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  • Power of Positivity ( Part - 8 )
    पावर ऑफ पॉजिटिविटी
    सकारात्मक लोगों की जिंदगी जल्द पटरी पर आ जाती है
    अमेरिका में 9/11 के आतंकी हमले के बाद किए गए राष्ट्रीय सर्वेक्षण में सामने आया था कि कई दिनों तक हर अमेरिकी डर, गुस्से और में तनाव में था। इस हमले से चंद महीनों पहले शोध अध्ययन के लिए कुछ छात्रों का रेजिलियंस लेवल मापा गया। मतलब विपरीत परिस्थितियों से उबरने की उनकी क्षमता देखी गई। इस हमले के बाद दोबारा उन्हीं छात्रों का ये स्तर मापा गया। कुछ ने बताया कि उन्हें हवाई यात्रा करने से डर लग रहा है, तो किसी ने खुलकर तनाव को स्वीकार किया। इस शोध में सामने आया कि हमले के बाद तो सभी में तनाव का स्तर लगभग एक-सा था, लेकिन जिनको रेजिलियंस लेकल ज्यादा था, उनकी जिंदगी जल्दी पटरी पर आ गई। इन लोगों में मुख्य अंतर सकारात्मकता का था। यही उनकी सफलता का राज था। ऐसा नहीं है कि अंदर से खुशमिजाज लोगों को तनाव या दुख की अनुभूति नहीं होती। लेकिन वे जल्दी उबर जाते हैं। वहीं कुछ लोग तनाव या कफी सकारात्मकता भूल
    जाते हैं। सवाल है कि क्या तकलीफ से दी उबरने की इस क्षमता को बढ़ाया जा सकता है? रेजिलियंस एक प्रक्रिया है और ये समय के साथ बढ़ती है। हमारी सकारात्मक सोच इसे बढ़ाने में मदद करती है। इसे पाने के लिए चंद उपाय करने होंगे। दिन में कुछ मिनट अपने आसपास की सकारात्मकता पर केंद्रित करें। शोध कहते हैं. कि इस तरह की आदत से तीन सप्ताह में दिमाग कमात्मकता खोजने का एक पैटर्न विकसित कर लेता है। अपने अंदर कुछ अच्छी आदते विकसित करें। इसकी तौर पर अभ्यास करके बढ़ाया जा सकता है।
    3 min
  • स्टीफन के विवेकपूर्ण विचार ( Audio book summary )
    शांति के सूत्र
    किसी चीज में शामिल हुए बिना सुधार नामुमकिन है
    प्रबंधन का सिद्धांत अपनी जिम्मेदारियों और सौंपे गए कार्य पर ध्यान केंद्रित करने पर आधारित है, चाहे वे जो भी हों। आप अपने स्टीफन आर कवी कर्तव्य पर इस विख्यात लेखक तरह केंद्रित रहें कि उसका दायरा व्यापक हो जाए- अर्थात् आपसे जितनी आशा की जाती है उससे अधिक काम करें। उदाहरण के तौर पर, एक पति होने के नाते आप अपनी पत्नी के लिए एक उदार व समझदार साथी बनने, बच्चों के लिए आदर्श पिता बनने की जिम्मेदारी पर स्वयं को केंद्रित करें। किसी परिस्थिति को बेहतर बनाने के लिए पहले आपको बेहतर बनना होगा। सामने वाले का दृष्टिकोण बदलने के लिए आपको अपना दृष्किोण बदलना होगा। अधिक आजादी पाने के लिए आपको ज्यादा
