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योग के सिद्धांत मानवता को विश्व में हर जीव के प्रति संवेदनशीलता सिखाते हैं और उन मूल्यों को लागू करने से विश्व स्तर पर बड़े बदलावों को लाना संभव है.
यह कहना है 'लाइफ़स्टाइल कोच और मोटीवेशनल स्पीकर' गौर गोपाल दास का जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया.
इस वर्ष योग दिवस की थीम 'योग फ़ॉर क्लाइमेट एक्शन' यानी जलवायु कार्रवाई में योग की भूमिका है और इसी विषय पर यूएन में एक परिचर्चा का आयोजन किया गया.
विश्व योग दिवस पर पूरे भारत में भी उत्साह का माहौल देखने को मिला.
भारी संख्या में लोगों ने जहाँ, जगह मिली, वहीं पर योग का आनंद लिया तो अनेक स्थानों पर संगठित तरीक़े से योग कार्यक्रम आयोजित किए गए. राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व अनेक मंत्रियों ने भी विभिन्न कार्यक्रमों में शिरकत की.
दिल्ली से हमारी सहयोगी अंशू शर्मा की रिपोर्ट.
शुक्रवार 21 जून को दुनिया भर में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया.
इस मौक़े पर न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में भी अनेक कार्यक्रम और गतिविधियाँ आयोजित की गई हैं. गुरूवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में आयोजित एक कार्यक्रम में संयुक्त राष्ट्र के कर्मचारियों, देशों के राजनयिकों के साथ-साथ अनेक अतिथियों ने भी शिरकत की.
इस वर्ष के अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की थीम थी – योग से जलवायु परिवर्तन के समाधान में किस तरह मदद मिल सकती है.
सुनिए यूएन न्यूज़ की यह रिपोर्ट.
हिंसा, संघर्ष और राजनीतिक अस्थिरता से होकर जो रास्ता शांति और सुरक्षा की ओर जाता है उस रास्ते में कई बड़े अवरोधों और मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. और पिछले सात दशकों से ऐसी ही चुनौतियों से पार पाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं ब्लू हेलमेट पहने संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षक.
अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा से जुड़ी इस अहम ज़िम्मेदारी को सफलतापूर्वक निभाने में भारत के शांतिरक्षकों ने अपनी एक अलग पहचान बनाई है.
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