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  • #Indian Reservation ( Audio Podcast ) Part - 2
    Welcome to all of you once again in our original podcast, today we have brought the second part of the reservation so let's listen to this best audio podcast.
    Why the different backward classes also have the benifit of Reservation ?
    It also argued that the backward classes especially from SC and ST , who have taken the prestigious public post by taking the benifit of Reservation , should be excluded from the parview of Reservation however , this Concept has been adopted as creamy Layer towards other backward classes .
    But this argument is not justified because if a person is financially prosperous then it dose not mean that he will not be discriminated on social and caste grounds .
    Economic prosperity is not a measure of social equality . The biggest example of this the discrimination with President Ram Nath Kovind at Puri temple in odisha on March 18 , 2018 .
    The temple priests raised strong objection to the President entry into the temple , as the President comes for the depressed class .
    Earlier , on 25 June 2011 , National Scheduled Caste and Tribes Commission of India Chairman P.L Puniya was barred from entering a prestigious temple in Ranapuda , odisha .
    But when P.L Puniya entered the temple and worshipped with the help of administration , after he left the temple was washed with Gangaes Water and purified The Priests of the temple clearly stated that Puniya a special Section of society comes , whose entry into the temple is forbidden and their entry has polluted the temple .
    When individuals occupying key constitutiond positions can be discrimination against on caste grounds , the what would be the status of the common man from the dalit class I. the society can be imagined .
    Argument in favor of Reservation .
    • For the development of a Justice - based social system .
    • To include the weaker and backward sections of the society in the mainstream of society .
    • Representation of all sections of society is necessary in democracy .
    Argument against Reservation .
    • Against the principal of social justice because social justice is based on equality while Reservation is based on the principal of unequal conduce .
    • Others Reason .
    Should Reservation be abolished ?
    Many people argue that the Reservation was initially for 10 years in the constitution but later it has continuously extended till now .
    There is no need for Reservation , it should be abolished .
    Analysis
    Therefore the constitution of Reservation is necessary until the bonds of social order are relaxed .
    Every central government also support this view . Concept like dignity of the person describe in the preamble of the indian constitution are also inspired by sentiments . Reservation should be considered an evil weaker backward sections of society have definitely moved a head with Reservation .
    3 min
  • #Indian Reservation ( Audio Podcast ) Part - 1
    Hello and welcome to all of you once again in the original podcast, today we are going to listen to you, one of the best podcast which is probably one of the biggest issues in this country. Before listening to the podcast, we want to tell you that this podcast is based on the whole facts and it does not support any ideology, so let's listen to this great podcast.
    The title of the podcast is Reservation .
    So let's start now
    What is Reservation ?
    The purpose of Reservation is Provided Social Justice to the disadvantage , oppressed and backward classes .
    Under this , Some Places are Reserved for socially , educationally and economically Weakar Section , keeping them separate from the general Competition areas of public importantes .
    The rules of public competition are Relaxed to Ensure the Success and Represention of the people of these classes .
    Why Reservation ?
    The Indian Constitution Provide for Reservation of minorities , backward classes , scheduled castes and schedule d tribes .
    Such a system was necessary become some sections of society were separated from the mainstream due to social system ( due to birth - based varna system )
    No other country has Reservation on caste basic ?
    Many times it is argued that these is no system like reservation in any other country of the world , especially on caste - based basis , So Why reservation has been given on caste - basis in India ?
    The biggest reason behind this is the historical background of india .
    Actually , there was no prevalence of based social system in any country of the world .
    Mainstream in India finds mention of four varnas namely Brahman , kshatriya , vaishnav and Shudra , along with a clear division of their function .
    Infact in India , this social system has gained Religious ground and system has been going on since ancient time to the present . This is why the concept of Reservation has been adopted in India .
    Sholud Reservation be on economic basic ?
    But the 103rd Constitution Amendment Act provided for 10 percent Reservation for the economically backward classes , which was also approved by the S.C. from the point of view of sociology , there is no concept like Reservation one economic basic .
    But in the India , this arrangement has been made to strengthen the efforts of poverty alleviation and bring the economically backward classes into the mainstream of society .
    To listen to the podcast ahead, you will definitely hear the second part of it
    Thankyou for listening .
