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संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यूएनएफ़पीए) की एक ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि हर साल लाखों लड़कियों को ऐसी प्रथाओं का सामना करना पड़ता है जिससे उन्हें शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से नुक़सान पहुँचता है, और उनके परिवारों, दोस्तों व समुदायों को इस स्थिति की जानकारी होती है और उनकी सहमति भी.
पुत्र होने की इच्छा यानि पुत्रों को प्राथमिकता और लिंग-पक्षपातपूर्ण सैक्स चयन के परिणामस्वरूप दुनिया भर में 14 करोड़ 20 लाख से ज़्यादा लड़कियाँ गायब हो गई हैं.
भारत में, गर्भ में लिंग पक्षपाती सैक्स चयन (लड़कियों के बजाय लड़कों को वरीयता) के चलन की वजह से वर्ष 2013-17 के बीच, प्रत्येक वर्ष लगभग 4 लाख 60 हज़ार लड़कियाँ जन्म से पहले ही मौत का शिकार हो गईं. लिंग-पक्षपाती चयन के कारण केवल चीन (50%) और भारत (40%) में ही दुनियाभर के 90 प्रतिशत यानि कुल मिलाकर 1 करोड़ 20 लाख लड़कियों को जन्म से पहले ही मार देने के मामले होते हैं.
इस बारे में और जानकारी के लिए यूएन न्यूज़ हिन्दी की अंशु शर्मा ने भारत में यूएनएफ़पीए की लैंगिक मुद्दों पर राष्ट्रीय कार्यक्रम अधिकारी शोभना बोयेल से बातचीत की...
26 जून 2020 के साप्ताहिक बुलेटिन में शामिल हैं...
कोविड-19 महामारी दक्षिण एशिया क्षेत्र में भारत, पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान, बांग्लादेश सहित अन्य देशों में तेज़ी से फैल रही है जहाँ विश्व की क़रीब एक चौथाई आबादी रहती है.
इससे दक्षिण एशियाई देशों में बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में हुई प्रगति पर बुरा असर पड़ रहा है. मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने एक रिपोर्ट जारी की, जिसमें सभी देशों से तुरन्त कार्रवाई करने का आग्रह किया है.
इस रिपोर्ट के मुख्य तथ्यों के बारे में विस्तृत जानकारी के लिए यूएन हिंदी न्यूज़ कीअंशु शर्मा ने भारत में यूनीसेफ़ की प्रतिनिधि डॉक्टर यासमीन अली हक़ से बात की...
रोज़गार, आजीविकाओं और परिवारों पर कोविड महामारी का व्यापक असर,
भारत भी दो साल के लिए पहुँचा सुरक्षा परिषद में.
अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन और संयुक्त राष्ट्र बाल कोष ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि कोविड-19 महामारी के कारण लाखों बच्चों पर बाल मज़दूरी के गर्त में धँसने का ख़तरा मँडरा रहा है.
शुक्रवार को जारी ताज़ा यूएन रिपोर्ट दर्शाती है कि पिछले दो दशकों में बाल श्रम के क्षेत्र में हुई प्रगति के समक्ष सँकट पैदा हो गया है.
दिल्ली में यूएन न्यूज़ हिन्दी की अंशु शर्मा के साथ एक ख़ास बातचीत में अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन के भारत कार्यालय में नेशनल प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर रन्जीत प्रकाश ने बताया कि बाल श्रम की चुनौती से निपटने के लिए गुणवत्तापरक शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा की व्यवस्था को मज़बूत बनाया जाना अहम है.
12 जून 2020 के साप्ताहिक बुलेटिन में शामिल हैं.
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कुछ अन्य समाचार भी...
साल 2020 जैव-विविधता के लिए महत्वपूर्ण वर्ष है. इसे पहले से तय की गई जलवायु और जैव विविधता पर प्रमुख अन्तरराष्ट्रीय नीति बैठकों के कारण प्रकृति के लिए ‘सुपर-ईयर’ के रूप में देखा जा रहा है . आज प्रकृति हमें कार्रवाई के लिए एक मज़बूत संकेत भेज रही है, और ये सीख दे रही है कि अगर मनुष्य ने अपना रहन-सहन नहीं बदला, तो उसका अपना अस्तित्व ख़तरे में पड़ जाएगा. 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस पर कुछ ऐसे ही मुद्दों पर – यूएन न्यूज़ हिन्दी की अंशु शर्मा ने - भारत में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के प्रमुख, अतुल बगई से बातचीत की, और सबसे पहले यही पूछा कि इस साल पर्यावरण दिवस की थीम जैव विविधता रखने के पीछे क्या मक़सद है...
5 जून 2020 के साप्ताहिक बुलेटिन में शामिल हैं...
अमेरिका के मिनीयापोलिस में 25 मई को एक काले व्यक्ति जियॉर्ज फ्लॉयड की पुलिस हिरासत में मौत पर अनेक देशों में विरोध प्रदर्शन, नस्लवाद को जड़ से ख़त्म करने की पुकार,
संयुक्त राष्ट्र के स्वतन्त्र मानवाधिकार विशेषज्ञों द्वारा भारत सरकार से प्रवासी मज़दूरों की सुरक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश का तत्काल अनुपालन करने का आग्रह,
कोविड-19 महामारी से उबरने में केवल वैक्सीन का होना ही काफ़ी नहीं, ज़रूरत है वैश्विक एकजुटता और समझदारी की,
पर्यावरण सरंक्षण के लिए वैश्विक समुदाय को बदलना होगा अपना रास्ता, पर्यावरण दिवस की थीम – जैव विविधता के संरक्षण पर एक इंटरव्यू,
और
कोविड-19 महामारी में साइकिल साबित हो रही है किफ़ायती और असरदार वाहन.
भारत के महाराष्ट्र राज्य में मुंबई, ठाणे, रायगढ़ सहित तटवर्ती इलाक़ों के अलावा गुजरात के वलसाड, नवसारी, सूरत, भावनगर, भरुच ज़िलों, केंद्र शासित प्रदेश दादर नगर हवेली व दमन एवं दीव में भी निसर्ग तूफ़ान का असर दिखाई दिया.
हालांकि मुंबई पहुँचते हुए निसर्ग तूफ़ान की रफ़्तार धीमी हो गई और यह देश की वित्तीय राजधानी कहे जाने वाली मुंबई में बिना कोई नुक़सान किए गुज़र गया. शहर में कई जगहों पर पेड़ गिरे हैं लेकिन अभी तक ज़्यादा हानि की ख़बर नहीं है.
मुंबई में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) में आपदा प्रबंधन के तकनीकी विशेषज्ञ श्रीदत्त कामत ने यूएन न्यूज़ हिन्दी की अंशु शर्मा के साथ बातचीत में बताया कि यह चक्रवात महाराष्ट्र के रायगढ़ में 120 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से टकराया .
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