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भारत का 80 फ़ीसदी कृषक समुदाय छोटे किसानों का है जिन पर जलवायु परिवर्तन का सबसे अधिक असर पड़ने की आशंका है.
एक अनुमान के मुताबिक, कटाई के बाद फ़सलों के ख़राब होने से दैनिक आधार पर उन्हें लगभग 1 करोड़ 94 लाख डॉलर मूल्य की फ़सलों का रोज़ाना नुकसान होता है. इसका कारण भण्डारण के लिए बुनियादी ढाँचे और अच्छी कृषि तकनीक़ों की कमी, सीमित बाज़ार और अपर्याप्त इन्तज़ाम हैं.
इस समस्या के समाधान के लिये सायंस फ़ॉर सोसाइटी यानी S4S टैक्नॉलॉजी ने छोटे किसानों के फलों और सब्ज़ियों की प्रोसेसिंग यानी प्रसंसकरण के लिए ‘सोलर कंडक्शन ड्रायर्स’ (एससीडी) का सहारा लिया है.
सौर ऊर्जा से संचालित इस मशीन के ज़रिये कृषि-उत्पादन में नमी की मात्रा को कम किया जाता है ताकि किसान किसी भी रसायन का उपयोग किए बिना अपनी उपज को एक वर्ष तक संरक्षित कर सकें.
अपने इस समाधान के लिए हाल ही में S4S की सहसंस्थापक निधि पंत को संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के ‘यंग चैम्पियन्स ऑफ़ द अर्थ’ के पुरस्कार की अन्तिम सूची में जगह मिली है. हमारी सहयोगी अंशु शर्मा ने निधि से उनके इस प्रोजेक्ट के बारे में विस्तार से बात की.
21 अगस्त 2020 के इस बुलेटिन की सुर्ख़ियाँ...
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14 अगस्त 2020 के इस बुलेटिन की सुर्ख़ियाँ...
लेकिन अरबों डॉलर की वित्तीय मदद की दरकार
भोजन की किल्लत की आशंका के बीच राहत कार्य में तेज़ी
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युवा जलवायु कार्यकर्ता अर्चना सोरेंग से
पोलियो उन्मूलन अभियान फिर शुरू हुआ
भारत में ओडिषा राज्य की अर्चना सोरेंग दुनिया भर से चुने गए उन सात युवाओं में शामिल हैं जिन्हें महासचिव एंतोनियो गुटेरेश के पर्यावरण पर युवा सलाहकारों के समूह के लिये चुना गया है.
खड़िया जनजाति की अर्चना सोरेंग, ओडिषा के सुन्दरगढ़ ज़िले की रहने वाली हैं और वह टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज, मुंबई से रेग्युलेट्री गवर्नेंस में मास्टर्स ऑफ़ आर्ट्स की पढ़ाई के बाद, राज्य में अनुसन्धान अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं.
अर्चना सोरेंग, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तरों पर विभिन्न युवा संगठनों के साथ काम करते हुए, आदिवासी समुदायों के पारम्परिक ज्ञान और प्रथाओं को संरक्षित करके, उन्हें बढ़ावा देने में सक्रियता से हिस्सा लेती रही हैं.
यूएन न्यूज़ की अंशु शर्मा ने, पर्यावरण पर युवा सलाहकारों के समूह में शामिल होने पर, अर्चना सोरेंग के साथ एक ख़ास बातचीत में, जलवायु परिवर्तन से जुड़े मु्ददों पर उनकी राय जानने का प्रयास किया...
अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन यानि आईएलओ के सभी 187 सदस्य देशों ने दासता, देह व्यापार और तस्करी सहित बाल मज़दूरी के अन्य ख़राब रूपों से बच्चों की रक्षा करने वाली सन्धि की सार्वभौमिक पुष्टि कर दी है.
वर्ष 2021 को बाल मज़दूरी के अन्त के अन्तरराष्ट्रीय वर्ष के रूप में मनाए जाने की तैयारी है और इस दिशा में प्रगति के लिये यूएन एजेंसी जागरूकता प्रसार के प्रयासों में जुटी है.
7 अगस्त 2020 के इस बुलेटिन की सुर्ख़ियाँ...
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31 जुलाई 2020 के इस साप्ताहिक बुलेटिन में शामिल हैं...
17 जुलाई 2020 के साप्ताहिक बुलेटिन में शामिल हैं...
10 जुलाई 2020 के इस साप्ताहिक बुलेटिन में शामिल हैं...
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