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9 जुलाई 2021 के साप्ताहिक बुलेटिन की सुर्ख़ियाँ...
2 जुलाई 2021 के इस साप्ताहिक बुलेटिन की सुर्ख़ियाँ...
विकलांगजन के अधिकारों को बढ़ावा देने के लिये प्रयासरत और फ़िनलैण्ड की एबीलिस फ़ाउण्डेशन में नेपाल के लिये कन्ट्री कोऑर्डिनेटर बीरेन्द्र राज पोखरेल का कहना है कि कोविड-19 महामारी के दौरान विकलांग व्यक्तियों के लिये गम्भीर चुनौतियाँ पैदा हुई हैं, जिनसे निपटने के लिये भावी योजनाओं में उनकी विशिष्ट आवश्यकताओं का ख़याल रखा जाना होगा.
विश्व में एक अरब लोग, यानि लगभग हर सात में से एक व्यक्ति किसी ना किसी रूप में विकलांग है. इनमें से अधिकाँश लोग विकासशील देशों में रहते हैं
विकलांगजन के अधिकारों पर सन्धि में शामिल सदस्य देशों के सम्मेलन का हाल ही में14वां सत्र आयोजित हुआ, जिसमें विकलांगजन अधिकार कार्यकर्ता बीरेन्द्र राज पोखरेल ने भी हिस्सा लिया.
यूएन न्यूज़ हिन्दी के सचिन गौड़ के साथ एक ख़ास बातचीत में उन्होंने बताया कि इस सत्र में किन विशेष मुद्दों पर चर्चा हुई...
25 जून 2021 के इस साप्ताहिक बुलेटिन की सुर्ख़ियाँ...
योगासन और शारीरिक व मानसिक अनुशासन के ज़रिये ना सिर्फ़ प्रतिरोधक क्षमता को मज़बूती प्रदान करने और कोविड-19 के दुष्प्रभावों से उबरने से मिल सकती है, बल्कि योग को दैनिक जीवन में शामिल करने से, एक स्वस्थ जीवन की नींव भी तैयार की जा सकती है.
यह कहना है कि डॉक्टर कृष्णा रामन का, जिन्होंने सोमवार, 21 जून, को ‘अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस’ पर संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई मिशन द्वारा ‘Yoga for well being’ नामक विषय पर आयोजित एक ऑनलाइन चर्चा में हिस्सा लिया.
उनका मानना है कि योग, बीमारियों के उपचार में सहायक होने के साथ-साथ, उनकी रोकथाम में भी प्रभावी है.
डॉक्टर रामन ने कम उम्र में ही योग अभ्यास की शुरुआत की और अपनी मेडिकल डिग्री हासिल करने के बाद एक चिकित्सक के तौर पर, पिछले तीन दशकों से, पश्चिमी चिकित्सा पद्धति के साथ-साथ, जीवन शैली में योग के महत्व को भी बढ़ावा दिये जाने के लिये प्रयासरत हैं.
यूएन न्यूज़ हिन्दी के सचिन गौड़ के साथ डॉक्टर रामन की एक ख़ास बातचीत...
18 जून 2021 के इस साप्ताहिक बुलेटिन की सुर्ख़ियाँ...
संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों की एक नई रिपोर्ट दर्शाती है कि दो दशकों में पहली बार, बाल श्रमिकों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है.
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि कोविड-19 महामारी के परिणामस्वरूप 2022 के अन्त तक, वैश्विक स्तर पर, 90 लाख अतिरिक्त बच्चों को बाल श्रम में धकेले जाने का ख़तरा है.
‘बाल श्रम: वैश्विक अनुमान 2020, रुझान और आगे की राह’ नामक यह रिपोर्ट, अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन और संयुक्त राष्ट्र बाल कोष द्वारा जारी की गई है.
दिल्ली में यूएन न्यूज़ हिन्दी की अंशु शर्मा के साथ एक ख़ास बातचीत में अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन के भारत कार्यालय में नेशनल प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर, रन्जीत प्रकाश ने बताया कि कोविड-19 के कारण बाल श्रम के उन्मूलन का लक्ष्य अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है.
11 जून 2021 के इस साप्ताहिक बुलेटिन की सुर्ख़ियाँ...
और, कोविड-19 से पुनर्बहाली प्रयासों में, प्रकृति के विरुद्ध युद्ध का अन्त और महासागरों की रक्षा ज़रूरी
भारत में पिछले दो महीनों में कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर ने संकट की स्थिति पैदा कर दी और इस दौरान देश की स्वास्थ्य प्रणाली को भारी चुनौती का सामना करना पड़ा है.
साथ ही, महामारी से बचाव और रोकथाम उपायों की वजह से लाखों लोगों की आजीविका और खाद्य सुरक्षा के लिये भी एक बड़ा ख़तरा पैदा हो गया है. भारत के पास खाद्य-आधारित सामाजिक संरक्षा उपाय मौजूद हैं, मगर महामारी से उपजी अतिरिक्त चुनौतियों के समाधान की आवश्यकता होगी.
इसी विषय पर ज़्यादा जानकारी के लिये यूएन न्यूज़ हिन्दी ने भारत में विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) के प्रतिनिधि और देशीय निदेशक, बिशॉय पाराजुली से बात की,
4 जून 2021 के इस साप्ताहिक बुलेटिन की सुर्ख़ियाँ...
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