    जिम्मेदार और अनुशासित बनना होगा। बच्चों को आज्ञाकारी बनाने के लिए अभिभावकों के रूप में आपको कुछ नियमों सिद्धांतों का पालन करना होगा। टूटे हुए रिश्तों को जोड़ने के लिए पहले हमें अपने हृदय में झांककर अपनी जिम्मेदारियों व गलतियों को खोजना होगा। एक ओर खड़े होकर दूसरों की कमजोरियों की तरफ इशारा करना आसान होता है। ऐसा करके हम सिर्फ अपने अहंकार की पूर्ति करते हैं और स्वयं को सही ठहराते हैं। हम हमारी भावनाएं नहीं हैं। हम हमारी मनोदशा नहीं हैं। हम हमारे विचार भी नहीं हैं... आत्म-बोध के द्वारा हम यह परीक्षण भी कर सकते हैं कि हम स्वय को कैसे 'देखते हैं किसी चीज में शामिल हुए बिना समर्पण की भावना नहीं आती है। इस बात को याद कर लें, इसे लिख लें, इस पर निशान लगा लें. इसके नीचे रेखा खींच लें शामिल नहीं होंगे तो समर्पण नहीं आएगा।
    3 min
  • POWER OF POSITIVITY ( PART - 7 )
    दिमाग में बाद के लिए कुछ न रखें, उम्मीद भरे सिग्नल देते रहें
    प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक विलियम जेम्स का कहना था, किसी भी शंका भरे काम की शुरुआत में हमारा विश्वास वह चीज है, जो उस काम में हमें सफलता दिलाती है। विश्वास करना सीखना सबसे महत्वपूर्ण है। यही किसी भी काम में सफलता हासिल करने के लिए मूलभूत तत्व है। जब आप सर्वश्रेष्ठ की उम्मीद करते हैं तो अपने मस्तिष्क में एक चुंबकीय शक्ति उत्पन्न करते हैं, जो आकर्षण के नियम के अनुसार सर्वश्रेष्ठ को आपकी ओर आकर्षित करती है।
    सर्वश्रेष्ठ की उम्मीद करने का मतलब है कि आप अपने पूरे दिल से किसी चीज को हासिल करने की कोशिश करते हैं। लोग जीवन में इसलिए असफल नहीं होते क्योंकि वे पूरे दिल से काम नहीं करते। उन्हें पूरे दिल से सफलता की उम्मीद नहीं होती। दूसरे शब्दों में कहें तो आप जो भी कर रहे हों, उसमें समर्पण भाव से अपने आपको झोंक दें। कुछ भी बचाकर न रखें। एक प्रसिद्ध कनाडायी एथलेटिक कोच एस पर्सावल कहते
    हैं कि ज्यादातर लोग चाहे वे एथलीट हों या ना हों, वे कुछ न कुछ रिजर्व में रखते हैं। वे समय आने पर अपना शत-प्रतिशत नहीं देते। इसके चलते ही सफलता से वंचित रह जाते हैं। शोध से पता चलता है कि विचार भी हमारे क्रियाकलापों की ही तरह दिमाग को निर्देश देते हैं। फिर ये मानसिक छवियों मस्तिष्क में कई प्रक्रियाओं जैसे ध्यान, धारणा, योजना और स्मृति आदि को प्रभावित करती हैं। मतलब अगर सकारात्मक रहकर विश्वास से कल्पनाएं की जाएं, तो दिमाग को उस तरह के निर्देश मिलना शुरू हो जाते हैं। सकारात्मक सोच की शक्ति किताब से
    3 min
  • Power of Postivity ( Part - 6 )
    अच्छे विचारों में अपनी ऊर्जा खर्च करें
    सकारात्मक सोच से सफलता का संबंध एनर्जी यानी ऊर्जा से है। भौतिकी के अनुसार संसार में केवल दो ही तत्व हैं: एक है ऊर्जा और दूसरा है पदार्थ इन्हीं की अंतःक्रिया से यह संसार बना है। जिस तरह फेंगशुई के सिद्धांतों पर चलकर घर से नकारात्मक ऊर्जा हटाते हैं, सकारात्मक सोच भी उसी फेंगशुई की तरह है। पॉजिटिव एनर्जी ज्यादा होगी, तो शरीर में लाभदायक रसायनों का स्राव होगा, जिससे शरीर की इम्यूनिटी भी मजबूत होगी।
