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  • You Must Read
    • पावर ऑफ पॉजिटिव थिंकिंग
    साहस से ही मजबूत इरादे बन सकते हैं
    अपनी योग्यता पर विश्वास करना ही साहस है। आपका अपने आप में विश्वास ही आपके सपनों को हकीकत में बदलता है। साहस विपरीत परिस्थितियों का मुकाबला करना सिखाता है। भय से मुकाबला ही साहस है। साहस से ही पता चलता है कि अब एक मजबूत इरादा बनाना है।
    • इन्फ्लूएंस
    एक की प्रशंसा से कई प्रोत्साहित होंगे
    दूसरों की प्रशंसा पाने में खुशी मिलती है। यदि आप लोगों के कार्य की प्रशंसा करते हैं तो आप उन्हें ज्यादा काम करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। विशिष्ट कार्यों की प्रशंसा करें। लोगों को बताएं कि उन्होंने जो काम किया वो क्यों अच्छा था। एक की प्रशंसा करने से कई लोग प्रोत्साहित होंगे।
    • विनिंग बॉडी लैंग्वेज शारीरिक हाव-भाव भावनाएं दिखाते हैं
    जिस तरह एक तस्वीर में हजारों शब्द छिपे होते हैं उसी तरह आपके शारीरिक हाव-भाव बहुत कुछ कहते हैं। कई बार आप हाव-भाव के जरिए मन में छिपी सच्ची भावनाएं भी दिखा देते हैं। आप जिस तरह बात करते हैं या चलते हैं, दुनिया को अपने बारे में बहुत सारी जानकारियां देते हैं।
    • यू कैन हील यॉरसेल्फ माफ करने से मन को शांति मिलती है
    लोगों को लगता है कि माफ करके वो व्यक्ति के उस गलत व्यवहार को मान्यता देते हैं, जो उनकी नाराजगी का कारण था। वो सोचते हैं माफ करके उसे समर्थन दे रहे हैं। दरअसल माफ करना तो बहुत ही स्वार्थी काम है। इसका वास्ता आपके अपने मानसिक संतुलन और मन की शांति से होता है ।
    3 min
  • No Excuses!: The Power of Self-Discipline ( Audiobook summary )
    आपका आत्मसम्मान आत्मछवि से तय होता है है
    एक नजरिए से देखा जाए तो हमें 85 फीसदी आनंद दूसरे लोगों के साथ सुखद संबंधों से मिलता है। दुर्भाग्य से, 85% दुख भी दूसरे लोगों से ही मिलते हैं। ब्रायन ट्रेसी बेस्ट सेलिंग ऑथर लोक व्यवहार उत्कृष्ट बनना जरूरी है। अच्छी बात ये है कि यह योग्यता सीखी जा सकती है। शर्त सिर्फ इतनी है कि आपको भी वैसा ही व्यवहार करना होगा, जैसा दूसरे लोकप्रिय लोग करते हैं।
    मनोवैज्ञानिक हमें बताते हैं कि हम जो भी कार्य करते हैं, वह या तो अपने आत्म-सम्मान को बढ़ाने के लिए करते हैं या दूसरों से इसकी रक्षा करने के लिए करते हैं। हर व्यक्ति अपनी व्यक्तिगत महत्ता के एहसास के बारे में बहुत संवेदनशील होता है। आत्म- सम्मान का अर्थ यह है कि आप अपने बारे में कैसा महसूस करते हैं, खुद को कितना पसंद करते हैं। आत्म-सम्मान काफी हद तक आपकी आत्म-छवि
    से तय होता है। आपके आत्मसम्मान के तीन हिस्से हैं, जो एक-दूसरे को स्पर्श करते हैं।
    1. आत्म-छवि का पहला हिस्सा यह है कि आप खुद को कैसे देखते हैं। इससे काफी हद तक चलने, बोलने, व्यवहार करने व दूसरों के साथ करने का तरीका तय होता है।
    2. आत्म छवि का दूसरा हिस्सा यह है कि आपके हिसाब से दूसरे लोग आपको किस तरह देखते हैं। यदि आप सोचते हैं कि दूसरे लोग आपको पसंद करते हैं, तो आप खुद को सकारात्मक अंदाज में देखते हैं।
