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संयुक्त राष्ट्र एड्स कार्यक्रम में वरिष्ठ सलाहकार नंदिनी कपूर का कहना है कि LGBTQIA+ समुदाय के साथ भेदभाव को रोकने और समाज में उनकी स्वीकार्यता बढ़ाने के लिए शिक्षा प्रसार व जागरूकता बढ़ाने पर ध्यान देना ख़ासतौर पर ज़रूरी है. साथ ही सरकारी योजनाओं में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सक्रियता से प्रयास किए जाने चाहिए.
बच्चों में कुपोषण एक बड़ी चुनौती है लेकिन अक्सर सही ऑंकड़ों के अभाव में योजनाओं का लाभ ज़रूरतमंद समुदायों तक पहुंचाने में मुश्किलें पेश आती हैं. उदाहरण के तौर पर भारत में शहरी प्रवासियों के बच्चों में कुपोषण पर सटीक जानकारी उपलब्ध नहीं है.
टिकाऊ विकास लक्ष्यों के 2030 एजेंडा का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि विकास प्रक्रिया में सभी की भागीदारी हो और कोई भी पीछे ना छूटने पाए.
वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक़ भारत में 31 फ़ीसदी यानी लगभग 40 करोड़ लोग शहरों में रहते हैं. ये आबादी 2030 तक बढ़कर 41 फ़ीसदी होने का अनुमान है. शहरों को ‘इंजन ऑफ़ ग्रोथ’ या आर्थिक विकास का इंजन भी कहा जाता है.
गॉंवों से लोग रोज़गार व बेहतर जीवन की तलाश में शहरों का रुख़ करते हैं और पिछले कुछ सालों में जलवायु परिवर्तन भी पलायन की वजह बनकर उभरा है.
लेकिन ग़रीबी दूर करने की तलाश में आए लोग शहरों के अविकसित बाहरी इलाक़ों या झुग्गी-झोपड़ियों में बिना सुविधाओं के संवेदनशील हालात में रहने के लिए मजबूर हो जाते हैं.
कोस्टा रीका अपेक्षाकृत एक छोटा देश होने के बावजूद जलवायु कार्रवाई के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है. देश में बिजली उत्पादन का 95 फ़ीसदी से ज़्यादा हिस्सा कार्बन उत्सर्जन से मुक्त है और 52 प्रतिशत इलाक़ा वनों से ढंका हुआ है.
स्पेन के मैड्रिड में हुए कॉप-25 जलवायु सम्मेलन के आकलन और कार्बन न्यूट्रैलिटी (नैट कार्बन उत्सर्जन स्थिति) के भविष्य पर बातचीत के लिए सोमवार, 20 जनवरी को भारत की राजधानी नई दिल्ली में संयुक्त राष्ट्र के स्थानीय मुख्यालय में एक चर्चा आयोजित की गई.
17 जनवरी 2020 के इस साप्ताहिक बुलेटिन में शामिल हैं...
जलवायु संकट, गंभीर विषमताएँ, खाद्य असुरक्षा कर रही हैं जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित, एक इंटरव्यू
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हेती में दस वर्ष पहले आए भूकंप में हताहतों को किया गया याद, हेती को यूएन सहायता जारी रखने का वादा,
2019 दर्ज किया गया दूसरा सबसे ज़्यादा गर्म वर्ष, एक इंटरव्यू,
'एक स्वस्थ विश्व बनाने के लिए कोई "शॉर्ट कट" नहीं'- कहा -WHO प्रमुख ने.
विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने पुष्टि की है कि वर्ष 2019 रिकॉर्ड पर अब तक का दूसरा सबसे ज़्यादा गर्म साल साबित हुआ है. यूएन एजेंसी के अनुमान के मुताबिक़ वर्ष 2019 में वार्षिक वैश्विक वृद्धि 1.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज की गई.
इससे पहले 2016 ही साल 2019 से ज़्यादा गर्म दर्ज किया गया था. 1980 के बाद से हर दशक उससे पहले के दशक की तुलना में ज़्यादा गर्म दर्ज किया गया है.
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