    3 min
  • विख्यात योगगुरु बीकेएस अयंगार की किताब ( लाइट ऑन लाइफ ) , Audio Book Summary
    जीवन में संपूर्णता का रास्ता है अष्टांग योग
    जीवन में संपूर्णता की खोज का रास्ता योग के जरिए ही जाता है। आंतरिक यात्रा योग से ही मुमकिन है। अधिकांश लोग सोचते हैं कि अगर उन्हें कोई दर्द या बीमारी नहीं है, तो वे स्वस्थ हैं, लेकिन वे शरीर मस्तिष्क के बीच असंतुलन के बारे में नहीं जानते। योग का शरीर पर तीन गुना प्रभाव होता है, सेहतमंद व्यक्ति को और स्वस्थ बनाता है। बीमारी बढ़ने से रोकता है, तेजी से स्वास्थ्यसुधार करता है।
    योग सिर्फ आसन नहीं है, अष्टांग योग है। इसका पहला अंग है-यम। इसमें सत्य व अहिंसा का पालन करना, चोरी न करना, ब्रह्मचर्य का पालन है। दूसरा अंग है नियम ईश्वर की उपासना, स्वाध्याय, तप, संतोष और शौच। तीसरा अंग है आसनों का अभ्यास यानी योगासन आसन शरीर की ताकत और स्वास्थ्य का संतुलन बनाए रखते हैं। चौथा अंग श्वास की तकनीकों या प्राणायाम से संबंधित है। श्वास ही चेतना का आधार है, श्वास को धीमा करके और उसे देखकर हम हमारा ध्यान बाहरी इच्छाओं जैसे वासना आदि से हटाकर बुद्धिमत्तापूर्ण चेतना यानी प्राणों पर लगा सकते हैं।
    प्रत्याहार पांचवा अंग है। मतलब इंद्रियों को आंतरिक दिशा की ओर मोड़कर हम दिमाग का नियंत्रण, रिक्तता महसूस कर सकते हैं। आखिरी तीन अंग हैं, एकाग्रता यानी धारणा, ध्यान और समाधि।
    - विख्यात योगगुरु बीकेएस अयंगार की किताब 'लाइट ऑन लाइफ से साभार
    3 min
  • भरोसे से स्वभाव बदलता है और इसी से जीवन.. .
    इंसान खुद पर से भरोसा बदलाव की संभावनाएं हमेशा देखते खो रहा है। कई मौकों उन्होंने मानवता के भीतर अनंत संभावनाओ पर इंसानों ने ताकत का समुंदर देखा है। भले आपको पूरी सीढ़ी का भद्दा दिखावा दिखे, लेकिन जब विश्वास से पहला कदम किया है। अतीत की उठाते हैं, तभी यात्रा शुरू हो जाती है। विश्वास घटनाएं इसकी प्रतीक और प्रेम पूरक हैं। प्रेम ही इकलौती ताकत है हैं। लेकिन अभी भी जो शत्रु को मित्र बना सकती है। जो इंसान
    यह बेहतरी के लिए विज्ञान अनुसंधान करता है, तो धर्म व्याख्या करता है। विज्ञान ज्ञान देता है, जिससे ताकत मिलती है, तो धर्म से विवेक पैदा होता है और इससे जीवन पर नियंत्रण विज्ञान जहां तथ्यों पर चलता है, धर्म मूल्यों पर। ये दोनों विरोधी नहीं साझेदार हैं। यदि आप उड़ नहीं सकते हो, तो दौड़ो। यदि दौड़ नहीं सकते हो, तो चलो। यदि चल भी नहीं सकते हो, तो रंगो। लेकिन हमेशा आगे बढ़ते रहो।
    के एक पड़ाव के बाद कुछ लोग बदलने से इंकार कर देते हैं, पर बदलना हमेशा मुमकिन होता है, बशर्ते स्वभाव के बदलने में उसका विश्वास हो। जब अंधेरा होता है, तभी आपको तारे नजर आते हैं। इसलिए जीवन के अँधियारे में भी उम्मीद के तारे रोशन रखिए।
    3 min
  • सदुपदेश ( Audio Book Summary )
    कर्म की स्वतंत्रता
    कुछ लोग कहते हैं सारे कर्म ईश्वर की इच्छा से कुछ कहते हैं नहीं, मनुष्य के प्रयत्न या पुरुषार्थ से इस संबंध में वेदांत कहता है कि यदि दूरदर्शिता पूर्वक देखा जाए तो इन दोनों बातों में कुछ भी अंतर नहीं है। अंतर केवल उन दृष्टियों में है, जो वास्तविकता तक नहीं पहुंचती। वेदांत बल्कि लोगों से प्रश्न करता है कि आप ईश्वर का क्या स्वरूप मान बैठे हैं- निराकार या साकार, शरीर के स्वामी की भांति कर्ता पुरुष है या केवल अकर्ता। यदि आप इन प्रश्नों का उत्तर दे देंगे, तो इस ग्रंथि का भेद अपने आप ही खुल जाएगा।