    3. आत्म-छवि का तीसरा हिस्सा यह है कि लोग वास्तव में आपको किस तरह देखते हैं और व्यवहार करते हैं। यदि आप स्वयं को आम आदमी मानते हैं और कुछ लोग आपसे मिलने पर ऐसा व्यवहार करते हैं जैसे आप मूल्यवान और महत्वपूर्ण हों, तो इसका आपकी आत्म-छवि पर सकारात्मक प्रभाव होता है। आप खुद को पहले से ज्यादा यादा पसंद करने और महत्व देने लगते हैं।
    4 min
  • Oprah Winfrey (Motivational speech in hindi )
    जीवन में भावनाएं आपका सच्चा जीपीएस होती हैं
    सीखने के लिए इस दुनिया में
    बहुत सारे सबक हैं। मैं इस दुनिया को स्कूल मानती हूं और अपने जीवन को क्लासरूम कॉलेज पूरा करने के एक साल बाद मुझे बाल्तिमोर में शाम के 6 बजे का न्यूज शो एक और एंकर के साथ मिलकर होस्ट करने के लिए कहा गया। मेरे प्रोड्यूसर्स ने मुझे अपना नाम बदलने के लिए कहा। अपना लुक्स बदलने के लिए भी कहा गया। लेकिन सबसे ज्यादा बुरा ये था कि मुझे दूसरों के दुखों को न्यूज के रूप में पढ़ने में तकलीफ होती थी। मैं स्क्रिप्ट से बंधी नहीं रह पाती थी। आठ महीने में ही मुझसे वह काम वापस ले लिया गया, लेकिन चूंकि अनुबंध था, तो उन्होंने मुझे नौकरी से निकालने के बजाय एक टॉक शो दे दिया।
    मुझे जब वह शो मिला, तो लगा कि घर आ गई हूं। जब आप वह काम करने लगते हैं, जो वाकई करना चाहते हैं, तब सबकुछ सही लगने लगता है। पैसे की परवाह न करते हुए हर दिन बोनस की तरह होता है। भावनाएं वाकई जीवन में आपको राह दिखाने वाला सच्चा जीपीएस होती हैं। आप कब और क्या करना चाहते हैं और क्या नहीं, आपको भावनात्मक रूप से गाइड करने वाला सिस्टम बता देगा तरीका ये है कि अपना इंगो दूर रखें और मन की बात सुनना शुरू कर दें। मेरे जीवन का हर सही फैसला मेरे अंदर से आया है। दिल से निकला है और हर गलत निर्णय अपने दिल की आवाज अनसुनी करने के कारण हुआ है।।
    अगर कुछ सही नहीं लगता, तो नि करें। सिर्फ यही एक सबक आपको जिंदगी में कई तकलीफों से बचाएगा। यहां तक कि किसी चीज पर संदेह भी है, तो उसे न कहें। जब आप अपने अंतर्मन की आवाज को जीवन का पथप्रदर्शक बनाएंगे तब न सिर्फ आपकी निजी जिंदगी बेहतर होंगी, बल्कि कामकाजी दुनिया की प्रतिस्पर्धा में भी आगे होंगे। डैनियल पिंक नाम के बेस्ट सेलर लेखक अपनी किताब ए होल न्यू माइंड में लिखते हैं कि हम नए दौर में प्रवेश कर रहे हैं। वह कहते हैं कि वह समय दूर नहीं जब सिर्फ तर्कपूर्ण, नियम-कायदे पर आधारित सोच ही मायने नहीं रखेगी। समानुभूति, खुशी, उद्देश्य और आंतरिक विशेषताएं उत्कृष्ट मूल्य साबित होंगे।
    ये विशेषताएं तब और निखरकर सामने आएंगी जब आप जिस काम को चाहते हैं, वही करना शुरू कर दें, अपने काम में सबकुछ झाँक दें- अपनी विशेषज्ञता के साथ इमोशन भी। अगर वाकई उड़ना चाहते तो अपनी ताकत अपने जुनून के पीछे लगाएं। अपनी अंतर्मन की आवाज की कद्र करें। आप जिंदगी के आखिर में पैसों के साथ जीवन का अर्थ भी तो चाहते हैं। यही आपके जीवन को समृद्धशाली बनाता है। आप अपने चारों ओर ऐसे लोगों से घिरे रहना चाहते हैं, जिन पर आप भरोसा करें, जो आपकी कद्र करें। ऐसा तभी होगा जब आप अंदरूनी तौर पर 'अमीर' हो।
    4 min
  • Oprah Winfrey ( Motivational speech in English )
    Hello all of you are welcome once again in the original podcast, today we are once again present in front of you with a motivational speech in the best, so let's hear the motivational speech in this best .
