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  • Power of Positivity
    खुद की आलोचना न करें, ये सुधार में बाधक है
    उस बात पर हमेशा गौर करें जिसके लिए आप खुद को सबसे ज्यादा दोष देते हैं। फिर चाहे वह देरी हो, ओवर ईंटिंग हो या कुछ और। क्षण 'भर के लिए उस भाषा पर विचार करें, जिसका उपयोग आप उस समय खुद को दोष देने के लिए करते हैं। क्या आप खुद को बहुत बुरा-भला कहते हैं। आलसी, बेवकूफ जैसे शब्दों का प्रयोग करते हैं तो इसे बंद कर दीजिए। विशेषज्ञ खुद के बारे में इस तरह के शब्दों का प्रयोग करने या खुद के लिए जजमेंट करने से मना करते हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि इस तरह की आलोचना आपको समस्याओं के वास्तविक कारणों तक नहीं पहुंचने देती, जिससे आप समस्या के समाधान तक नहीं पहुंच पाते।
    मनोवैज्ञानिक आमतौर पर जोर देते हैं कि विचारों, भावनाओं और व्यवहार के लिए एक उचित स्पष्टीकरण होता है। इसे 'सहानुभूति' कहा जाता है। इसका उपयोग लोगों में बदलाव लाने के लिए किया जाता है। दरअसल जब हम जजमेंट करते हैं तो हम मानसिक रूप से दुनिया
    को 'अच्छे' और 'बुरे' की श्रेणी में विभाजित करते हैं। हम जटिल चीजों को 'बेवकूफ', 'बदसूरत', 'स्मार्ट', या फिर 'पागल' जैसे आसान लेबल देकर शॉर्टकट बनाते हैं। बुद्धिमानी के साथ मानसिक शॉर्टकट बनाने की यह क्षमता जीवित रहने के लिए महत्वपूर्ण भी है। क्योंकि दुनिया में इतनी अधिक सूचनाएं हैं कि सब कुछ विस्तार से नहीं जाना जा सकता।
    तो क्या करें: खुद की आलोचना करते समय रुकें और पूछें, 'इससे मेरा क्या मतलब है?' बुरी आदतों में तर्क खोजें। दरअसल आपका दिमाग बता रहा होता है कि गतिविधि अप्रिय होने वाली है। अप्रिय क्या हो सकता है इसके बारे में विचार करें।
    4 min
  • The Power of Now/ Powerful Present ( Audio book summary )
    मन में दुख की स्क्रिप्ट न लिखें, अभिव्यक्त कर दें दें
    जब भी कोई आपदा या विपत्ति आ पड़े या कुछ बहुत बुरा हो जाए, जैसे बीमारी, आदि तब आश्वस्त रहिए कि इसका दूसरा पहलू भी है, कि आप एक अविश्वसनीय एकहार्ट टॉल्ल चीज से बस विख्यात लेखक एक कदम दूर हैं। और वह है उस पीड़ा व दुख-तकलीफ रूपी घटिया धातु को सोने जैसी कीमती धातु में बदलने का समय और एक कदम को समर्पण कहते हैं।
    इसका मतलब यह नहीं है कि आप ऐसी स्थिति में सुखी हो जाएंगे, खुश हो जाएंगे। लेकिन ऐसा अवश्य है कि आपका भय और दुख, शांति में, सुकून में बदल जाएगा। यह ईश्वरीय शांति है जो किसी भी बोध शक्ति से पार और परे है। उसकी तुलना में सुख तो एक बहुत ही उथली चीज है। जो कुछ बाहर है अगर उसे आप स्वीकार नहीं कर सकते हैं तो जो भीतर है उसे स्वीकार कीजिए।
