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भारत की राजधानी दिल्ली में विधानसभा की सदस्या, आतिशी का करियर शिक्षण से शुरू हुआथा, जिसने आगे जाकर ऐसा राजनैतिक मोड़ लिया कि दिल्ली के सरकारी स्कूलों की काया-पलट ही हो गई.
आतिशी ने, अन्तरारष्ट्रीय महिला दिवस पर, महिलाओं के राजनीति में प्रतिनिधित्व व महिला अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर, यूएन न्यूज़ हिन्दी की अंशु शर्मा के साथ ख़ास बातचीत की...
छवि राजावत, भारत के राजस्थान प्रदेश में, वर्ष 2010 से 2020 तक, राजधानी जयपुर के निकट एक गाँव सोडा की सरपंच रही हैं. सरपंच के रूप में काम करने के लिये, कॉर्पोरेट जगत का करियर छोड़ने वाली, छवि राजावत का मानना है कि ज़मीनी स्तर पर बदलाव लाने के लिये बुनियादी स्तर पर शुरू करना ज़रूरी है, “अगर हम मूलभूत चीज़ों की बात करें, तो हम बच्चों से स्कूलों में पूछते हैं कि विपरीत शब्द बताओ. सफ़ेद का विपरीत शब्द क्या है – काला मानते हैं. और आप पूछें कि पुरुष का विपरीत शब्द क्या है – तो वो कहेंगे महिला. तो शुरूआती स्तर पर ही हम बहुत ग़लत चीज़ सिखा रहे हैं. क्योंकि पुरुष और महिला विपरीत नहीं हैं, वो एक-दूसरे के पूरक हैं. यह समझना बहुत ज़रूरी है और इसकी शुरूआत हमारे घरों में होती है, और समाज में होती है.”
अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस पर, भारत की पहली एमबीए सरपंच के नाम से मशहूर, छवि राजावत से यूएन न्यूज़ की अंशु शर्मा ने एक ख़ास बातचीत में यह जानने की कोशिश की कि कॉरपोरेट जगत छोड़कर सरपंच बनने की प्रेरणा उन्हें कैसे मिली...
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‘वैश्विक अध्यापक पुरस्कार 2020’ के विजेता रंजीतसिंह डिसले का कहना है कि दुनिया को, 21वीं सदी के शिक्षकों की आवश्यकता है और जीवन में टैक्नॉलॉजी की बढ़ती भूमिका के मद्देनज़र, शिक्षकों को भी कक्षाओं में प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल बढ़ाना होगा.
भारत में महाराष्ट्र प्रदेश के सोलापुर ज़िले के परीतेवाड़ी गाँव में सरकारी स्कूल में अध्यापक, रंजीतसिंह डिसले को, हाल ही में ब्रिटेन में वर्के फ़ाउण्डेशन और संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवँ सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) द्वारा, शिक्षा से परे जाकर समाज में बदलाव लाने की उनकी कोशिशों के लिये पुरस्कृत किया गया है.
इस पुरस्कार के लिये, 140 से अधिक देशों के 12 हज़ार से अधिक शिक्षकों को नामाँकित किया गया था.
रंजीतसिंह डिसले ने परिवर्तन लाने के लिये नई भाषा सीखी, छात्रों को शिक्षा में मदद करने के लिये डिजिटल तकनीक के तरीक़े ढूँढे, और ख़ास तौर पर लड़कियों की शिक्षा सुनिश्चित करने के लिये असीम प्रयास किये.
हमारी सहयोगी अंशु शर्मा ने उनकी इस असाधारण शिक्षा मुहिम के बारे में विस्तार से बात की...
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भारत में उत्तराखण्ड प्रदेश के चमोली ज़िले में रविवार सुबह ग्लेशियर टूटने और उसके बाद अचानक बाढ़ आने से हुए भारी नुक़सान के बाद, बड़े पैमाने पर बचाव और तलाश अभियान चलाया गया है.
उत्तराखण्ड में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) कार्यालय की प्रमुख, रश्मि बजाज ने, यूएन न्यूज़ के साथ बातचीत में बताया कि प्रभावित इलाक़े में पानी के तेज़ बहाव, मलबा और चट्टानें बह जाने के कारण दो जल-विद्युत परियोजनाएँ बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुई हैं.
मीडिया ख़बरों के अनुसार, अनेक लोग हताहत हुए हैं जिनकी संख्या बढ़ने की आशंका जताई गई है.
सुनिए यूएन न्यूज़ की अंशु शर्मा के साथ उनकी ख़ास बातचीत...
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