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विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 से ऐहतियाती उपायों के मद्देनज़र तालाबंदी होने से महिलाओं की मुश्किलें बढ़ी हैं लेकिन उन्हें पारिवारिक ज़रूरतों के साथ-साथ अपने शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान भी रखना होगा.
यह कहना है यूएन वीमेन संस्था की भारत में उपप्रतिनिधि निष्ठा सत्यम का, जिन्होंने कोविड-19 के कारण उपजी चिंताओं से निपटने के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने की अहमियत पर बल दिया है.
वैश्विक महामारी कोविड-19 का मुक़ाबला करने के प्रयासों में भारत ने भी अनेक क़दम उठाए हैं. इनमें एक प्रमुख क़दम देश भर में 21 दिनों के लिए पूर्ण तालाबंदी करने की घोषणा भी है. भारत जैसे घनी आबादी वाले देश में इस तरह के ऐहतियाती उपाय कितने कारगर साबित होंगे और दुनिया के दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाले देश भारत में ग्रामीण इलाक़ों और हाशिए पर रहने वाले लोगों पर क्या असर पड़ेगा.
विश्व भर में कोरोनावायरस (कोविड-19) संक्रमण के बढ़ते मामलों से दुनिया के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी होती जा रही हैं.
कल्पनाशीलता और दूरदृष्टि के सहारे स्वच्छ ऊर्जा में बड़े बदलावों को मूर्त रूप दिया जा सकता है जिससे ग्रामीण इलाक़ों में भी लोग किफ़ायती दरों पर भरोसेमंद ढंग से स्वच्छ ऊर्जा का इस्तेमाल कर पाएंगे.
यह कहना है भारत में ऊर्जा, पर्यावरण और जल मामलों पर परिषद के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरुणभा घोष का जिन्होंने हाल ही में न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में विकास नीति पर समिति की बैठक में शिरकत की.
टिकाऊ विकास के 2030 एजेंडा के सातवें लक्ष्य में सभी के लिए टिकाऊ, किफ़ायती, भरोसेमेंद और आधुनिक ऊर्जा सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है.
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