    इसका अर्थ है दुःख का प्रतिरोध न करें। उसे वहीं रहने दें। वह दुख जिस भी रूप में हो- शोक, विषाद, हताशा, निराशा, भय, चिंता, अकेलापन उसके प्रति समर्पण करें। मानसिक रूप से कोई ठप्पा लगाए बिना उसे साक्षी की तरह देखें। तब देखिए कि समर्पण का चमत्कार उस गहरे दुख को किस तरह एक गहरी शांति में बदल देता है। जब बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं होता है तो भी उससे पार पाने का कोई तो रास्ता होता ही है। इसलिए दुख-दर्द से बच कर मत भागिए। उसका सामना कीजिए। उसे महसूस कीजिए- पर उसके बारे में सोचिए मत। हो सके तो उसे अभिव्यक्त कीजिए, लेकिन उसके बारे में अपने मन में कोई स्क्रिप्ट न रचते रहिए। उस एहसास को पूरी तवज्जो दीजिए, न कि उस व्यक्ति, उस घटना या उस स्थिति को जो कि उस एहसास के पैदा होने का कारण लग रहा हो । मुश्किलों से अच्छी तरह लडने का यही तरीका है ।
    3 min
  • The 5 am club ( Audiobook summary )
    दिन की शुरुआत आपका आगे का दिन तय करती है
    जागने के बाद के
    पहले 30 मिनट को मैं प्लैटिनम-30 बुलाता हूँ। क्योंकि वे वास्तव में आपके दिन के सबसे महत्वपूर्ण क्षण होते हैं और आगे आने वाले पलों को श्रेष्ठता पर अत्यंत महन प्रभाव डालते हैं। अगर आपके पास यह करने का विवेक और ज्ञान है तो इस प्रमुख समय में आप सिर्फ पवित्र विचारों को मन में लाएं और सर्वोत्तम कार्य करें। आप महसूस करेंगे कि आपका दिन एक शानदार शुरुआत के साथ अनेक सर्वश्रेष्ठ दिशाओं को लेकर आएगा। जिस तरह से आप अपने दिन की शुरुआत करते हैं वह यह निर्धारित करता है कि आपका दिन कैसा बीतेगा।
    मैं अपने दो छोटे बच्चों को सनसनीखेज आइमैक्स फिल्म 'एवरेस्ट' दिखाने ले गया। सांस रोक देने वाले दृश्यों के अलावा एक और बात जो मेरे ध्यान में रह गई वह यह है कि पर्वत की ऊंचाई तक पहुंचने के लिए एक अच्छे येस कैप की आवश्यकता होती है। अगर धरातल के कैंप में विराम, विश्रांत और शरण न मिलती तो उनका चोटी तक पहुंचना असंभव था। जब वे दूसरे कैप पहुंचे फिर ये कुछ हफ्तों के लिए अपनीत करते हैं जो मेरे लिए मात लाने के लिए बेस कैंप में वापस आ गए। जैसे ही वे तीसरे कैंप पर पहुंचे वे जल्द ही चौधे कैंप पर पहुंचने की तैयारी करने बेस कैंप में वापस आ गए। और जब वे पांच कैंप पर पहुंचे तब वे फिर से पर्वत के नीचे अपने शरणालय में आ गए, जिससे वे अपने आपको पर्वत के शिखर तक पहुंचने के लिए तैयार कर सके। उसी तरह हम सबको व्यक्तिगत ऊंचाइयों तक पहुंचने के लिए और अपनी दैनिक चुनौतियों पर विजय प्राप्त करने के लिए इस 'प्लैटिनक 30' के समय में अपने बेस कैंप जाने की कोशिश करनी चाहिए। हमें वापस उस जगह पर जाने की आवश्यकता होती है जहां हम फिर से अपने जीवन के ध्येय के साथ संबंधित हो जाते हैं। अपने स्वयं के जीवन में मैंने एक
    बहुत ही असरदायक प्रातःकालीन पद्धति का विकास किया है जो मेरे दिन की एक शांत और प्रसन्नता से भरी हुई शुरुआत करती है। मैं अपने निजी शरणालय में बैठकर बिना किसी विघ्न के उन नवीनीकरण के उपायों का अभ्यास करता हूँ। इसके बाद में पंद्रह मिनट का समय मौन मनन में व्यतीत करता हूँ। अपने जीवन की सबसे अच्छी बातों पर ध्यान केंद्रित करके यह सोचता हूँ कि अपने वाला दिन क्या लेकर आने वाला है। इसके बारे में ज्ञानवर्धक साहित्य से कोई पुस्तक उठाता हूँ। इन पुस्तकों के पाठ मुझे उन चीजों पर में जरूरी है। अपने दिन की अच्छी शुरुआत कीजिए। आप जल्द ही एक बदले हुए व्यक्तित्व के स्वामी होंगे।