    Emotions are your true GPS in life
    in this world to learn
    There are many lessons. I consider this world a school and a year after completing my life in classroom college, I was asked to host a 6 pm news show in Baltimore with another anchor. My producers asked me to change my name. He was also asked to change his looks. But the worst part was that I found it difficult to read the sufferings of others in the form of news. I could not stick to the script. I was taken back in eight months, but since there was a contract, they gave me a talk show instead of being fired.
    When I got that show, I felt that I have come home. When you start doing what you really want to do, then everything seems right. Every day is like a bonus regardless of the money. Emotions are indeed the true GPS guiding you in life. Your emotionally guiding system will tell you when and what you want to do and what not to do. The way is to put your ego away and start listening to your mind. Every right decision in my life has come from within me. It has originated from the heart and every wrong decision has been made because of not listening to the voice of our heart.
    If something doesn't feel right, don't do it. Only this one lesson will save you from many troubles in life. Even if you doubt something, don't say it. When you make your inner voice a guide in life, not only will your personal life be better, but you will also be ahead of the competition in the working world. Daniel Pink, the best-seller, writes in his book A Whole New Mind that we are entering a new era. He says that the time is not far when only logical, rule-based thinking will not matter. Empathy, happiness, purpose, and intrinsic characteristics will prove to be excellent values.
    These qualities will come to the fore when you start doing what you want to do, peeking into everything in your work – your expertise as well as emotion. If you really want to fly, put your strength behind your passion. Honor your inner voice. You want the meaning of life along with money at the end of life. This is what makes your life prosperous. You want to be surrounded by people who you trust, who appreciate you. This will happen only if you are 'rich' inside.
    3 min
  • Power of Positivity
    हालातों का सबसे बेहतर उपयोग ही खुशी की वजह बनती है
    खुशी और सकारात्मकता की तलाश हम सदियों से कर रहे हैं। आज के समय में खुशी के लिए लोग प्रेरक वक्ताओं और सेल्फ-हेल्प किताबों की ओर देखते हैं। लेकिन पहले के समय में दार्शनिक इन सवालों का जवाब देते थे। लेखिका एडिथ हॉल अपनी किताब में लिखती हैं कि कैसे प्राचीन दार्शनिक खासतौर पर अरस्तू खुशी के बारे में बताते थे। अरस्तू कहते थे कि अगर आप खुद को खुश और अच्छा बनाने का प्रशिक्षण देते रहते हैं, अपने सद्गुणों और कमियों पर काम करते हैं, तब आपको अहसास होगा कि खुशी दिमाग की ही एक अवस्था है। आप तभी आनंद में रह सकते हैं, जब अच्छा बने रहने के लिए लगातार कोशिश करेंगे। श्रिंक एंड सागा नामक किताब की लेखिका एंटोनियो मैकारो लिखती हैं कि हम अपने लिए खुद ही चुनाव करते हैं। ऐसे में खुशी या दुख का विकल्प आपके पास होता है। अक्सर ये भी सवाल पूछा जाता है कि दुख में खुशी की बात करना कितना सही है? इस पर लेखक विक्टर ई फ्रैंकल लिखते हैं कि किसी भी परिस्थिति का