    मनुष्य में दो शक्तियां मौजूद हैं- एक स्वतंत्र अर्थात कर्म करने की शक्ति और दूसरी परतंत्र। अब यह देखना चाहिए कि मनुष्य कहाँ तक आजाद है और कहां तक गुलाम कहां तक मनुष्य में स्वतंत्रता अर्थात कर्म करने का अंश है और कहां तक, उसमें पराधीनता यानी प्रारब्ध का अंश है। जैसे रेशम के कीड़े का हाल है कि जब तक उसने अपने भीतर से रेशम नहीं निकाला, तब तक वह स्वतंत्र है और स्वेच्छाचारी कहा जाता है, मगर जब रेशम निकाल चुकता है तो फंस जाता। है, परतंत्र कहलाता है। इसी तरह जो मनुष्य कर्म कर चुका है, उसका फल भोगने के लिए पराधीन है, मगर
    जब कर्म किया ही नहीं, उसके लिए वह स्वतंत्र है। - 'स्वामी रामतीर्थ के सदुपदेश किताब से साभार
    3 min
  • संयमित मन परम मित्र है असंयमित मन सबसे बड़ा शत्रु ( Audio Podcast )
    संयमित मन परम मित्र है असंयमित मन सबसे बड़ा शत्रु
    एक संयमित मन हमारा सबसे बड़ा इसी तरह एक असंयमित मन हमारा सबसे भयंकर शत्रु हो सकता है। विचार ही हैं, जो हमें खुशी प्रदान करते हैं। इसी तरह विचार ही हैं, जो हमें निराशा के समंदर में फेंक सकते हैं। जब हम अपने घर को साफ रखना पसंद करते हैं, तो क्यों नहीं हम अपने मन को भी उतना ही साफ और चमकदार बनाए रखें।
    | हमारे विचार बीज हैं, कर्म वृक्ष हैं | मन को कैसे जीतें
    हम अपने जीवन में जो कर्म करते हैं। वे उन विचारों के परिणाम होते हैं, जो हमारे मन में आते हैं। यानी कहा जा सकता है कि हमारे विचार एक बीज हैं और हमारे कर्म उनके वृक्ष। अगर बीज ही बुरा होगा तो उसका वृक्ष भी उतना ही बुरा होगा। इसलिए अगर आप अच्छे कर्म करना चाहते हैं तो आपको अच्छे बीजों यानी अच्छे विचारों की जरूरत होगी। अगर आप अपने काम को सबसे बेहतर बनाना चाहते हैं तो आपको अपने विचारों को उतना ही बेहतर बनाने की जरूरत होगी। अगर हम इसे बेहतर नहीं बनाएंगे तो प्रकृति ऐसी स्थितियों को जन्म देगी
    जो हम आज हैं, वैसे कल नहीं होंगे। इसी तरह हमारे विचार भी हमेशा स्थायी नहीं हो सकते। मन एक कच्ची मिट्टी की तरह है। जिसे आप अपनी इच्छाशक्ति से कोई भी आकार दे सकते हैं। आपका मन बार-बार भटकेगा, क्योंकि वह माया से बना है, लेकिन बार-बार अभ्यास करने से वह एक जगह स्थिर होने हीं
    3 min
  • Practising the power of now ( audio book summary )
    समर्पण का चमत्कार
    कल्पना करो कि तुम घर पर शांत बैठे हो। अचानक एक अलार्म की तीखी आवाज आती है। तुम्हारे भीतर चिड़चिड़ापन उभरता है। इसका कारण $2 कुछ भी तो नहीं। फिर तुमने उसे भीतर क्यों रचा? तुमने नहीं, इसे मन में रचा अचेतन रूप में किंतु मन ने ही उसे क्यों रचा? क्य मन की अचेतन धारणा ही है प्रतिरोध, जिसका