    4 min
  • विवेक वचनावली ( Audiobook summary )
    आपकी स्वाधीनता से किसी का रत्तीभर बुरा न हो
    उन्नति के लिए आजादी सहायक है। मनुष्य के लिए जिस प्रकार सोचने और सोचकर प्रकट करने की स्वाधीनता होनी आवश्यक है उसी तरह उसे खाने पीने, पहनने, ओढने लेने-देने और विवाह आदि कर्मों की आजादी होनी चाहिए। उसकी स्वाधीनता से किसी का रत्तीभर बुरा न हो।
    सब बातों की स्वाधीनता के मायने हैं मुक्ति की ओर बढ़ना और यही पुरुषार्थ है। उस काम में सहायता करना परम पुरुषार्थ है जिससे और लोग शारीरिक, मानसिक और अध्यात्मिक स्वाधीनता की ओर बढ़ें। इस स्वाधीनता की स्फूर्ति में जिन सामाजिक नियमों के द्वारा बाधा पड़ती है वे अकल्याणकर हैं, बुरे हैं। इसलिए ऐसे नियमों को शीघ्र नष्ट करने का प्रयत्न करना चाहिए। व्यक्ति को बलवान बनने की कोशिश करनी चाहिए। कमजोर दिमाग कुछ भी नहीं कर सकता। सैकड़ों प्रलोभनों पर विजय प्राप्त करके, कमजोरियों को दबाकर, यदि तुम सत्य की सेवा कर सको तो सचमुच तमुमे एक ऐसा दिव्य तेज भर जाएगा कि उसके सामने,
    तुम्हें जो कुछ असत्य जंचता है उसका उल्लेख करने की हिम्मत औरों को नहीं होगी। जिसकी सहायता से इच्छाशक्ति का वेग
    और स्फूर्ति अपने वश में हो जाए और जो मनोरथ सफल हो सके वहीं शिक्षा है। मस्तिष्क में अनेक तरह का ज्ञान भर लेना, उससे कुछ काम न लेना और जन्म भर वाद विवाद करते रहने का नाम शिक्षा नहीं है। अच्छे आदर्श और अच्छे भावों को काम में लाकर लाभ उठाना चाहिए, जिससे वास्तविक मनुष्यत्व, चरित्र और जीवन बन सके। कुछ इम्तिहान पास करना अथवा धुंआधार व्याख्यान देने की शक्ति प्राप्त कर लेना शिक्षित हो जाना नहीं कहलाता। जिस विद्या के बल से जनता को जीवन संग्राम के लिए समर्थ नहीं किया जा सकता, जिसकी सहायता से मनुष्य का चरित्र बल परोपकार में तत्पर और सिंह का सा साहसी नहीं किया जा सकता, उसे शिक्षा नहीं कहा जा सकता। शिक्षा तो वही है जो मनुष्य को अपने पैरों पर खड़ा होना सिखाती है। भगवान ने कृष्णावतार में कहा है कि सभी प्रकार के दुखों कार कारण अविद्या है। निष्काम करने से चित्त शुद्ध होता है। जबकि कर्म वही है जिसके द्वारा आत्मभाव का विकास हो, और जिसके द्वारा अनात्मभाव का विकास हो वह अकर्म है।
    3 min
  • You Must Read
    द आर्ट ऑफ थिंकिंग क्लियर्ली
    विचारों की शक्ति को
    अहमियत देनी चाहिए। चिंता करने और विचार करने में बहुत ज्यादा अंतर होता है। लेकिन बहुत कम लोगों को ही इन दोनों में फर्क समझ आता है। चिंता करने से काम तो होता है, लेकिन कामयाबी हासिल नहीं होती। वहीं सोचने से हम आगे बढ़ते हैं और नए आयाम खोजते हैं। विचारों की शक्ति का कोई दायरा नहीं, यह तो असीमित है।
