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भारत में सर्दी के मौसम में, खेतों में फ़सलों की उपज काटने के बाद बचे हुए पुआल और अन्य कचरे को खुले मैदानों में जला दिया जाता हैं. इससे प्रदूषण की समस्या पैदा होती है और साँस की बीमारियों का ख़तरा बढ़ जाता है.
भारत के एक युवा इंजानियर व अन्वेषक विद्युत मोहन ने इस समस्या के निदान के लिये एक ऐसी मशीन ईजाद की है, जिससे पुआल या पराली को उच्च तापमान में तपा कर चारकोल, खाद व ईंधन जैसी वस्तुओं में तब्दील किया जा सकता है. इससे प्रदूषण की समस्या तो हल होती ही है, किसान की आमदनी भी बढ़ती है.
भारत के विद्युत मोहन, विश्व भर से चुने गए उन 7 अन्वेषकों में से एक हैं जिन्हें पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में अपने इस असाधारण काम के लिये, संयुक्त राष्ट्र ने 2020 के ‘यंग चैम्पियन ऑफ़ द अर्थ-2020’ पुरस्कार से सम्मानित किया है.
उनके कार्य के बारे में विस्तृत जानकारी के लिये हमारी सहयोगी अंशु शर्मा ने उनके साथ बातचीत की...
पेरिस समझौते की पाँचवी वर्षगाँठ से ठीक पहले संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की एक नई रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि कोविड-19 के कारण वैश्विक स्तर पर कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कुछ गिरावट हुई है, लेकिन संकेत यही हैं कि वर्तमान स्थिति से, जलवायु परिवर्तन की बड़ी चुनौती का सामना करने में कोई ख़ास फर्क़ नहीं पड़ा है, और इस सदी के अन्त तक, वैश्विक तापमान 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है.
रिपोर्ट बताती है कि अगर जलवायु कार्रवाई के लिये तात्कालिक क़दम उठाए जाएँ, तो तापमान वृद्धि को रोका जा सकता है. इस रिपोर्ट और जलवायु महात्वाकाँक्षा सम्मेलन पर विस्तृत जानकारी के लिये सुनिये, भारत में यूएन एजेंसी की प्रोग्राम मैनेजमेंट ऑफ़िसर, दिव्या दत्ता के साथ एक ख़ास बातचीत.
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