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संयुक्त राष्ट्र की ताज़ा विश्व आर्थिक स्थिति व संभावनाओं पर वर्ष 2020 की रिपोर्ट बताती है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में लंबे समय से व्यापार विवादों के प्रभावों के कारण पिछले एक दशक में सबसे कम वृद्धि हुई. वर्ष 2019 में आर्थिक वृद्धि की दर 2.3 प्रतिशत दर्ज की गई.
रिपोर्ट के अनुसार जलवायु संकट, दुनिया भर में लगातार जारी गंभीर विषमताएँ, खाद्य असुरक्षा के बढ़ते स्तर और कुपोषण जैसी स्थितियाँ बहुत से समाजों में लोगों के जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर रही हैं जिनके कारण असंतोष भी बढ़ रहा है.
भारत में नीति आयोग ने सोमवार को टिकाऊ विकास लक्ष्यों (एसडीजी) की दिशा में हो रही प्रगति को आंकने के लिए एक इंडेक्स का दूसरा संस्करण जारी किया जिसे 'एसडीजी इंडिया इंडेक्स' का नाम दिया गया है.
इस इंडेक्स और एक नए डैशबोर्ड की मदद ऑंकड़ों को आसानी से हासिल करने के साथ-साथ विभिन्न राज्यों के प्रदर्शन का तुलनात्मक अध्ययन भी किया जा सकता है.
दिल्ली में अंशु शर्मा ने इस विषय में ज़्यादा जानकारी के लिए नीति आयोग में सलाहकार संयुक्ता समादार से बात की और सबसे पहले पूछा कि एसडीजी इंडिया इंडेक्स की ख़ास बात क्या है.
हमारा भोजन और कृषि प्रणाली आसपास मौजूद पौधों, पशुओं और सूक्ष्म जीवों पर निर्भर है. जैवविविधता –आनुवंशिक या प्रजातीय – हर स्तर पर किसानों,पशुपालकों और मछुआरों की भोजन उत्पादन की क्षमता बढ़ाती है.
इससे प्राकृतिक आपदा के झटकों और तनावों के प्रति सहनशीलता तो बढ़ती ही है, साथ ही उत्पादन प्रणालियों को सभी चुनौतियों से निपटने में मदद मिलती है.
इसलिए टिकाऊ ढंग से उत्पादन बढ़ाने के प्रयासों में जैवविविधता को एक महत्वपूर्ण संसाधन माना जा सकता है, जो टिकाऊ विकास के 2030 एजेंडा को पूरा करने के प्रयासों के लिए भी महत्वपूर्ण है.
समुद्र में प्लास्टिक कचरे की बढ़ती मात्रा ने हाल के वर्षों में गंभीर रूप धारण कर लिया है. संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण संस्था (UNEP) के मुताबिक़ समुद्र में प्रवेश करने वाला आधे से अधिक प्लास्टिक कचरा महज़ पॉंच देशों से आता है जिसमें से चार दक्षिण-पूर्वी एशिया से हैं.
यूएन संस्था की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस क्षेत्र में पैकेजिंग को लेकर कोई समग्र दृष्टिकोण या नीतियां नहीं हैं जिससे ये समस्या बढ़ती जा रही है.
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण संस्था - UNEP ने भारत में पर्यावरण कार्यकर्ता और मैगसेसे पुरस्कार विजेता सोनम वांगचुक के साथ मिलकर 11 दिसंबर को अंतरराष्ट्रीय पर्वत दिवस पर #Ilivesimply अभियान शुरू किया है.
इस अभियान के तहत एक website के ज़रिए लोग सतत जीवनशैली का संकल्प लेकर जलवायु परिवर्तन से निपटने में मदद करेंगे.
इसका नारा महात्मा गांधी के वक्तव्य से लिया गया है - Live simply so that others can simply live.
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