. हमारे यहां समय-समय पर इसके तमाम उदाहरण हैं. सती प्रथा एक समय में समाज में पूरी तरह से स्वीकार्य थी. लेकिन राजा राममोहन राय ने अंग्रेजों के साथ मिलकर इसका प्रतिरोध किया और अंतत: यह कुप्रथा समाज से समाप्त हो गई.”राहुल आगे जोड़ते हैं, “इस तरह के कानून कम से कम एक मौका देते हैं जहां किसी भी तरह की आस्था के शिकार लोग कम से कम अपने लिए न्याय की अपेक्षा कर सकते हैं. यही स्थिति तीन तलाक़ के ऊपर आए फैसले में भी हमने देखा था.”स्वाति ने इसका एक अन्य पक्ष सामने रखा. उन्होंने कहा, “समाज की संरचना में महिलाओं की स्थिति ऐसी कर दी गई है कि वे कोई स्वतंत्र निर्णय ले पाने की स्थिति में ही नहीं होती है. यहां एक महिला के वोट देना का निर्णय भी उसके परिवार के लोग ही तय करते हैं. जो महिलाएं शबरीमाला मंदिर के फैसले के खिलाफ आज सड़कों पर उतर रही हैं उनमें से अधिकतर अपने परिवारों के दबाव में ऐसा कर रही होंगी.”प्रतीक ने इसमें केरल और तमिलनाडु के इलाके में पारिवारिक संस्था के ऊपर अपनी बात रखते हुए बताया कि- “केरल और इस इलाके में समाज एक हद तक स्त्रीवादी है. वहां बच्चियों के प्यूबर्टी एज का जश्न मनाया जाता है.”बाकी विषयों पर पैनल की विस्तृत राय जानने के लिए सुनें पूरी चर्चा.

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    50 min
  • एपिसोड 40: आधार, एडल्टरी, अयोध्या, अमिताभ और अन्य
    इससे पहले की चर्चा में इस हफ्ते क्या खास रहा, न्यूज़लॉन्ड्री के पाठकों को हमें यह सूचित करते हुए खुशी हो रही है कि आगामी 2 अक्टूबर को न्यूज़लॉन्ड्री हिंदी अपनी पहली वर्षगांठ मना रहा है. इस अवसर पर हमने एक विशेष परिचर्चा का आयोजन किया है, जिसका शीर्षक है- “गांधी का राष्ट्रवाद बनाम संघ का राष्ट्रवाद: कितने दूर, कितने पास.” कार्यक्रम नई दिल्ली के लोधी रोड स्थित इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर में शाम 6 से 8 बजे तक होगा. ध्यान रहे, इस परिचर्चा में भाग लेने के लिए आपको न्यूज़लॉन्ड्री का सब्सक्रिप्शन लेना होगा. जो पहले से सब्सक्राइबर हैं, वह यहां रजिस्टर कर सकते हैं.राफेल डील को लेकर भाजपा औककांग्रेस के बीच जारी कशमकश, आधार पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय, एडल्टरी कानून धारा 497 को निरस्त किया जाना, बॉलीवुड अभिनेत्री तनुश्री दत्ता के यौन उत्पीड़न के आरोपों पर अमिताभ बच्चन का यह कहना, "वह न तो नाना पाटेकर, न ही तनुश्री हैं, ऐसे में वह कुछ नहीं कह सकते", अयोध्या राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद मामले से जुड़े "मस्जिद इस्लाम का अभिन्न अंग है या नहीं" की सुनवाई के दौरान कोर्ट का कहना कि मामले को बड़े बेंच में नहीं भेजा जाएगा, इस हफ्ते चर्चा के प्रमुख विषय रहे हैं.चर्चा के मेहमान पत्रकार रहे एस मेघनाद. साथ ही पैनल में थे न्यूज़लॉन्ड्री संवाददाता राहुल कोटियाल और अमित भारद्वाज. न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने चर्चा का संचालन किया.

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    59 min
  • एपिसोड 39: मायावती का गठबंधन, मोहन भागवत का बयान, देहरादून के स्कूल में गैंगरेप व अन्य
    छत्तीसगढ़ में मायावती की बसपा और अजित जोगी की पार्टी जनता कांग्रेस से गठबंधन का फैसला, डूसू अध्यक्ष अंकित बसोया की डिग्री पर बवाल, राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ का दिल्ली में तीन दिवसीय आयोजन, देहरादून के स्कूल में गैंगरेप आदि इस हफ्ते न्यूज़लॉन्ड्री चर्चा के प्रमुख विषय रहे.गांव कनेक्शन के कंसल्टिंग एडिटर हृदयेश जोशी चर्चा में मेहमान पत्रकार के रूप में शामिल हुए. हृदयेश के साथ पैनल में थे न्यूज़लॉन्ड्री संवाददाता अमित भारद्वाज और राहुल कोटियाल. न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने चर्चा का संचालन किया.अगले तीन महीने में छत्तीसगढ़, राजस्थान और मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं. छत्तीसगढ़ में मायावती की बसपा ने अजित जोगी की पार्टी जनता कांग्रेस के साथ गठबंधन किया है.

