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भारत के कोलकाता शहर की महिला उद्यमी सुजाता चैटर्जी का मानना है कि कपड़ों की बर्बादी एक बड़ा पर्यावरणीय मुद्दा है.
सुजाता अपने उद्यम के ज़रिये, घरों में बेकार पड़े कपड़ों को एकत्र करके, उसका एक हिस्सा गाँव में ग़रीब लोगों को देती हैं, और बाकी कपड़ों को री-सायकिल करके नए उत्पाद बनाती हैं.
सुजाता का उद्यम पूरी तरह महिलाओं द्वारा संचालित है और परिधान उद्योग में प्रदूषण से निपटने के अलावा ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण में भी अहम भूमिका निभा रहा है.
इस काम के लिये, उन्हें संयुक्त राष्ट्र की महिला संस्था, UN Women के 'Industry Disruptor' कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिये चुना गया.
यूएन न्यूज़ हिन्दी ने सुजाता चैटर्जी के साथ बात की और सबसे पहले पूछा कि उनका यह सफ़र किस तरह शुरू हुआ...
जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिये सहनक्षमता निर्माण को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है.
भारत में 'महिला हाउसिंग सेवा ट्रस्ट' नामक एक ग़ैर-सरकारी संगठन, दक्षिण एशियाई देशों के शहरी इलाक़ों में रहने वाले निम्न आय वाले परिवारों में, महिलाओं को संगठित करने व उनके सशक्तिकरण के लिये प्रयासरत है.
इसके तहत, ताप लहरों, जल की क़िल्लत, जल भराव या जल जनित बीमारियों की रोकथाम के लिये महिलाओं को प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है ताकि स्थानीय रूप से प्रासंगिक और ज़रूरतों के अनुरूप समाधानों को अपनाया जा सके.
जलवायु परिवर्तन मामलों के लिये यूएन संस्था (UNFCCC) ने वर्ष 2019 में ‘महिला हाउसिंग सेवा ट्रस्ट’ को वैश्विक जलवायु कार्रवाई के लिये सम्मानित किया था.
यूएन न्यूज़ हिन्दी ने इस ट्रस्ट की निदेशक बीजल ब्रह्मभट्ट से बात की और सबसे पहले जानना चाहा कि महिलाओं को जलवायु कार्रवाई के केंद्र में रखा जाना क्यों अहम है.
इस साप्ताहिक बुलेटिन की सुर्ख़ियाँ...
जलवायु परिवर्तन पर अन्तरसरकारी आयोग (IPCC) ने, अपनी एक नई रिपोर्ट में दुनिया पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव के बारे में एक कड़ी चेतावनी जारी की है.
विशेषज्ञों का कहना है कि पारिस्थितिकी विघटन, प्रजातियों के विलुप्तिकरण, जानलेवा गर्मियाँ और बाढ़ें, ये ऐसे जलवायु ख़तरे हैं जिनका सामना विश्व को, वैश्विक तापमान वृद्धि के कारण, अगले दशकों में करना पड़ सकता है.
इस रिपोर्ट के मुख्य लेखकों में शामिल, और भारती इन्स्टीट्यूट ऑफ़ पब्लिक पॉलिसी में शोध निदेशक, डॉक्टर अंजल प्रकाश का कहना है कि अगले 10-15 वर्षों में कारगर जलवायु कार्रवाई बेहद ज़रूरी है, अन्यथा आमजन के लिये बड़े ख़तरे पैदा हो सकते हैं.
यूएन न्यूज़ हिन्दी ने डॉक्टर अंजल प्रकाश के साथ बातचीत में सबसे पहले जानना चाहा कि, जलवायु कार्रवाई, अनुकूलन और कार्बन उत्सर्जन में कटौती के नज़रिये से, इस रिपोर्ट के क्या मायने हैं...
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