    सबसे बेहतर उपयोग ही सबसे अधिक मायने रखता है। यानी हालात से सर्वोत्तम पाने की कोशिश। इसके लिए हमें तीन चीजें ध्यान रखनी चाहिए। पहला समस्याओं को सफलता और उपलब्धि में बदलना। अपराध बोध से सबक सीखकर खुद को बेहतर बनाने के लिए बदलना और जीवन की नश्वरता को जानते हुए अपने कामों के प्रति जिम्मेदारी का अहसास रखना। आशावाद किसी पर थोपा नहीं जा सकता न हो किसी को आशावादी बने रहने का आदेश दिया जा सकता है। पर खुशी के पीछे भागने से वह हासिल नहीं होती। यह स्वतः हो आपके जीवन में आती है। इसके लिए कोशिशें करते रहें।
    3 min
  • Thought for day
    (1) जब किसी देश कि जनता अपनी मूलभूत जरूरतों को छोड़कर सरकार कि जरूरतों के अनुसार सोचना शुरू कर दे तो यह मान लिया जाना चाहिए कि अब देश का पतन शुरू हो गया है ।
    (2) सफलता कुछ भी नहीं है केवल और केवल जीवन के साथ किया गया एक सफल प्रयोग है ।
    (3) कोई भी चीज कभी भी 100% सही और 100% गलत नहीं हो सकती ।
    (4) जीवन के सबसे बेहतरीन अनुभव केवल प्रकृति कि गोद मे ही लिये जा सकते
    है ।
    (5) मेरे अनुसार इस दुनिया कि सबसे खूबसूरत और बदसूरत चीज अगर कोई है तो वह केवल और केवल " शब्द " है ।
    (6) प्रेम वह ताकत है जो इसांन को इसांन बनाये रखती है ।
    (7) " समाज " वह है , जिसमें आप - अपने - आप को हमेशा टूटा हुआ पाते है ।
    (8) कोई भी चीज छोटी या बडी नही होती है बस यह तो हमारे देखने भर का
    नतीजा है ।
    (9) इस Universe मे वह सब है जो कभी मनुष्य कि कल्पना मे था , कल्पनाओं मे है और भविष्य मे मनुष्य कि कल्पनाओं मे होने वाला है ।
    (10) वह दिन दूर नहीं है जब इसांन , इसांन के लिये भगवान होगा ।
    (11) इस दुनिया मे तब तक शान्ति नहीं हो सकती जब तक इसांन , इसांन का दुश्मन है ।
    (12) यह Universe ,
    भगवान का एक खेल है जिसे इसांन का दिमाग शायद कभी नहीं समझ सकती है ।
    (13) मानव एक विकसित हो रही प्रजाति है और इस Universe मे मानव की तरह ही अल्पविकसित और अतिविकसित प्रजातियां भी है और यह Sequence ऐसे ही हमेशा चलता रहेगा ।
    (14) वह चीज जिसे इसांन हमेशा टूटने से बचाता है वह है उसकी " विचारधारा "
    (15) मेरा मानना है " इस दुनिया का सबसे बेहतरीन वक्त पढने मे गुजरता है "
    (16) मेरा मानना है " अच्छी किताबें पढने से आप के अंदर विश्वास का निर्माण होता है , विश्वास के निर्माण से आप का निर्माण होता है और आप के निर्माण से , कायों का निर्माण होता है और इन्ही कायों के निर्माण से आपकी सफलता का निर्माण होता है "
    (17) आप कि जीत तब तक नही हो सकती जब तक आप हारने वाले से कुछ सीख ना ले ।
    (18) जिस घर मे बुजुर्गों कि इज्ज़त नही , उस घर कि भी कही इज्ज़त नही ।
    (19) बुजुर्ग , जडों कि तरह होते है जिनकी मजबूती के सहारे परिवार का पेड़ खिलता है ।
    (20) नशा कोई खराब चीज नही है बस यह तो कारकों पर निर्भर करता है ।
    4 min
  • How to be worry free ( Audiobook summary )
    चिंताजनक हालातों से बाहर निकलना आसान है!
