लेखक इलाहाबाद से लखनऊ जा रहे थे। बाबू हनुमानप्रसाद ने उन्हें वहाँ से गोभी के फूल लाने का आग्रह किया। हनुमानप्रसाद को हरी सब्ज़ी का मर्ज है। किस सब्ज़ी में कितने विटामिन होते हैं, कितना लोहा, कितना चूना, कितना कत्था, कितनी लड़की, कितना ईट, कितना गारा वगैरह होता है- इसका उन्हें विशद ज्ञान है। लेखक उनकी बात को इंकार नहीं कर पाया।