    मैनेजिंग वनसेल्फ
    अपने साथ होने वाली हर बात की जिम्मेदारी लें
    आप तभी तक खुद के बारे में अच्छा सोचते हैं जब तक खुद के नियंत्रण में होते हैं। अगर किसी दूसरे को जिम्मेदार बनाते हैं तो उन्हें अपना नियंत्रण सौंपते हैं। आप अब भी खुद के लिए जिम्मेदार हैं, लेकिन नियंत्रण दूसरे को सौंपने से मानसिक शांति खो देते हैं। अपने साथ होने वाली हर चीज का श्रेय और दोष खुद लें।
    रोड टू स्वसेस
    सफल होने के लिए अफलता की जरूरत है
    जब असफलता का डर बढ़ जाता है। तो यह आपकी सफलता और खुशी की राह में बाधा बन सकता है। सफल होना चाहते हैं तो अपनी असफलता की दर दोगुनी कर दें। सफलता, असफलता के दूसरे सिरे पर मौजूद होती है। असफलता, सबक सीखने का एक तरीका है। इसकी जरूरत सफल होने के लिए पड़ती है।
    मेहनत और त्याग हासिल होगी सफलता
    लोग जीवन में सफल होना चाहते हैं लेकिन उसके लिए मेहनत और त्याग नहीं करना चाहते। बहुत आसानी से घर मान लेते हैं। सफलता का रास्ता असफलता से होकर ही निकलता है। जो हवा के रुख की परवाह न करते हुए विरुद्ध जाकर भी काम करने के लिए तैयार रहते हैं, वही लोग सफलता हासिल कर पाते हैं।
    3 min
  • Communication skills series
    ( कभी भी किसी को भी Criticize ना करे )
    लेखक लिखते है कि मानो आज के वक्त हर कोई तैयार बैठा है किसी ना किसी को Criticize करने के लिए कयोंकि शायद हमारी एक - दूसरे को Criticize करने कि आदत सी बन गई है पर यह हमारे लिए खतरनाक साबित हो सकती है अगर आप मे यह आदत है तो आप लोगो को उनके हमेशा उनके दुश्मन कि तरहा नजर आने लगते हो ।
    लेखक कहते है कि सफल लोग कभी भी किसी को Criticize नही करते है और यदि उनको किसी को Criticize करना भी पडे तो वह इसके लिए सेन्डविच मैथड का उपयोग करते है ।
    इस नियम में आप सैंडविच कि तरह लोगो को Criticize करें , जिस प्रकार सैंडविच में ऊपर और नीचे कि तरफ़ Bread लगी होती है और बीच में cheese लगी होती है उसी तरह आप भी जब किसी कि आलोचना करें तो ऊपर नीचे प्रशंसा कि Bread लगा लें और बीच में आलोचना की cheese लगा दे ताकि सामने वाले को बूरा भी ना लगे और वह आप कि बात को भी समझ सके ।
    3 min
  • Power Of Positivity
    अमेरिकी लेखिका ग्रेचेन रुविन हैप्पीनेस प्रोजेक्ट पर काम कर रही हैं। रुबिन 'सेल्फ इनसाइट... नाम की किताब का हवाला देते हुए कहती हैं कि लोग किसी भी बात पर बहस कर सकते हैं। अगर उन्हें कहा जाए कि 'ए' सही है, तो उसके समर्थन में तर्क दे सकते हैं। अगर कहा जाए कि 'ए' का विरोधी सही है, तो वे उसी सफाई से उस पर भी बहस करने बैठ जाएंगे।
    हैप्पीनेस प्रोजेक्ट के शोध में सामने आया कि लोग सुबूतों पर जोर देते हैं और ये परिकल्पना, उसके बिल्कुल उलट है कि लोग जानकारियों के ऊपर रायशुमारी को प्राथमिकता देते हैं। उदाहरण के लिए अगर किसी से पूछें कि क्या वह कभी बाहर घूमने वाला व्यक्ति रहा है तो वह बैठकर उस समय की कल्पना करने लगेगा, जब वह मिलनसार हुआ करता था। अगर उसी व्यक्ति से पूछा जाए कि क्या वो शर्मीला था, तो वह उसके बारे में भी सोचने लगेगा।
