Iti Itihaas

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By Aaj Tak RadioHistory
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Iti Itihaas episodes

  • ऐसी क्या मजबूरी थी कि रूस ने अमेरिका को अपना एक शहर बेच दिया?: इति इतिहास, Ep 09
    आपने किसी एक देश के शहर पर दूसरे का कब्ज़ा होते देखा होगा.. सुना होगा, लेकिन कभी ये सुना है कि किसी देश ने अपना एक शहर दूसरे देश को बेच दिया हो.. वो भी अपने दुश्मन देश को. रूसी जनता इसके पक्ष में नहीं थी. बावजूद इसके रूस के ज़ार ने 30 मार्च 1867 को अलास्का अमरीका को बेच दिया. आखिर ऐसी क्या मजबूरी थी रूस की? सुनिए इति इतिहास के इस एपिसोड में.
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  • स्विमिंग पूल में नहा रहे थे अश्वेत,लोगों ने पूल में तेज़ाब डाल दिया था :इति इतिहास,Ep 08
    अपने बीचेस के लिए मशहूर अमेरिका का फ्लोरिडा प्रांत. साल 1964. मार्टिन लूथर किंग की रंगभेद विरोधी स्पीच ‘आई हैव अ ड्रीम’ मशहूर हो रही थी. तब एक होटल था, मॉनसन मोटर लॉज . तमाम होटलों की तरह यहां भी ब्लैक लोगों की एंट्री बैन थी. यही पॉलिसी स्विमिंग पूल्स को लेकर भी थी. लेकिन एक दिन काले लोगों का गुस्सा भड़क उठा.सुनिए उन्हें रोकने के लिए होटल मैनेजमेंट ने क्या किया और ये घटना अमेरिकी इतिहास की बड़ी घटना कैसे बन गई?
    3 min
  • 'OK' को टेलीग्राम ने कैसे बना दिया चर्चित शब्द, जानिए इतिहास: इति इतिहास, Ep 07
    अपने रोज़ की ज़िंदगी में ओके शब्द का इस्तेमाल हम कितना करते हैं ये बताना बहुत मुश्किल है. ये शब्द है ही इतना आम. लेकिन क्या आपको पता है कि ok का इस्तेमाल शुरू कहां से हुआ? इसका इतिहास क्या है?
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  • अलार्म के पहले लोग कैसे एक निश्चित समय पर उठा करते थे? :इति इतिहास, Ep 06
    आज अलार्म सबकी दिनचर्या का ज़रूरी अंग है. अलार्म न हो तो न जाने कितनों की सुबह कितनी देर से हो. लेकिन जब अलार्म नहीं था तब लोग कैसे उठा करते थे? क्या थी पहले अलार्म के अस्तित्व में आने की कहानी? सुनिए 'इति इतिहास' के इस एपिसोड में.
    3 min
  • जब जिन्ना ने माना कि पाकिस्तान बनाकर ग़लती हो गई :इति इतिहास, Ep 05
    वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर ने अपनी आत्मकथा ‘एक ज़िंदगी काफी नहीं' मे लिखा बंटवारे के दौरान देश की स्थिति देखने निकले जिन्ना तत्कालीन हालात देख के व्यथित हो गए थे. हालात इतने ख़राब थे कि जिन्ना के मुंह से निकल पड़ा ये मैंने क्या कर डाला? बंटवारे की त्रासदी और पाकिस्तान में कट्टरता का आलम देखकर जिन्ना दुखी थे लेकिन क्या इतने कि वो भारत लौट आना चाहते थे. अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा पूरा करने को एक मुल्क को तोड़ देने वाला एक बड़ा नाम क्या वाकई ये सोचता था? सुनिए इति इतिहास के इस एपिसोड में.
    3 min
  • एक कस्बा जहां एक बिल्ली मेयर बन गई! :इति इतिहास, Ep 04
    अगर कोई आपसे कहे कि दुनिया में एक जगह है जहां लोगों ने बिल्ली को मेयर बना दिया तो आप भरोसा करेंगे? एक्चुअली ऐसा हुआ है. अमेरिका के अलास्का की टॉकीट्ना काउंटी में. सुनिए पूरा किस्सा ‘इति इतिहास’ के इस एपिसोड में.
    3 min
  • केचअप, दवा से लेकर ब्रेड तक : इति इतिहास, Ep 03
    साल 1700 के आसपास की बात होगी. केचअप का पहला वर्जन तभी दिखा. जगह थी चीन. लेकिन तब ये टोमैटो केचअप नहीं था और न ही केचअप को केचअप कहते थे. चीनी इतिहासकार गेन झाऊ ने लिखा है कि तब इसे गेचप कहते थे या कुछ जगहों पर कोएचप. मछलियों से या सोयाबिन से इसे तैयार किया जाता था. कुछ ही साल में बढ़ते बढ़ते ये इंग्लैंड भी पहुँच गया. और यहाँ इसका यूज भी बदला. फिश केचप या सोया केच अप टोमैटो केचप बन गया. यहीं चीन का गेचअप या कोएचप केचअप कहलाया. इंग्लैंड में आने के कुछ ही साल में लेमन केचअप भी बनने लगा. यहाँ तक की मशरूम केचअप भी. लेकिन लेकिन लेकिन ये सारे केचअप टोमैटो केचअप सी पॉप्युलेरिटी नहीं पा सके. तब एक साइंटिस्ट हुए थे डॉक्टर जॉन कुक. उन्होंने साल 1834 में ये आइडिया दिया था कि टोमेटो केचअप को डायरिया, इनडाइजेशन और पीलिया की दवा की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है. बस फिर क्या था केचप मेडिकल स्टोर्स पर मिलने लगा. सुनिए केचअप के इतिहास की पूरी कहानी ‘इति इतिहास’ में.
    3 min
  • किसने अकबर की हड्डियाँ कब्र से निकालीं और जला दिया?: इति इतिहास, Ep 02
    आगरा से चार किलोमीटर दूर है सिकंदरा जहां अकबर की कब्र है. अकबर की मृत्यु के करीब 50 साल बाद 1658 में औरंगजेब गद्दी पर बैठा. उस वक्त औरंगजेब जाटों की बग़ावत से जूझ रहा था. साल 1669 में एक युद्ध हुआ जिसमें औरंगजेब ने जाट इलाकों पर हमला कर के इनके नेता गोकुल जाट और उदय सिंह को कैद कर लिया. बाद में इन्हें फांसी भी दे दी गई. फिर ऐसा क्या किया जाटों ने औरंगजेब से बदला लेने के लिए और मरे हुए अकबर को उन्होंने कैसे नुकसान पहुंचाया? सुनिए 'इति इतिहास' के इस एपिसोड में.
    3 min
  • जब कॉफी हाउस जाने पर दी जाती थी मौत की सज़ा: इति इतिहास, Ep 01
    14th सेंचुरी में जो कॉफी यमन में जन्मी वो डेढ़ सौ साल बाद तुर्की की गलियों में जा पहुंची. खूब कॉफी हाउसेज़ खुले. उन दिनों तुर्की के इस्तांबुल में झंडा बुलंद था ऑटोमन अंपायर के मुराद फोर्थ का. मुराद जवान था, तानाशाह टाइप भी. कॉफी का चस्का इस्तांबुल के लोगों को ऐसा लगा था कि वो दिनरात कॉफी हाउस में बैठे रहते. फिर क्या हुआ ऐसा कि मुराद ने कॉफी हाउस जाने पर सजा का ऐलान कर दिया? सुनिए कॉफी का इतिहास 'इति इतिहास' में नितिन ठाकुर से.
    3 min

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