Pratidin Ek Kavita

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By Nayi Dhara RadioArtsBooksFiction
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Pratidin Ek Kavita episodes

  • Lehron Ka Geet | Sumitranandan Pant

    लहरों का गीत । सुमित्रानंदन पंत


    अपने ही सुख से चिर चंचल

    हम खिल खिल पडती हैं प्रतिपल,

    जीवन के फेनिल मोती को

    ले ले चल करतल में टलमल!


    छू छू मृदु मलयानिल रह रह

    करता प्राणों को पुलकाकुल;

    जीवन की लतिका में लहलह

    विकसा इच्छा के नव नव दल!


    सुन मधुर मरुत मुरली की ध्वनी

    गृह-पुलिन नांध, सुख से विह्वल,

    हम हुलस नृत्य करतीं हिल हिल

    खस खस पडता उर से अंचल!


    चिर जन्म-मरण को हँस हँस कर

    हम आलिंगन करती पल पल,

    फिर फिर असीम से उठ उठ कर

    फिर फिर उसमें हो हो ओझल!

    3 min
  • Tabla | Vivek Nirala

    तबला ।  विवेक निराला

     

    किसी की खाल है

    जो खींच कर मढ़ दी गई है

    मढ़ी हुई है मृतक

    की जीवन्त भाषा।


    मृतक के परिजनों

    का विलाप कस गया है

    इस खाल के साथ।


    वादक की फूँक से नहीं

    खाल के मालिक की

    आख़िरी साँस से

    बज रही है वह बाँसुरी

    जो सँगत पर है।


    धा-धा-धिन-धा

    और तिरकिट

    के पीछे

    एक विषादी स्वर है।


    3 min
  • Prem Samandar | Pallavi Vinod

    प्रेम समंदर।  पल्लवी विनोद


    प्रेम समंदर-सा ही है धरती पर

    इतना कि सब डूब जाए

    इतना कि प्यास ही ना बुझे

    इतना कि डूबकर भी उतराता रहे

    निकल बाहर फिर इसी में समाता रहे

    प्रेम को पाना हो तो मछली बन जाना

    सीपी बन जाना,

    चाहें बन जाना कोई डूबा जहाज़

    अगर मनुष्य बनोगे

    तो समंदर आश्चर्य देगा

    वैविध्य देगा

    गहराई देगा

    टापू देगा

    बस ख़ुद को नहीं दे पाएगा।

    2 min
  • Bilbilaata Surya | Wazda Khan

    बिलबिलाता सूर्य।  वाज़दा खान 


    डर और दबाव के 

    घटाटोप अनधकार में

    बिलबिलाता सूर्य,

    कितना भीतर से

    जन्मा है सृष्टि के?


    भरी दुपहरी के आखिरी पलों में भी

    चढ़ नहीं पाया आकाश


    बन जाता आकाश सुनहरा तो

    सूर्य की रश्मियां अपराजेय हो जातीं

    पहुंच जातीं उन नसों में

    जहां डर, दबाव और ख़ून एकमेक होकर

    बहता है।

    2 min
  • Prem Ke Baare Mein | Savita Singh

    प्रेम के बारे में । सविता सिंह 


    सिल्विया प्लाथ आओ

    मेरी आत्मा में बसो

    निश्चिंतता महसूस करो

    यहाँ अकेलापन कोई यातना नहीं

    जो ले जाए तुम्हें गैस स्टोव तक

    नहीं प्रेम के बदले नहीं मिला प्रेम कोई महादुख

    यहाँ जीवन की हल्की रोशनी में फूलों की तरह खिली हुई

    मिलेंगी जीवन जीने की अमूल्य सलाहें अब

    एक फूल जिनमें से तुम्हें भी जीवित करेगा

    अपनी अद्भुत सुगंध से


    आओ सिल्विया प्लाथ

    मुझमें बसो

    निश्चिंतता महसूस करो

    यहाँ दूर-दूर तक कोई पुरुष तुम्हें

    इतना बेबस नहीं कर सकेगा अपनी क्रूरता से

    कि तुम नष्ट हो जाओ

    अपने प्रेम से नहीं मार सकेगा वह तुम्हें दोबारा

    आओ और अपनी बाक़ी कविताएँ लिखो

    बताओ वह कैसी उदासी थी जिसे तुम झेल नहीं पाईं

    डूब गई जिसमें अंततः

    और यह भी कि अंत तक लगाते हुए आख़िरी ग़ोता

    क्या सोचा था तुमने प्रेम के बारे में

    3 min
  • Tumse Alag Hokar | Sarveshwar Dayal Saxena

    तुमसे अलग होकर। सर्वेश्वरदयाल सक्सेना


    तुमसे अलग होकर लगता है


    अचानक मेरे पंख छोटे हो गए हैं,

    और मैं नीचे एक सीमाहीन सागर में


    गिरता जा रहा हूँ।

    अब कहीं कोई यात्रा नहीं है,


    न अर्थमय, न अर्थहीन;