    अनुभव तुम नकारात्मकता या यह सबकुछ एक आध्यात्मिक सकता है। एक प्रयास करी। स्वयं को पारदर्शी होता महसूस करो। मानो भौतिक शरीर अब ठोस नहीं रह गया है। अब मन को शोर या ऐसी ही किसी चीज पर एक नकारात्मक प्रतिक्रिया पैदा करने दो और उसे अपने से होकर गुजरने दो। अब वह किसी ठोस दीवार से नहीं टकरा रहा है। छोटी-मोटी चीजों के साथ अभ्यास करो। गाड़ी का हॉर्न, कुत्ते का भौंकना, बच्चों का चिल्लाना, ट्रैफिक जाम भीतर प्रतिरोध की एक दीवार रखने के बजाय उस सब को अपने से होकर त उपयोग गुजरने दो बिलकुल प्रतिरोध मत करो। जिस क्षण तुम अपनी अशांति को पूरी तरह से स्वीकार कर लोगे, तुम्हारी अशांति शांति में रूपांतरित हो जाएगी। जब तुम स्वयं को वैसे ही स्वीकार कर लेते हो, जैसे तुम हो तो हर क्षण सर्वोत्तम बन जाता है।
    3 min
  • Audio Book Summary ( 'आत्मज्ञान' ) , आचार्य विनोबा भावे
    अध्यात्म की तीन अनिवार्य निष्ठाएं हैं। पहली यह कि हममें नैतिक मूल्यों के प्रति आस्था होना चाहिए। कभी सच तो कभी झूठ- इस प्रकार की अवसरवादी मनोवृत्ति और दम्भ से भरा विचार नहीं चलेगा। जीवन को कुछ बुनियादी सिद्धांतों-मूल्यों पर आधारित होना चाहिए, जो अपरिवर्तनीय हों, निरपेक्ष हों। दूसरा यह कि जीवमात्र की एकता और पवित्रता पर विश्वास होना चाहिए। तीसरी बात है, मृत्यु के पश्चात जीवन की अखंडता का स्वीकार। आत्मज्ञान में ये तीनों
    बातें अनिवार्य हैं, इनके अलावा और भी कई बातें जोड़ी जा सकती हैं, परंतु इनमें से एक भी घटाई नहीं जा सकती। मृत्यु से जीवन खंडित नहीं होता। यह बाद में भी रहता है- चाहे सूक्ष्म रूप में रहे या स्थूल रूप में, निराकार में या साकार में, देहधारी नहीं तो देहविहीन रूप में ये भेद हो सकते हैं, लेकिन जीवन अखंड है। इंसान के जीने की क्रिया कितनी भी परिशुद्ध क्यों न हो, उसमें कुछ कर्मसंबंद्ध रहता ही है। कुछ विचार करने ही पड़ते हैं और कुछ विकार भी होते हैं। जहां हम अंदर की बात खोजने के लिए बैठते हैं, वहां ये सब चीजें बाहरी माननी चाहिए, यहां तक कि विचार भी इनसे अपने को अलग करने की शक्ति होनी
    चाहिए। यही ब्रह्मविद्या का आरंभ है। -
    3 min
  • Auduo Book ( प्रगति की प्रसन्नता की जड़ें , अपने ही भीतर ) , Part - 1
    सफलता दृढ़ आत्मविश्वास का ही प्रतिफल
    बाजार में वस्तुओं की कीमत दूसरे लोग निर्धारित करते है, पर मनुष्य के सम्बन्ध में उल्टा है। मनुष्य अपना मूल्यांकन करता है और जितना वह मूल्यांकन करता है उससे अधिक सफलता उसे कदापि नहीं मिलती। एक सामान्य परिवार से उठकर बेंजामिन डिजरायली जब इंग्लैण्ड के संसद सदस्य बने तो अन्य साथियों ने उनकी बड़ी उपेक्षा की। यहाँ तक कि वे जब बोलने के लिए उठते तो उन्हें बोलने भी नहीं दिया जाता।
    पर इन परिस्थितियों में भी डिजरायली ने अपने लक्ष्य को नहीं छोड़ा। उसके प्रति अपनी दृढ निष्ठा को व्यक्त करते हुए उन सदस्यों से कहते जो उनसे भाषण में व्यवधान डाला करते थे कि आपको एक दिन मेरी बातें अवश्य सुनना पड़ेगी।
    यह डिजरायली नहीं, उनका आत्मविश्वास बोल रहा था। उन्हें अपनी आन्तरिक शक्तियों पर विश्वास था वे अपना उचित मूल्यांकन करना जानते थे और इसी का परिणाम है कि प्रयत्न और पुरुषार्थ के बल पर वे एक दिन इंग्लैण्ड के प्रधानमन्त्री पद पर जा पहुँचे तथा जो लोग उनका उपहास करते थे वे ही उनके प्रशंसक और गुणगान करने वाले बन गये।
    प्रत्येक व्यक्ति को यह मानकर चलना चाहिए कि परमात्मा ने उसे मनुष्य के रूप में बनाया है और इस रूप में बनाते समय उसने मनुष्य की चेतना में सभी सम्भावनाओं के बीज डाल दिये हैं तथा उनके अकुरित होने की क्षमताएँ भी डाल दी हैं। पर प्रायः देखने में आता है हममें से अधिकांश व्यक्ति अपनी उन सुषुप्त क्षमताओं और सम्भावना के बीजों को विकसित तथा