    आप अपनी जिंदगी में इस थ्योरी को लागू कर सकते हैं। जैसे जब ख्याल आए कि जीवनसाथी में बिल्कुल दिमाग नहीं है, तब दिमाग
    भी उसके समर्थन में तर्क देने लगता है। आप बस करें इतना कि उसी समय उल्टा सोचना शुरू कर दें। जैसा मेरा जीवनसाथी बुद्धिमान है। तब दिमाग में इसके समर्थन में विचार आने लगेंगे। इससे आप वाकई में अपनी राय में बदलाव महसूस कर सकते हैं। ये थ्योरी बताती है कि कैसे खुशमिजाज लोग खुशनुमा माहौल में रहते हैं या उसे बना देते हैं।
    हमें अक्सर लोगों से वैसी प्रतिक्रिया मिलती है, जो हमारे दिमाग में पहले से बनी उनकी छवि को और मजबूत करती है। लेकिन ऐसा क्यों है? अगर आप हर वक्त बुरा बताँव करेंगे तो मुमकिन है कि लोग आपकी मदद न करें, जिसका परिणाम ये होगा कि आपका रवैया और बुरा होता जाएगा। इसके उलट अगर आप माहौल खुशनुमा बनाएंगे तो लोग भी मदद करने को तैयार रहेंगे।
    3 min
  • Communication skills serise
    जी हाँ , आप अगर इस अवस्था मे खडे होते है तो सामने वाले को हमेशा यह लगेगा कि आप बहुत ज्यादा आत्मविश्वासी और एक मजबूत व्यक्ति हैं और इसके साथ - साथ आप भी अपने आप को आत्मविश्वास से भरा हुआ महसूस कर पायेंगे अगर आप इस अवस्था मे खडे नही होगे तो लोग आप को हमेशा ही एक हारे हुए वयक्ति के रूप देखेंगे तो आज आप अपने खडे होने का अदाज थोड़ा बदल दीजिए ।
    2 min
  • ' आनंद लहर , चाहो और पा लो ' ( Audio book summary )
    आपके आनंद की जिम्मेदारी लेने वाला कौन है? घट रहा है। इस तरह जब सब कुछ आपके
    यदि आपको आनंदपूर्वक रहना है तो उसकी जिम्मेदारी लेने वाला कौन है? आपके पिता, अंदर ही घटित हो रहा है, केवल आपको पत्नि, संतान या मित्र ? आप जिन चीजों की कामना करते हैं, उन्हें पाने का मार्ग क्या है? इन बातों पर एक-एक करके विचार करें। है। पर्वत शिखर पर तैर रहे बादल चोटियों से टकरा रहे हैं। इस पृष्ठभूमि में सूरज पीले रंग में भीग कर डूब रहा है। आप इस रमणीय दृश्य को देख रहे हैं। बताइए, दृश्य कहां है? उस पहाड़ पर ? आसमान में? इत्मीनान से घटित हो रहा है? आपकी आंखों के पर्दे पर है? आपके भीतर ही न ?
    सद्गुरु, संस्थापक, शाम की सुरम्य वेला ईसा फाउंडेशन
    इच्छा साकार होने से क्यों इनकार कर रही है। प्रसन्न रहने के लिए आप सौ-सौ शर्ते लगा रहे हैं। पत्नी ऐसी होनी चाहिए। मेरा बच्चा वैसा होना चाहिए। इस प्रकार की सैकड़ों शर्ते लगाते जाएंगे तो आपका आनंद किसी दूसरे के नियंत्रण में चला जाएगा। अगर आप आनंद में रहेंगे और प्रेमपूर्वक बरतेंगे तो अपने आसपास के लोगों को प्रसन्न रख सकेंगे। यदि आप दुख में, मायूसी में डूबे रहेंगे तो अपने इर्द-गिर्द रहने वालों की खुशियों को भी बिगाड़ देंगे।
    ध्यान दीजिए, आपकी इच्छा दरअसल कहाँ अपनी जड़ जमाए हुए हैं?