    गिरने और उठने के बीच कोई अंतर नहीं।


    तुमसे अलग होकर

    हर चीज़ में कुछ खोजने का बोध


    हर चीज़ में कुछ पाने की

    अभिलाषा जाती रही


    सारा अस्तित्व रेल की पटरी-सा बिछा है

    हर क्षण धड़धड़ाता हुआ निकल जाता है।


    तुमसे अलग होकर

    घास की पत्तियाँ तक इतनी बड़ी लगती हैं


    कि मेरा सिर उनकी जड़ों से

    टकरा जाता है,


    नदियाँ सूत की डोरियाँ हैं

    पैर उलझ जाते हैं,


    आकाश उलट गया है

    चाँद-तारे नहीं दिखाई देते,


    मैं धरती पर नहीं, कहीं उसके भीतर

    उसका सारा बोझ सिर पर लिए रेंगता हूँ।


    तुमसे अलग होकर लगता है

    सिवा आकारों के कहीं कुछ नहीं है,


    हर चीज़ टकराती है

    और बिना चोट किए चली जाती है।


    तुमसे अलग होकर लगता है

    मैं इतनी तेज़ी से घूम रहा हूँ


    कि हर चीज़ का आकार

    और रंग खो गया है,


    हर चीज़ के लिए

    मैं भी अपना आकार और रंग खो चुका हूँ,


    धब्बों के एक दायरे में

    एक धब्बे-सा हूँ,


    निरंतर हूँ

    और रहूँगा


    प्रतीक्षा के लिए

    मृत्यु भी नहीं है।

    3 min
  • Gaon Dehaat Ki Betiyaan | Neera Parmar

    गांव-देहात की बेटियां । नीरा परमार


    लू के थपेड़े हाड़ कंपाते जाड़े

    भरी बरसात में

    जंगल-पहाड़ नदी-नाले को

    लांघकर

    स्कूल जाती हैं

    दूर-दराज बियाबान में बसे

    गांव-देहात की बेटियां


    न तन ढंकने लायक कपड़े

    न पैरों में ढंग की चप्पल

    पौ फटते दो कौर बासी भात पेट में डाल

    घर गृहस्थी छोटे भाई-बहन

    मां-बाप के सौ टंटे बोरे

    बदरंग तख्ती के संग

    ब्लैकबोर्ड पर उभरते ककहरे से जोड़

    नाता

    अंधेरे में उम्मीद की कंदील

    जलाती हैं!


    2 min
  • Teddy Bear Main Bache Hue Bhalu | Gyanendrapati

    टेडी  बियर में बचे हुए भालू।  ज्ञानेन्द्रपति 


    बच्चियाँ जब

    अपने टेडी बियर  को छाती से चिपकाए

    दुलार रही होंगी

    छीज रहे भारतीय जंगलों में

    और खोजी दलों और अनुसंधान-स्टेशनों के

    कचरालय बने जा रहे ध्रुवीय प्रदेशों में

    बेमौत मारे जा रहे होंगे भालू

    काले भालू और भूरे भालू


    बगैर किसी रंग-भेद के

    कौन मार रहा होगा उन्हें 

    अपने टेडी बियर को छाती से लगाए

    सो जानेवाली बच्चियाँ

    क्या कभी सपने में भी जान सकेंगी इसे

    निहायत मुलायमियत से उनके आलिंगन से

    छुल्लक भल्लूक को हटा उन्हें रजाई उढ़ानेवाले  पापा

    आज ही कहा था जिन्होंने-बेटे, पुराना पड़ गया है यह

    कल ही बाजार से ला देंगे तुम्हारे लिए

    एक नया टेडी बियर

    प्यारा-सा टेडी बियर -

    वही पापा

    मदारियों से मुक्त करा

    भालुओं को बरास्ते चिड़ियाखाना वापिस जंगल

    भिजानेवाले मोह से भरे उनके पापा

    शामिल हैं

    उनके और अपने भी अनजाने

    भालुओं के हत्यारों में

    और बेहतर कि इसे कभी न जानें जंगली मधुमक्खियाँ

    कि शहदखोर शहदचोर भालुओं के लिए विलाप-नृत्य करती हुई

    भंभोड़ डालें बस्तियों पर बस्तियाँ

    आत्मघाती अभियानों में

    नहीं, नहीं जान सकेंगी बच्चियाँ इसे

    और न जान पाएँगे उनके प्यारे पापा

    और पीढ़ी-दर-पीढ़ी

    जंगली प्रदेशों से और बर्फ़ानी प्रदेशों से अंततः मिट गए भालू

    टेडी बियर बनकर दुकानों के शो केसों में वैठे रहेंगे अतीतातीत

    वत्सल पिताओं की प्रतीक्षा में

    मोहित बच्चियों की ममतालु बाँहों के बीच होगी उनकी अंतिम शरणस्थली

    उनकी आत्मा को मिलेगा अभयारण्य


    जहाँ माँ चिड़िया की तरह देह ही नहीं मन-प्राण की उष्मा से

    सेयेंगे वे

    वक्षांकुर

    भविष्योन्मुख ।

    4 min
  • Bachcha | Indu Jain

    बच्चा । इन्दु जैन


    औरत के सिर पर गठरी है

    कमर पर बच्चा

    मर्द हाथ में बक्सा

    लटकाये है

    बच्चा रो रहा है लगातार

    हाथ-पाँव पटक रहा

    बार-बार

    औरत के समझाने

    मर्द के झुँझलाने के बावजूद

    वह पैर-पैर चलना

    चाहता है

    और

    गठरी अपने सिर पर

    उठाना चाहता है।


    2 min
  • Kavitayein | Dharmesh

    कविताएँ । धर्मेश


    ख़त्म हो चुकी हैं कविताएँ


    शब्दों ने कर ली है सामूहिक आत्महत्या

    मजनूँ के क़त्ल हो जाने के डर से


    लैला ने तिलांजलि दे दी है अपने प्रेम की

    जंगल की हत्या पर आमादा शहर


    चीर चुका है नदी का हृदय

    सियारों को गाली देने वाले आदमी ने


    नोच खाया है एक और आदमी को

    मेरी आँखों में अब भी बचा है प्रेम


    ये इस दुनिया की तबाही का सूत्र है


    2 min

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कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के…