    मस्तिष्क सबसे ज्यादा ऊर्जा का उपयोग करता है। ये ऊर्जा को विचारों या संवेगों में बदलता है। दिमाग में हर दिन लगभग 60 हजार विचार आते हैं, इसलिए विचारों में हमारी बहुत सारी ऊर्जा खर्च होती है। गौर करने वाली है कि अगर विचार सकारात्मक हैं, तो ऊर्जा सकारात्मक रूप धारण कर लेती है और नहीं तो नकारात्मक। फिर हमारा ऊर्जावान विचार अपनी समतुल्य वस्तु
    आकर्षित करता है। जैसा नेपोलियन हिल ने कहा था, 'विचार वस्तु बन जाता है।'
    अधिकांश लोगों को पता भी नहीं होता कि उनकी ज्यादातर मुसीबतों का कारण वे खुद है। गुलाब के पौधे को बड़ा करने के लिए देखभाल करनी होती है, जबकि खरपतवार बिना किसी मेहनत के बड़ी हो जाती है। इसी तरह नकारात्मक सोच के लिए मेहनत नहीं करनी पड़ी, वहीं सकारात्मकता के लिए हर दिन कोशिश करनी पड़ती है।
    3 min
  • Vijay ka Marg Kaise Paye ( Audio book summary )
    अपना विश्लेषण करना ही जीत का रास्ता है
    विजय के मनोविज्ञान को प्रयोग करना सीखें। कुछ लोग सुझाते हैं, 'हार की बात कभी मत करो। सबसे पहले अपनी और उसके कारणों परमहंस योगानंद का विश् आध्यात्मिक गुरु करो, उस अनुभव से लाभ उठाओ, और फिर उसके सम्पूर्ण विचार को मन से निकाल दो। जो कोशिश करता रहता है, और अंतर में अपराजित है, वही अनेक बार हार कर भी विजयी है। संसार चाहे उसे असफल मान भी ले, परन्तु उसने अपने मन में यदि हार नहीं मानी है, तो आज नहीं तो कल वो लक्ष्य जरूर पा लेगा।
    लाखों लोग कभी खुद का विश्लेषण नहीं करते। मानसिक रूप से वे अपने वातावरण की फैक्ट्री के मैकेनिकल प्रोडक्ट होते हैं, नाश्ता,
    दोपहर का खाना, रात का खाना, काम करना और सोना, मनोरंजन के लिए इधर-उधर जाना, बस इन्ही चीजों में उलझे हुए होते हैं। वे नहीं जानते कि ये क्या और क्यों तलाश रहे हैं, न ये जानते हैं कि क्यों उन्हें कभी पूर्ण प्रसन्नता और स्थायी संतुष्टि का एहसास नहीं होता। आत्म-विश्लेषण से बचकर, लोग वातावरण के मुताबिक रोबोट बने रहते हैं। सच्चा आत्म-विश्लेषण प्रगति की सबसे बड़ी कला है।
    आपकी अंतरात्मा ही आपका न्यायाधीश होती है। अपने विचारों की पंच बनने दें और स्वयं प्रतिवादी बनें। प्रतिदिन अपने आप की यह परीक्षा लें और आप देखेंगे कि जितनी बार आप अपनी अंतरात्मा से दंडित होते हैं, जितनी बार स्वयं को अच्छा बनने की, अपने दिव्य स्वरूप के अनुसार व्यवहार करने की आज्ञा देते हैं और उसका पाल करते हैं। उतनी ही बार आप विजयी होते हैं। विजय का मार्ग कैसे
    पाएँ किताब से साभार
    3 min
  • Power of Positivity ( Part - 5 )
    सकारात्मक रहकर तेजी से बदलती हैं शरीर की कोशिकाएं
    हम लगातार बदलते रहते हैं। ना सिर्फ बाहरी नौर पर, बल्कि अंदरुनी तौर पर भी आप जस 'मैं' को जानते हैं, वह भीतरी तौर पर ल-प्रतिपल बदलती खरबों कोशिकाओं का तला है। इन सेल्स में से कुछ सप्ताह भर जीवित रहती हैं, तो कुछ महीनों नई सेल्स का निर्माण शरीर के अंग पर निर्भर करता है। स्ट बड्स तो कुछ घंटों तक ही रहती हैं। इट ब्लड सेल्स दस दिन रहती हैं। यहां तक के हड्डियां भी बार-बार नए सिरे से बनती "। जब तक आप जीवित रहते हैं, ये चक्र चलता रहता है।
