In traditional society, gender roles at home and work are often fixed, with women handling household duties and men earning. Anil Dubey from Bihar challenges this norm by becoming a house husband, leaving his job to manage the home while his wife works, reflecting a shift in social attitudes. - आज के पारंपरिक समाज में अब भी घर और बाहर की भूमिकाएँ अक्सर तय मानी जाती हैं—घर के काम महिलाएँ करेंगी, जबकि बाहर काम करना, कमाना और घर चलाना पुरुषों की ज़िम्मेदारी समझी जाती है। इसी सोच के कारण “हाउसवाइफ” शब्द आम हुआ होगा। लेकिन बिहार के रहने वाले अनिल दुबे की कहानी इस धारणा को चुनौती देती है। बिहार के अनिल दुबे ने ‘हाउस हसबंड’ बनकर एक अलग और प्रेरक उदाहरण पेश किया है। यह सिर्फ एक व्यक्ति का फैसला नहीं, बल्कि बदलती सामाजिक सोच का संकेत भी है। अनिल ने अपनी नौकरी छोड़कर घर की जिम्मेदारी संभालने का निर्णय लिया, जबकि उनकी पत्नी पेशेवर रूप से काम कर रही हैं। हाउस हसबंड बनने के बाद अनिल दुबे ने अपने सभी दायित्वों को पूरे समर्पण और जिम्मेदारी के साथ निभाया है।