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अफ़ग़ानिस्तान में मौजूदा राजनैतिक, सुरक्षा और मानवीय संकट के कारण गम्भीर हालात हैं और देश की लगभग आधी आबादी को मानवीय सहायता की आवश्यकता बताई गई है.
संयुक्त राष्ट्र की कई एजेन्सियाँ ज़रूरतमन्दों तक मदद पहुँचाने के काम में मुस्तैदी में जुटी हैं. मगर, उन्हें संसाधनों की कमी के कारण कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, जिसके मद्देनज़र, संयुक्त राष्ट्र ने चिन्ता जताते हुए अन्तराराष्ट्रीय समुदाय से सहायता की अपील की है.
संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) के प्रवक्ता बाबर बलोच ने, यूएन न्यूज़ हिन्दी की अंशु शर्मा के साथ बातचीत में बताया कि अफग़ानिस्तान में बड़े पैमाने पर लोग विस्थापित हुए हैं जिनमें अधिकाँश महिलाएँ व बच्चे हैं.
यूएन एजेंसी प्रवक्ता ने ज़ोर देकर कहा कि विस्थापितों की बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से सहयोग की आवश्यकता होगी.
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संयुक्त राष्ट्र महासभा के 76वें सत्र के अवसर पर, यूएन रेडियो से मुख्य समाचार.
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 76वें सत्र के अवसर पर, यूएन रेडियो से मुख्य समाचार.
"डरबन घोषणा पत्र व कार्रवाई प्रोग्राम की 20वीं वर्षगाँठ, हमें यह सोचने-समझने का अहम मौक़ा मुहैया कराती है कि हम कहाँ खड़े हैं, और हमें पहुँचना कहाँ है. नस्लवाद और नस्लीय भेदभाव अब भी, संस्थानों, सामाजिक ढाँचों और हर समाज में हर दिन अपनी जड़ें जमाए हुए है. ढाँचागत नस्लभेद और व्यवस्थागत अन्याय, आज भी लोगों को उनके बुनियादी मानवाधिकारों से वंचित करते हैं."
यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के प्रमुख का ये बयान ऐसे समय में आया है जब संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष मानवीय सहायता अधिकारी मार्टिन ग्रिफ़िथ्स ने, अफ़ग़ानिस्तान के बेहद कमज़ोर स्वास्थ्य ढाँचे को समर्थन व सहायता मुहैया कराने के लिये, यूएन आपदा कोष से, साढ़े चार करोड़ डॉलर की रक़म जारी की है.
मार्टिन ग्रिफ़िथ्स ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान के स्वास्थ्य ढाँचे को यूँ ही बिखर जाने देने के, विनाशकारी परिणाम होंगे.
अमेरिका ने न्यूयॉर्क में जारी संयुक्त राष्ट्र महासभा के 76वें सत्र के दौरान, बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा ढाँचा विषय पर एक वर्चुअल शिखर बैठक का आयोजन किया, जिसमें कोविड-19 महामारी का अन्त करने और भावी महामारियों के जोखिमों से निपटने के मुद्दे पर विचार विमर्श हुआ.
यूएन प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने बैठक को सम्बोधित करते हुए क्षोभ जताया कि वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा अब तक विफल साबित हुई है और लगभग 45 लाख लोगों की मौत हो चुकी है.
टॉम एण्ड्रयूज़ के अनुसार, म्याँमार की सेना ने सत्ता पर नियंत्रण स्थापित करने के बाद से, 1100 से भी ज़्यादा लोगों की हत्याएँ की हैं, 8 हज़ार से ज़्यादा लोगों को मनमाने तरीक़े से बन्दी बनाया गया है, और 2 लाख 30 हज़ार से ज़्यादा लोगों को जबरन विस्थापित किया गया है.
यूएन महासभा के 76वें सत्र के अवसर पर, यूएन रेडियो से मुख्य समाचार...
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