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    47 min
  • एपिसोड 38: सफाई कर्मचारियों की मौत, सेरेना विलियम्स, चंद्रशेखर रावण व अन्य
    केरल की नन के साथ जलंधर के बिशप द्वारा बलात्कार का आरोप, सेरेना विलियम्स का रेफरी पर नस्लवाद का आरोप, भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर रावण की रिहाई और दिल्ली के मोती नगर क्षेत्र में सफाईकर्मियों की सीवर में मौत- इन विषयों पर आधारित रही इस हफ्ते की न्यूज़लॉन्ड्री चर्चा.वरिष्ठ पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता भाषा सिंह, स्तंभ लेखक आनंद वर्धन और न्यूज़लॉन्ड्री के असिस्टेंट एडिटर राहुल कोटियाल पैनल में शामिल रहे. चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया.

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    53 min
  • एपिसोड 37: 377, समलैंगिकता, कन्हैया कुमार और नोटबंदी
    सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला जिसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 377 को अपराध के दायरे से बाहर कर दिया गया, बीते जनवरी में जिग्नेश मेवानी की रैली के दौरान रिपब्लिक के अर्नब गोस्वामी द्वारा तथ्यहीन रिपोर्टिंग और अपमानजनक टिप्पणियों पर एनबीएसए की फटकार, संभावना कि कन्हैया कुमार बेगूसराय सीट से लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं और रिजर्व बैंक का नोटबंदी से जुड़ा ताजा आंकड़ा जहां आरबीआई ने कहा कि 99 फीसदी से ज्यादा पैसा बैंकों में वापस आ गया. इन विषयों पर आधारित रही इस हफ्ते की न्यूज़लॉन्ड्री चर्चा.सुप्रीम कोर्ट में धारा 377 को निरस्त करने की याचिका डालने वाले याचिकाकर्ता यशवेन्द्र सिंह इस बार चर्चा में बतौर मेहमान शामिल हुए. साथ ही पैनल में जुड़े न्यूज़लॉन्ड्री के विशेष संवाददाता अमित भारद्वाज और स्तंभ लेखक आनंद वर्धन. चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया

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    1 hr
  • एपिसोड 36: राहुल गांधी का बयान, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी, आतिशी 'मार्लेना' व अन्य
    राहुल गांधी का 1984 दंगों के संबंध में बयान (जिसमें उन्होंने कहा कि 1984 दंगों में पार्टी के स्तर पर कांग्रेस की संलिप्तता नहीं थी), भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी का मालदीव चुनावों के संबंध जारी ट्वीट, (मालदीव चुनावों में अगर किसी प्रकार की धांधली होती है, तो भारत सरकार को मालदीव पर हमला कर देना चाहिए), देश भर में मानवाधिकार व सामाजिक कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारियां, आप नेत्री आतिशी मार्लेना के नाम में बदलाव आदि रहे इस हफ्ते की न्यूज़लॉन्ड्री चर्चा के मुख्य विषय. स्वतंत्र पत्रकार नेहा दीक्षित इस हफ्ते चर्चा की अतिथि पत्रकार थीं. पैनल में न्यूज़लॉन्ड्री संवाददाता अमित भारद्वाज और राहुल कोटियाल भी मौजूद थे. चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया.