    अगर आप चिंता में डूबे रहेंगे, तो किसी भी काम में एकाग्रता हासिल नहीं कर पाएंगे। और एकाग्रता भंग होगी तो अंततः आपके जीवन में खुशी का अभाव रहेगा और तनाव व अवसाद बढ़ता जाएगा। सवाल है कि चिंता दूर करने किया जाए? इसे दूर करने की तीन अवस्थाएं हैं। पहला तो हर परिस्थिति का निर्भयता और ईमानदारी से विश्लेषण करना चाहिए और इस निर्णय पर पहुंचना चाहिए कि असफलता के कारण क्या अधिकतम अनिष्ट हो सकता है। दूसरा चरण है कि बुरे से बुरे का आकलन करने के बाद आप उसे आवश्यकतानुसार स्वीकार करने का दृष्टिकोण अपना सकते हैं। इसके फलस्वरूप एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण
    परिवर्तन होगा और तुरंत ही कान और एक तरह की शांति का अहसास होगा। और तीसरी अवस्था में आप शांत भाव से उस संभावित अनिष्ट का हल निकालने में जुट जाएंगे।
    इन मनोवैज्ञानिक विधियों का विश्लेषण करके आपको चिंता से निकलने का रास्ता मिलेगा। चिंता करने से सबसे ज्यादा निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होती है। व्यावहारिक मनोविज्ञान के जन्मदाता प्रो. विलियम्स जेम्स का कथन था कि अपनी स्थिति को जैसी है वैसी ही स्वेच्छा से स्वीकार कर लो। स्वीकार करना दुर्भाग्य के किसी परिणाम पर विजय पाने का पहला कदम है। चीनी दार्शनिक लिन युटांग ने कहा था कि स्वीकार करने से मन को एक असीम शांति मिलती है। स्वीकारने के बाद खोने को कुछ नहीं रह जाता। इसके बाद निर्णय लेने की क्षमता भी बेहतर हो जाती है।
    3 min
  • V.V.S Laxman ( 281 And Byound ) Audio book Summary
    - वीवीएस लक्ष्मण, पूर्व क्रिकेटर
    अपना कंफर्ट जोन तोड़कर बाहर आना उतना भी मुश्किल नहीं है
    भारत में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चार टेस्ट मैचों की श्रृंखला होने वाली थी। हम इससे पहले ऑस्ट्रेलिया की टीम से बुरी तरह हारे थे। जख्म हरे थे। हमारा चेन्नई में ट्रेनिंग कैंप था। गैरी कर्स्टन के साथ मेंटल हेल्थ कोच पैडी अपटन आए थे। कोच का ध्यान हम सबकी अपनी-अपनी भूमिकाएं तय करने की और था। स्किल्स निखारने पर बहुत ज्यादा जोर नहीं था। हमें पुराने ग्रुप से हटाकर अलग-अलग समूहों में बांट दिया गया। और अगले एक साल का विजन लिखने के लिए कहा गया। सवालों की एक सूची सौंपी गई। उनमें आम से प्रश्न थे कि आलोचना पर कैसे प्रतिक्रिया करेंगे। कोई प्रशंसा करेगा, तो कैसा महसूस होगा। क्या आप खेल के बीच आउट होने पर दबाव महसूस करते हैं।
    जाहिर तौर पर ये प्रश्नोत्तर अहसास कराने के लिए थे कि हम खुद को मोटिवेट कर सकते हैं या नहीं? या किसी बाहरी प्रेरणा की जरूरत है... हममें से अधिकांश लोगों को बाहर से किसी पुशअप की जरूरत होती है। अगर कोई पीठ ठोक दें, तो हम अच्छा प्रदर्शन करते हैं। हमें सिखाया गया कि अंदर से मोटिवेशन कैसे हासिल किया जाए। कैंप में एक दिन हम आउटिंग के लिए रिजॉर्ट गए। वहाँ सभी खिलाड़ियों को तीन बैच में बांट दिया गया। हर टीम को 12 मिनट की एक असली फिल्म बनानी थी। वहां सबकुछ अपलब्ध