    आपने सोचा था, शादी हो जाए तो खुशी मिलेगी। शादी हुई। फिर ख्याल आया बच्चे सोचकर बताइए। इस दृश्य का अनुभव कहां होने पर ही जीवन पूर्ण होगा, खुशी उसी में है। खुशी से जीना है, यही लालसा तो आपको उसका बिंब गिरता है और दिमाग को सूचना सभी इच्छाओं के मूल में छिपी हुई है। आपने भेजता है। आपके अनुभव में अब पहाड़ कहां जो मांगा, वह तो मिल गया। लेकिन संतोष के बिना आगे.... और आगे... वो इच्छा एक से दूसरी चीज की ओर लपकती जा रही है। ऐस क्यों? गलती कहां हुई? क्या यह आपकी त्रुटि है या इच्छा को ?
    4 min
  • Thought for day
    (21) सबसे बेहतर नशा प्रेम का है ।
    (22) समाज के निमय दौलत पर निर्भर करते है ।
    (23) " स्त्री " भगवान है ।
    (24) आपका जीवन एक फिल्म की तरह होता है जिसमें आप अकेले ही अलग - अलग तरह के किरदार निभाते चले जाते है ।
    (25) भूतकाल ( Past ) ही भविष्य काल ( Future ) की भविष्यवाणी करता है ।
    (26) मेरा मानना है " एक Married couple को तब तक बच्चे पैदा करने का विचार नहीं करना चाहिए , जबतक वह उसे एक बेहतर जीवन देने कि परिस्थिति ना हो "
    (27) भीड़ बच्चों की नही , संस्कारों की होनी चाहिए ।
    (28) आपके साथ अच्छा हो या बुरा अगर आप को ऐसा होने का कारण जानना है तो अपने भूतकाल को टटोलिये ।
    (29) विकास कभी भी " पूर्ण " नहीं हो सकता , यह हमेशा विकासशील ही रहेगा ।
    (30) इतिहास अच्छा हो या बुरा उस पर सवाल उठाने की जगह , उससे सीखा जाना चाहिए ।
    (31) सफलता की कोई तय परिभाषा नही है यह तो समय और जगह के हिसाब से बदलती रहती है ।
    (32) मेरे अनुसार इंसान की बहुत सारी गलतियों मे से एक बड़ी गलती " धर्म " है ।
    (33) मेरा मानना है
    " जो व्यक्ति दूरगामी नहीं होता है वह अपने आप को केवल धोखा दे रहा है कयोंकि आपके जीवन का हर दिन एक दांव की तरह है जो खुद दूरगामी परिणामों पर निर्भर है "
    (34) राजनीति मे धर्म का कोई काम नहीं और धर्म मे राजनीति का...
    (35) जब आपका मन किसी के लिये लिए डरना शुरू कर दे , तो यह मान लिया जाना चाहिए की आपको उससे प्रेम हो गया है ।
    (36) अभी भी बहुत कुछ खोजा जाना बाकी है ।
    (37) मेरा मानना है...
    " हर व्यक्ति सबसे बड़ी वह सबसे पहली प्राथमिकता , एक अच्छा इंसान बनने की होनी चाहिए "
    (38) यह दुनिया कितनी भी बदल कयों न जाये पर प्रेम की प्ररीक्षा हर युग मे होगी ।
    (39) " अधिकता " पतन का कारण है ।
    (40) आप माने या ना माने पर आपकी सफलता आपके सफर के महत्व को कम कर देती है ।
    (41) बुद्धि के विकास का एक ही तरीका है - " पढ़ना "
    (42) " मैंने इसांन की ऐसी लाचारी कभी ना देखी
    जो चीज सबसे ज्यादा थी
    उसके लिये घुट - घुट कर मरता रहा "
    (43) मेरा मानना है...
    " इसांन कभी भी स्वतंत्र नही रह सकता "
    (44) जहाँ डर वहाँ अंधविश्वास है और जहाँ अंधविश्वास वहाँ तो निश्चित ही डर होगा ।
    (45) मेरे अनुसार " जब कोई इंसान अपने से अधिक सफल इंसान को देखता है तो उसका दुःख बढता है और जब वह अपने से कम सफल या असफल इंसान को देखता है तो वह खुश होता है पर जो इंसान इन दोनों अवस्था मे स्थिर होता है वह मन से संत है "
    (46) जहाँ ज्ञान है , वहाँ स्थिरता है ।
    (47) " लिखा गलत हो सकता है पर मिट नहीं सकता "
    (48) लिखना , सुकून देता है ।
    4 min

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