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    58 min
  • एपिसोड 35: कुलदीप नैयर, केरल की बाढ़ और आप की उठापटक
    केरल में आई बाढ़ की आपदा से उबरने के लिए यूएई की ओर से कथित आर्थिक मदद की पेशकश, नवजोत सिंह सिद्धू का पाकिस्तान सेना प्रमुख जनरल बाजवा से गले मिलना, आम आदमी पार्टी के भीतर खींचतान, वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर का निधन और राहुल गांधी द्वारा विदेशी जमीन पर दिया गया भाषण इस हफ्ते चर्चा के प्रमुख विषय थे.इस बार चर्चा के विशिष्ट अतिथि रहे फिल्म समीक्षक मिहिर पांड्या. साथ ही पैनल में मौजूद रहे न्यूज़लॉन्ड्री संवाददाता अमित भारद्वाज और राहुल कोटियाल. चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया.15 अगस्त से 24 अगस्त के बीच आम आदमी पार्टी से उसके दो वरिष्ठ सदस्यों आशुतोष और आशीष खेतान ने इस्तीफा दे दिया. दोनों पेशे से पत्रकार थे और आम आदमी पार्टी के गठन के बाद राजनीति में आए थे.आप में शुरू हुई इस नई उठापटक के संबंध में अमित भारद्वाज ने कहा, "पिछले छह महीनों में आप के तीन बड़े नेताओं (कुमार विश्वास, आशुतोष और आशीष खेतान) ने पार्टी से किनारा कर लिया है. इसके केन्द्र में तीन राज्यसभा सीटें हैं. पार्टी ने संजय सिंह सहित दो गुप्ताओं को राज्यसभा भेजा. वहीं से यह सारा मामला शुरू हुआ है.""हमने देखा है नेताओं का आना-जाना तब होता है जब पार्टियां सत्ता से बाहर होती हैं. यहां आप सत्ता में है फिर भी उसके नेता पार्टी से किनारा कर रहे हैं," अतुल ने कहा.साथ ही अतुल ने यह भी कहा, “योगेंद्र यादव या प्रशांत भूषण के अलगाव की तुलना में आशुतोष और आशीष का जाना एकदम अलग है. इन दोनों ने बेहद शांति से व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए, नेतृत्व पर कोई सवाल खड़ा किए बिना पार्टी से किनारा किया है, इस लिहाज से यह किसी पद या महत्वाकांक्षा से इतर पार्टी से पैदा हो रहे मोहभंग का मामला दिखता है. योगेन्द्र यादव, प्रशांत भूषण और आनंद कुमार के इस्तीफे के बाद जिस तरह से नाकारात्मक रिपोर्टिंग हुई थी, वैसा इस बार देखने को नहीं मिल रहा है.”राहुल कोटियाल ने बताया, "अब तक आप के अंदर हुए इस्तीफों को तीन स्तरों पर देखा जाना चाहिए. पहला, योगेन्द्र यादव, आनंद कुमार और प्रशांत भूषण का इस्तीफा जो कि काफी हद तक सैद्धांतिक कारणों से जुड़ा था. दूसरा, कुमार विश्वास का पार्टी से किनारा जो कि स्पष्ट रूप से राज्यसभा की सीट न मिलने के चलते पैदा हुई कुंठा का नतीजा था. तीसरा, आशुतोष और आशीष खेतान का इस्तीफा है जिस पर फिलहाल पार्टी का रुख अस्पष्ट है. बहुत संभव है कि ये किसी तरह की निगोशियेशन की कोशिश हो."मिहिर पांड्या ने अतुल की बात से सहमति जताते हुए अपनी बात शुरू की. उनके मुताबिक, "आम आदमी पार्टी चुनावी राजनीति की तयशुदा ढर्रे में बदल गई है. दरअसल, एक-एक करके वे सारे लोग जो विनिंग कैंडिडेट नहीं है या उन्हें समझ आ गया है कि वे उस ढांचे में फिट नहीं बैठते जिसमें चुनाव जीता जाता है, ऐसे में उन्हें समझ आ रहा है कि पार्टी को उनकी जरूरत नहीं है."मिहिर ने बताया कि पिछले कुछ समय में पार्टी में जिस तरह के सैद्धांतिक बदलाव हुए हैं वह भी चिंता का विषय है. ऐसा लगता है अरविंद केजरीवाल को समझ आ गया है कि भारतीय राजनीति में उन उसूलों पर राजनीति नहीं कर सकते, जिसकी कल्पना उन्होंने की थी.साथ ही चर्चा में एक सवाल आम आदमी पार्टी के नेतृत्व के ऊपर भी उठा. अतुल ने पैनल से केजरीवाल और सिसोदिया के नेतृत्व के संबंध में पैनल की राय जानना चाहा. अमित ने बताया कि न सिर्फ दिल्ली में बल्कि अन्य राज्यों में भी नेतृत्व का संकट गहराता जा रहा है. उन्होंने पंजाब का उदाहरण दिया जहां से आप को अब तक दिल्ली के बाद सबसे बड़ी सफलता मिली है. वहां पार्टी में खींचतान चल रही है. निश्चित रूप से आप नेतृत्व में दिल्ली दरबार वाली कार्यसंस्कृति के संकेत मिल रहे हैं जिससे पार्टी के भीतर कसमसाहट है.वहीं पार्टी जिन्हें चुनाव लड़ने का अवसर दे रही है, उनके पास संसाधनों की घोर कमी है. अमित के मुताबिक "आशुतोष से पार्टी ने चुनाव लड़ने की पेशकश की थी लेकिन उन्होंने मना कर दिया था. खेतान भी चुनाव नहीं लड़ना चाहते थे. संसाधनों के आभाव में भाजपा जैसी पार्टी के खिलाफ चुनाव लड़ना बहुत मुश्किल है."बाकी विषयों के लिए पूरी बातचीत सुनें.

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    59 min
  • एपिसोड 34: अटल बिहारी वाजपेयी, केरल की बाढ़, सुकमा एनकाउंटर व अन्य
    पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का निधन, केरल में भीषण बाढ़, सुकमा इनकाउंटर, जेएनयू के छात्र उमर खालिद पर हुआ जानलेवा हमला व अन्य मुद्दे इस हफ्ते चर्चा के मुख्य विषय रहे.माखनलाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी के शिक्षक राकेश योगी चर्चा के मेहमान थे. साथ ही पैनल में ओपिनियन लेखक आनंद वर्धन और न्यूज़लॉन्ड्री संवाददाता राहुल कोटियाल और अमित भारद्वाज ने भी शिरकत की. चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया.

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    1 hr 20 min

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