    था- कैमरामैन, मेकअप आर्टिस्ट, तकनीकी लोग हमारे ग्रुप में राहुल, सहवाग, भज्जी, वेंकटेश प्रसाद और मुनाफ पटेल थे। एक प में सचिन, धोनी और दूसरे साथी थी। स्क्रिप्ट लिखने, शूट करने, एडिट करने के लिए तीन घंटे का वक्त था। हमने फिल्म बनाई- सिंग इज किंग सचिन की टीम ने शोले और एक टीम ने रॉक ऑन बनाई। आखिर में अवॉर्ड फंक्शन भी हुआ। एक दृष्टि से देखें तो ये फन था! लेकिन दरअसल यह हमें अपने कंफर्ट जोन से बाहर निकालने और अपनी विचार प्रक्रिया बदलने की कवायद थी। आप जब कोई काम कर गुजरे, उसके बाद अहसास होता है कि कंफर्ट जोन से बाहर आना उतना कठिन नहीं था, जितना आप उसे मानकर चलते हैं।
    अच्छे क्रिकेटर के साथ बेहतर इंसान बनने के लिए मैं हमेशा कोशिश करता रहता है। इस दिशा में जो भी प्रयास हो सके, करता हूँ। 1999 में मेरी मानसिक स्थिति अच्छी नहीं थी। उस स्थिति से बाहर आने के लिए एनएलपी कार्यक्रम में हिस्सा लिया। काफी ज्यादा प्रेरक किताबें पढ़ी और अंततः उस स्थिति से बाहर आया। मैं हर खिलाड़ी को टोनी रॉबिन्सन की किताब 'अवेकन द जाइंट विदइन पढ़ने के लिए कहता हूं। चीजों को विजुलाइज करते देखता हूं। इससे मुझे ताकत मिलती है।
    3 min
  • Zakir Hussain ( Musician Instruments Tabla )
    Birth name
    Zakir Hussain
    Born
    9 March 1951 (age 70)
    Mumbai, Maharashtra, India
    Genres
    Hindustani classical music, jazz fusion, world music
    Occupation(s)
    Musician
    Instruments
    Tabla
    Years active
    1963–present
    Labels
    HMV
    Associated acts
    Remember Shakti
    3 min
  • Sadhguru
    अक्सर व पूछा जाता है कि क्या गुरु की सहायता के बिना आध्यात्मिक विकास संभव है? अगर मैं आपको एक जलती हुई टॉर्च दे दूं, तब भी शायद आप अपना घर न खोज पाएं। टॉर्च आपको गड्ढे में गिरने से बचाती है, पर आप इसका उपयोग कैसे करते हैं, यह पूरी तरह से आप पर है। तो, प्रकाश का सबसे अच्छा स्रोत क्या है?
    जीवन में गुरु का होना हमेशा बहुत जरूरी बताया जाता है, क्योंकि गुरु के बिना खुद को बदलना बहुत मुश्किल है। क्योंकि जो चीजें आप जानते हैं उन्हें पाने के लिए काम करना संभव है, पर आप खुद को किसी ऐसी चीज में कैसे बदल सकते हैं, जिसे आप जानते ही नहीं हैं? मैं इस संभावना को पूरी तरह से खारिज नहीं कर रहा हूं। बात सिर्फ यह है कि ज्यादातर लोगों के लिए, यह एक बहुत छोटी संभावना है।
    गुरु कोई व्यक्ति नहीं है, बल्कि एक संभावना है। शायद सभी की
    उस व्यक्ति तक पहुंच न हो, पर जो वाकई इच्छुक है, उसकी इस ऊर्जा तक पहुंच हमेशा बनी रहती है। मैं जिन लोग से मिल चुका हूं, उनसे ज्यादा मैंने ऐसे लोगों को दीक्षा दी है, जिनसे मैं कभी नहीं मिला। जब भी किसी का दिल सत्य को जानने के लिए रोता है, तो मैं हमेशा उसकी मदद के लिए मौजूद रहता हूं।
    गुरु के साथ रहना कभी भी आसान नहीं होता, क्योंकि वह आपकी विचारधाराओं को तोड़ता रहता है। इस संभावना तक पहुंच केवल उस इच्छा के कारण होती है, जो शायद किसी के अंदर हो। गौतम बुद्ध ने इसे बहुत ही सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया है। जीवनभर गौतम बुद्ध के साथ लगातार रहने वाले आनंदतीर्थ अंत में भी अज्ञानी रहे। जब लोगों ने पूछा, 'यह आदमी हर समय आपके साथ रहता है। इसे ज्ञान क्यों नहीं मिला?' जवाब में, गौतम ने कहा, 'क्या एक चम्मच सूप का स्वाद ले सकता है?' यही सब कुछ है।
    4 min

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