    वैज्ञानिकों के अनुसार हम अपनी एक कीसदी कोशिकाएं रोज बदलते हैं, मतलब हीने में 30 फीसदी। सेल्स को इस तरह से खें तो लगभग तीन महीने बाद आप बिल्कुल ए होते हैं। ये भी इत्तेफाक है कि किसी नई बादत को अपनाने या लाइफस्टाइल बदलने तीन महीने का समय लगता है। पहले ज्ञानिक मानते थे कि दिमाग की सेल्स नहीं दलती। लेकिन दिमाग की सेल्स भी बदलती
    हैं, ये निर्भर करता है कि आप क्या काम कर रहे हैं और कितने सकारात्मक हैं। आरामदायक जीवनशैली सेल्स की खराब होने की गति को बढ़ा देती है तो सक्रिय जीवनशैली सेल्स को तेजी से बदलती है। सायकोलॉजी बुलेटिन में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक हमारी भावनाएं सेल्स के लिए संकेतक का काम करती हैं। जहां नकारात्मकता सेल्स खराब करने का संकेत देती है, तो सकारात्मकता सेल्स की ग्रोथ अच्छी रखने का इशारा करती है। इस तरह सकारात्मक रहकर आप स्वस्थ जीवन बिता सकते हैं।
    3 min
  • सदुपदेश ( Audiobook summary ) Part - 2
    किताबें पढ़ने का लाभ तभी है, जब उनका सार समझा जाए
    एक अनंत जल स्रोत की कल्पना करिए। उसमें हर जगह पानी है। इस पानी में पानी में भरा हुआ एक बर्तन रख दें। अब बर्तन के अंदर पानी है और बाहर भी पानी है। बर्तन की वजह से लगता है पानी दो भागों में बंट गया है। इंसान बर्तन की महान संत व विचारक वजह से एक अंदर और बाहर का अनुभव करने लगते हैं। इंसान के अंदर जब तक 'मैं का भाव रहेगा, ऐसा ही अनुभव होता रहेगा, जब 'मैं गायब हो जाता है तो पानी एक महसूस होने लगता है। ये बर्तन ही में या अहम
    रामकृष्ण परमहंस
    किताबें या ग्रंथ पढ़ना कई बार लाभ से ज्यादा नुकसान करते हैं। जरूरी बात है उनके सार को जानना, समझना। उसके बाद फिर किताबों की जरूरत नहीं रह जाती है। ये जरूरी है कि ग्रंथों का सार समझकर में
    या अहम मिट जाए। उन्हें सिर्फ दिखाने के लिए यांचना हितकर नहीं होता। उनके गर्म को समझना बेहद जरूरी है।
    जब तक मधुमक्खी फूल की पंड़ियों से बाहर है और उसने पराग के मोठेपन को नहीं चखा है, वो फूल के चारों ओर करती हुई मंडराती रहती। के अंदर आ जाती है, तो शांत बैठकर पराम पीने का आनंद लेती है। इसी प्रकार जब तक इंसान मत और सिद्धांतों को लेकर बहस और झगड़ा करता रहता है, उसने सच्चे विश्वास के अमृत को नहीं चखा है। जब उसे ईश्वरीय आनंद अमृत का स्वाद मिल जाता है, वो चुप और शांति से भरपूर हो जाता है।
    कम्पस की चुंबकीय सुई हमेशा उत्तर दिशा की ओर इशारा करती है और इसकी वजह से, पानी का जहाज आगे बढ़ते हुए अपनी दिशा से नहीं भटकता। इसी प्रकार जब तक व्यक्ति का हृदय ईश्वर में लगा रहता है, जो सामारिक माया के समुद्र में भटकने से बच
    3 min

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