    अंकुरित करने की चेष्टा तो दूर रही उनके सम्बन्ध में विचार तक करना नहीं चाहते।
    कई बार ऐसी परिस्थितियाँ आती हैं जिन्हें अनपेक्षित कहा जा सकता है और उनका उपयोग करने से भी हम संकोच करने लगते हैं। एक घटना नैपोलियन के एक सैनिक से सम्बन्धित है कहा जाता है कि उस सैनिक को नैपोलियन के पास कोई महत्त्वपूर्ण सन्देश लेकर भेजा गया था। सन्देश इतना महत्त्वपूर्ण था कि जितनी जल्दी हो सके पहुँचाने की बात भी उसके साथ जुड़ी हुई थी। सौंपे गये दायित्व को तत्परता से पूरा करने के लिए उस सैनिक ने अपना घोड़ा इतनी तेजी से दौड़ाया कि गन्तव्य स्थल पर पहुँचते ही उसके घोड़े ने दम तोड़ दिया। नैपोलियन ने उसकी कर्त्तव्य निष्ठा को सराहा तथा पत्र का उत्तर देकर उसी शीघ्रता से ले जाने को कहा। नैपोलियन को मालूम था कि सैनिक का घोड़ा मर चुका है। अतः वह बोला यह लो मेरा घोड़ा और जल्दी से यह उत्तर ले जाओ।' सैनिक भौचक्का होकर अपने सेनापति की ओर देखने लगा। लेकिन श्रीमान् सिपाही अपनी बात पूरी भी नहीं कर पाया था कि नैपोलियन ने बीच में ही टोककर कहां "मैं जानता हूँ कि तुम क्या कहना चाहते हो पर याद रखो कि दुनियाँ का कोई घोड़ा ऐसा नहीं कि उसकी सवारी तुम न कर सको।"
    8 min
  • Communication skills series
    What is Communication
    "Communication is the process of passing information (sending) and understanding (receiving) the same from one person to another through verbal and non verbal means . Thankyou :-
    मेरा आप से एक सरल सा सवाल है " क्या आप को Thankyou बोलना आता है ? "
    मेरा यह सवाल पढ़ कर आप सोच रहे होंगे कि यह किस तरह की बकवास है " क्या , हमें Thankyou बोलना नहीं आता क्या ? "
    जी हाँ सच में हम लोगों Thankyou बोलना नहीं आता है क्योंकि जिस तरह से हम लोगों को Thankyou बोलते है वह तो केवल मात्र एक New Normal Mathod है जिसका उपयोग हम सब करते है लेकिन सवाल यह है कि अगर यह सही तरीका नही है तो सही तरीका फिर है क्या ?
    चलिए आप को कुछ उदाहरणों कि सहायता से Thankyou बोलने का सही तरीका बताते हैं ।
    (१) जब आप को कोई lift देता है तो आप उसे जाते वक्त क्या कहते हैं ? केवल " Thankyou " पर अगली बार से आप को ऐसा नहीं करना है बल्कि इसकी जगह पर आप को कहना है " Thanks for the lift "
    (२) बैंक में जब आप कभी किसी और का pen उपयोग करते हैं तो वापस लौटाते वक्त केवल क्या कहते " Thankyou " जबकि अब आप को अगली बार से करता कहना है " Thanks for the pen " या आप कह सकते है " Thanks for the help "
    इन सब उदाहरणों से हमें एक बात साफ समझ में आती है और वो यह है कि हमें हमेशा किसी का भी Thanks करते वक्त उस चीज को भी साथ में जोड़ना चाहिए जिसकी सहायता से हमारी मदद की गयी है ।
    आप अगर इस Technique का अपनी Communication skill या Communication में जोड़ते हैं तो आप मेरा यकीन मानिए आप तेजी से लोगों के बीच लोकप्रिय होंगे और सब आप को प्रसदं करना शुरू करेंगे ।
    4 min

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