Ukti

Ukti

By Amandeep PanwarArtsPerforming Arts
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Ukti episodes

  • Meri sadhana
    मैं रात
    एक सफेद दीवार ताकते हुए
    सोच रहा था
    आने वाली चुनौतियों के बारें में;
    दीवार पर
    बन आ रहे थे फूल कभी
    कभी आ रहे थे
    आड़े-टेड़े रास्ते,
    कभी टपकता दीख रहा था
    शहद दरारों से,
    कभी उखड़े पेंट से भयावह शैतान झाँकता;
    फिर अचानक तुम दिखी,
    और रुक गई दौड़ती मेरी दृष्टि-
    चुनौतियाँ लगने लगी हिस्सा अभीष्ट का,
    और तुम साधना।
    1 min
  • Main aazad ho jaata hu
    मैं आज़ाद हो जाता हूँ,
    हर एक तुम्हारे
    सिद्ध-स्वर में घुल कर,
    बोली से व्यक्त
    कहानी सुन-सुन कर
    मैं आज़ाद हो जाता हूँ।
    शब्दों का
    कभी जाना नहीं था,
    की होता होगा इतना भी प्रभाव-
    तुम्हारे शब्दों को पढ़-पढ़ कर
    मैं आज़ाद हो जाता हूँ।
    अंधेरे में
    भयावह मन ने
    उचट-उचक कर
    जकड़ा जब कभी-
    आँखों की तुम्हारी
    रोशनी से सट-सट कर
    मैं आज़ाद हो जाता हूँ।
    धूप में प्रताड़ित,
    तन-जीवन, दिखें फिर भी
    सुशोभित फूल तुम्हें-
    तुम्हारे दृष्टिकोण की
    पत्तियों में छना
    सूर्य देख-देख कर
    मैं आज़ाद हो जाता हूँ।
    छोटे से जीवन की
    लंबि डगर
    पाने को जगत का
    अथाह अनुभव-
    तुम्हारे साथ चलने के
    सौभाग्य को पा-पाकर,
    मैं आज़ाद हो जाता हूँ।
    2 min
  • Tum mein dikhta hai weh jaadu
    मुझे, तुम में दिखता है वह जादू, जो तुम्हे सुबहो मैं दिखता है पाहाड़ो की। मुझे दिखती है तुम में वह रोशनी, जो तुम्हे दिखती है पाहाड़ो की चमचमाती रातों में। तुम सुबह, खुद करना महसूस
    और पाना की तुम खुद हो जादूगर भी; छड़ी की तरह घूमा अपने बालों को बांधते हुए बिस्तर से नीचे तुम रखना जब पहला कदम तो महसूस करना की एक लहर आ दौड़ेगी धरती के चहक जाने की तुम्हारे जादुई स्पर्श को पाकर, और फिर चश्मा लगाकर, देखना खिड़की में बाहर तुम्हारी अपनी जादूगरी के नज़ारे। -अमनदीप पँवार. वाचक: प्रीतिका जैन, Photograph by Preetika Jain
    1 min
  • Main surya banu
    मैं सूर्य बनु
    झाँकता पहाड़ों से
    किरणें मेरी महत्त्वाकांक्षाएं, कि उस ओर जो जमी है बर्फ
    पिघल
    उस पार खड़े है जो देवदार हरे
    छू जाए
    उनकी गहरी जड़ों को,
    कि उनकी आस न हो नीचे जाने की
    तलाश में जीवन मात्र के
    किन्तु बढ़ने की हो बराबर
    आकाश की ओर-
    जहाँ मैं मिलूँ उन्हें
    बाहें फैलाए। -अमनदीप पँवार, Episode photograph by Preetika Jain
    1 min
  • Tumhari shaam ki vah tasveer
    मैं तुम्हारी शाम की वह तस्वीर बनना चाहता हूँ, जिसको तुम रख लेना चाहो, संजोय अपने इस फ़ोन में; और कभी मैं बनना चाहता हूँ, वह  मनपसंद व्यंजन तुम्हारा, जिसके बारें में तुम
    बता-बता, चहक-चहक समझ लेती हो बनाने की विधी, पर अभी,  मैं हूँ  यह चश्मा तुम्हारा जिसको तुम. ऊपर उठाती हो बार-बार, ताकि मैं देख सकूँ, तुम्हारी गहरी आंखों से खूबसूरत यह दुनिया। -अमनदीप पँवार, Episode photograph by Preetika Jain
    1 min
  • Tumhe pasand hain hastshilp
    तुम्हे पसंद हैं हस्तशिल्प, मुझे दस्तकार- इसलिए क्योंकि तुम भी वही हो; अपनी बाहों-लहरों को जैसे हर कुछ क्षण किनारों पर भेज-भेज समंदर आकार देता रहता है आड़े-तिरछे पत्थरों को, वैसे ही तुम्हारी हर हँसी के साथ तुम्हारे गाल के हिलकोरे हर बार ऐसे छू जाते हैं हृदय को, जैसे कोई प्रीतिकर, धीरे-धीरे प्रतिनव निर्माण कर रहा हो किसी प्राचीन प्रतिमा का। -अमनदीप पँवार (12th March 2020), Episode photograph by Preetika Jain
    1 min
  • Tumse milne ke baad
    तुमसे मिलने के बाद, लौटते वक्त, ऐसा लगने लगता है, जैसे मैं, महका किसी मेंथा के खेत से वापस लौट आ रहा हूँ शहर की ओर; और फिर कुछ दिनों बाद, मेरे हृदय में, तुम्हारी बोई हुई हर जड़ कल्ले फोड़ने लगती हैं भीतर, जो ओज भरे पौधा बनने को बढ़ने लगते हैँ तुम्हारी ही ओर। इसमें प्रीतिकर-निरंतर सीचना होता है कईं बार हर उस पौधे को जिसको तुमने अपने हाथों से लगाया था; पर सोचो ज़रा क्या संभव है इनका बढ़ना बिना तुम्हारे मुस्कुराते सूर्य के बिना?
    -अमनदीप पँवार
    (19 March 2020), Episode photograph by Preetika Jain
    1 min
  • Introduction to Ukti

    Recollect all those surreal moments in your life when thoughts have beautifully captured your mind and sent you in a trance. And as they unfurl, dance and paint your heart with magic, that is when Ukti( utterance )splashes those myriad colours, through words on the canvas of life. Like a painter that spatters his imagination on a canvas with every colour of his pallette.


    I, Amandeep Panwar, bring you this podcast as a manifestation of those utterances of minds into short poems. The beautiful photographs for each episode will be captured by Preetika Jain. These photographs will help you understand the context of the poem in the episode.

    I hope you will enjoy our show and will stay connected with us on Instagram where our handle is @Ukti.1.

    2 min

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